Lucknow News: PGI में 1,000 लोगों का रैन बसेरा, डेढ़ किमी फ्लाईओवर और जलभराव से निजात की तैयारी
Lucknow News: पीजीआई में एक हजार तीमारदारों के लिए रैन बसेरा, डेढ़ किमी फ्लाईओवर, 30 करोड़ के नाले, धार्मिक बस सेवा और वेंडिंग प्लाजा से लखनऊ में राहत, जाम-जलभराव घटेगा।
PGI में 1,000 लोगों का रैन बसेरा, डेढ़ किमी फ्लाईओवर और जलभराव से निजात की तैयारी (Photo- Newstrack)
Lucknow News: राजधानी में मरीजों के तीमारदारों से लेकर रोजाना जाम झेलने वाले वाहन चालकों, धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, जलभराव से परेशान कॉलोनियों और फुटपाथ पर कारोबार करने वाले छोटे दुकानदारों तक—अलग-अलग वर्गों को राहत देने वाली कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आकार लेने लगी हैं। एसजीपीजीआई के पास एक हजार तीमारदारों की क्षमता वाला आधुनिक आठ मंजिला रैन बसेरा तैयार हो रहा है, वहीं पीजीआई के सामने जाम की पुरानी समस्या से निपटने के लिए करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर की योजना बनाई गई है। दूसरी ओर इंदिरा नगर और गोमतीनगर में लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से नए नाले बनाए जाएंगे, चंद्रिका देवी से नैमिषारण्य तक सीधी मिनी बस सेवा की तैयारी है और शहर में रेहड़ी-पटरी कारोबारियों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग प्लाजा विकसित किए जाएंगे।
इन योजनाओं का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि वे केवल निर्माण परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि राजधानी के उन रोजमर्रा के संकटों को संबोधित करती हैं जिनसे लाखों लोग जूझते हैं—अस्पताल में मरीज के साथ रहने की जगह न मिलना, पीजीआई रोड पर घंटों जाम, बारिश में डूबती सड़कें, धार्मिक स्थलों तक सीधी सार्वजनिक परिवहन सेवा का अभाव और फुटपाथों पर अतिक्रमण से पैदल यात्रियों को होने वाली परेशानी।
पीजीआई में बनेगा एक हजार लोगों का आधुनिक रैन बसेरा
संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में इलाज कराने आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए सबसे बड़ी समस्या लंबे समय तक ठहरने की होती है। गंभीर मरीज कई दिनों या हफ्तों तक भर्ती रहते हैं और उनके तीमारदारों को महंगे होटल, लॉज या अस्थायी व्यवस्था का सहारा लेना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए संस्थान के गेट नंबर दो के पास आठ मंजिला आधुनिक रैन बसेरा तैयार किया जा रहा है।भवन का मूल ढांचा तैयार हो चुका है और अब प्लास्टर, दरवाजे-खिड़कियां, लिफ्ट, आंतरिक साज-सज्जा, बेड और बिस्तर लगाने का काम होना है। संस्थान की योजना इसे इसी वर्ष सर्दी के मौसम तक शुरू करने की है।
एसजीपीजीआई निदेशक पद्मश्री डॉ. आर.के. धीमान के अनुसार यहां करीब 1,000 तीमारदारों के ठहरने की व्यवस्था होगी। संस्थान में रोज औसतन करीब चार हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिन्हें सुपरस्पेशियलिटी इलाज के लिए लंबे समय तक रुकना पड़ता है। इसलिए रैन बसेरा उनके परिजनों के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
AC, नॉन-AC कमरे, डोरमेटरी और सस्ती कैंटीन
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश हर्षवर्धन के अनुसार रैन बसेरे में केवल साधारण बिस्तर ही नहीं होंगे, बल्कि अलग-अलग जरूरत और आर्थिक क्षमता के अनुसार कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यहां सिंगल बेड, साझा बेड और डोरमेटरी की व्यवस्था होगी। AC और नॉन-AC दोनों प्रकार के कमरे बनाए जाएंगे। इसके साथ ही परिसर में एक ऐसी कैंटीन होगी जहां तीमारदारों को होटल और बाजार की तुलना में किफायती दरों पर भोजन और नाश्ता मिल सके।
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ उन परिवारों को होगा जो पूर्वांचल, बिहार, मध्य प्रदेश या प्रदेश के दूर-दराज जिलों से इलाज के लिए लखनऊ आते हैं और जिन्हें किराए के कमरे या होटल पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
