अब कागज़ के लिए नहीं कटेंगे पेड़... लखनऊ में लॉन्च हुआ 'कॉपियो', 75 जिलों तक पहुंचेगा कॉपियर पेपर

Lucknow: लखनऊ में बिना पेड़ और लकड़ी के तैयार ईको-फ्रेंडली कॉपियो कॉपियर पेपर लॉन्च हुआ। यह पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास की दिशा में एक नई पहल के रूप में पेश किया गया है।

Update:2026-08-05 20:13 IST

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Lucknow: पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में राजधानी लखनऊ में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। होटल क्लार्क अवध में मेसर्स क्वांटम पेपर्स और लखनऊ पेपर डिस्ट्रीब्यूटर्स की ओर से बिना पेड़