पीजीआई के सामने जाम से राहत के लिए डेढ़ किलोमीटर फ्लाईओवर
रैन बसेरे के साथ ही पीजीआई क्षेत्र की दूसरी बड़ी समस्या—जाम—से निपटने की तैयारी भी शुरू हो गई है। लखनऊ-रायबरेली रोड पर पीजीआई के सामने करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यह इलाका सुबह, दोपहर और शाम तीनों समय भारी यातायात दबाव झेलता है। अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों की एंबुलेंस, स्थानीय आबादी, रायबरेली रोड का लंबी दूरी वाला यातायात और सड़क किनारे व्यावसायिक गतिविधियां मिलकर जाम को गंभीर बनाती हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पीजीआई और मोहनलालगंज कॉरिडोर से प्रतिदिन लगभग 1.25 से 1.40 लाख वाहन गुजरते हैं। इस कारण अस्पताल पहुंचने वाले गंभीर मरीजों को भी कई बार ट्रैफिक में फंसना पड़ता है।
सेंट्रल रोड फंड से निर्माण की तैयारी
फ्लाईओवर निर्माण को सेंट्रल रोड फंड (CRF) से कराने की योजना है। करीब चार वर्ष पहले भी यहां फ्लाईओवर बनाने का प्रस्ताव तैयार हुआ था, लेकिन आउटर रिंग रोड बनने और क्षेत्रीय सीमाओं में बदलाव के बाद योजना आगे नहीं बढ़ पाई।
अब इसे नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। यदि परियोजना मंजूर होकर समय पर पूरी होती है तो पीजीआई, वृंदावन योजना, मोहनलालगंज और रायबरेली की ओर जाने वाले हजारों वाहन चालकों को राहत मिल सकती है। सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में भी शहीद पथ से पीजीआई-मोहनलालगंज तक पीक ऑवर में लगने वाले जाम का मुद्दा उठ चुका है। अब फ्लाईओवर को इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
चंद्रिका देवी से नैमिषारण्य तक सीधी मिनी बस
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए परिवहन निगम चंद्रिका देवी मंदिर से नैमिषारण्य तक सीधी मिनी बस सेवा शुरू करने की तैयारी में है। प्रस्तावित मार्ग में कैसरबाग से बीकेटी स्थित चंद्रिका देवी मंदिर, गोमती पुल, माल, भरावन, अतरौली, गोंडवा और हत्याहरण तीर्थ होते हुए नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी धाम को जोड़ा जाएगा। क्षेत्रीय परिवहन निगम की टीम पहले इस मार्ग का सर्वे करेगी। सब कुछ तय समय पर हुआ तो महीने के अंतिम सप्ताह तक बस सेवा शुरू हो सकती है।
इस सेवा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि अभी चंद्रिका देवी और नैमिषारण्य जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के बीच सीधी सार्वजनिक बस सुविधा सीमित है। श्रद्धालुओं को बीच में वाहन बदलने पड़ते हैं, जिससे समय और किराया दोनों बढ़ते हैं।
32 किलोमीटर तक कम हो सकती है यात्रा दूरी
लखनऊ से नैमिषारण्य की दूरी वर्तमान मार्ग से करीब 85 किलोमीटर पड़ती है, जबकि चंद्रिका देवी होकर प्रस्तावित मार्ग में लगभग 32 किलोमीटर की दूरी कम होने का अनुमान है। इससे श्रद्धालुओं के समय और किराये दोनों की बचत हो सकती है। दूसरे चरण में लखनऊ से भवरेश्वर महादेव के लिए भी बस सेवा शुरू करने की योजना है। इससे धार्मिक पर्यटन के छोटे लेकिन लोकप्रिय स्थलों को राज्य परिवहन नेटवर्क से सीधे जोड़ने का रास्ता खुलेगा।
इंदिरा नगर और गोमतीनगर में 30 करोड़ से बनेंगे नाले
राजधानी के दो बड़े जलभराव प्रभावित क्षेत्रों—इंदिरा नगर और गोमतीनगर—को राहत देने के लिए लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से दो बड़े नाले बनाए जाएंगे। इंदिरा नगर में मुंशी पुलिया से कुकरैल तक नया नाला प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य बारिश के समय सड़कों और कॉलोनियों में जमा होने वाले पानी को तेजी से बाहर निकालना है।
गोमतीनगर के विपिन खंड में डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मारक के सामने बने अंडरपास में हर वर्ष बारिश के दौरान भारी जलभराव होता है। यहां करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से नया नाला बनाने की योजना है। यह अंडरपास से शुरू होकर भागीदारी भवन के सामने से होते हुए नगर निगम के बैरल तक जाएगा।
जहां बच्चे पानी में नहाते दिखे थे, वहां स्थायी समाधान की कोशिश
करीब दो वर्ष पहले भारी बारिश के दौरान आंबेडकर स्मारक के सामने का अंडरपास पूरी तरह पानी में डूब गया था। हालात ऐसे हो गए थे कि सड़क किसी स्विमिंग पूल जैसी दिखाई देने लगी थी और बच्चे वहां पानी में नहाते नजर आए थे। उस घटना के बाद इस इलाके में स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग तेज हुई थी। नया नाला बनने से विपिन खंड, विपुल खंड और आसपास के कई सेक्टरों को राहत मिलने की उम्मीद है। दोनों परियोजनाओं से करीब दो लाख लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है।
अब फुटपाथ पर बिखरी दुकानें नहीं, बनेंगे वेंडिंग प्लाजा
शहर में रेहड़ी-पटरी कारोबार को व्यवस्थित करने और फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए खाली रखने के उद्देश्य से वेंडिंग प्लाजा विकसित करने की योजना को भी मंजूरी मिल गई है। मेट्रो स्टेशनों, प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास ऐसे समर्पित स्थान विकसित किए जाएंगे जहां छोटे दुकानदार व्यवस्थित तरीके से कारोबार कर सकें।
आज लखनऊ के कई प्रमुख बाजारों और मेट्रो स्टेशनों के बाहर फुटपाथों का बड़ा हिस्सा पटरी दुकानों से घिर जाता है। इससे पैदल यात्रियों को सड़क पर उतरकर चलना पड़ता है और यातायात भी बाधित होता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य दुकानदारों को हटाना नहीं, बल्कि उन्हें वैध और व्यवस्थित स्थान देकर फुटपाथ को पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाना है।
चार से पांच मीटर चौड़े पैदल गलियारे
मॉडल डेवलपमेंट प्लान में फुटपाथों की चौड़ाई चार से पांच मीटर तक रखने का प्रस्ताव है। मेट्रो स्टेशनों और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच स्पष्ट पैदल गलियारे बनाए जाएंगे। इससे शहर के ऐसे हिस्सों में ‘वॉकएबिलिटी’ बढ़ सकती है जहां आज पैदल चलना सबसे कठिन है। आधुनिक शहरी नियोजन में पैदल यात्री को प्राथमिकता देना इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि छोटी दूरी की यात्रा में यदि सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध हो तो निजी वाहन का उपयोग भी कम हो सकता है।
पानी, शौचालय, CCTV और पार्किंग भी होगी
प्रस्तावित वेंडिंग प्लाजा केवल दुकानों के लिए चिह्नित जगह नहीं होंगे। यहां पेयजल, सार्वजनिक शौचालय, बैठने की व्यवस्था, कूड़ेदान, CCTV कैमरे, प्रकाश व्यवस्था और छायादार प्रतीक्षालय उपलब्ध कराने की योजना है। वाहनों के लिए अलग पार्किंग निर्धारित की जाएगी, ताकि खरीदार सड़क पर वाहन खड़ा कर यातायात बाधित न करें। इस मॉडल को सही तरीके से लागू किया गया तो इसका लाभ तीनों पक्षों को मिलेगा—पटरी दुकानदारों को स्थायी कारोबारी जगह, ग्राहकों को व्यवस्थित बाजार और पैदल यात्रियों को सुरक्षित फुटपाथ।
कारीगर क्लस्टर और फूड स्ट्रीट भी बनेंगी
लखनऊ की स्थानीय पहचान को जोड़ते हुए हेरिटेज बाजार, कारीगर क्लस्टर और स्थानीय खानपान आधारित फूड स्ट्रीट विकसित करने का प्रस्ताव भी है।चिकनकारी, जरी-जरदोजी, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान से जुड़े कारोबारियों को ऐसे क्लस्टरों में स्थान मिलने से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ हो सकता है।लैंडस्केपिंग, सार्वजनिक कला और खुले सार्वजनिक स्थलों को नया स्वरूप देने की भी योजना है।
पांच योजनाएं, एक साझा लक्ष्य—शहर को लोगों के लिए आसान बनाना
इन सभी परियोजनाओं को अलग-अलग देखें तो वे स्वास्थ्य, सड़क, धार्मिक पर्यटन, जलनिकासी और छोटे व्यापार से जुड़ी दिखाई देती हैं। लेकिन इनके पीछे एक साझा शहरी चुनौती है—लखनऊ की बढ़ती आबादी और यातायात के बीच रोजमर्रा की जिंदगी को थोड़ा आसान बनाना। पीजीआई में रैन बसेरा मरीज के परिवार का आर्थिक बोझ कम करेगा, फ्लाईओवर अस्पताल के सामने जाम घटा सकता है, नई बस सेवा धार्मिक स्थलों को जोड़ेगी, नाले बारिश में डूबती कॉलोनियों को राहत देंगे और वेंडिंग प्लाजा छोटे व्यापार तथा पैदल यात्री के बीच चल रहे स्थान के संघर्ष को व्यवस्थित कर सकते हैं।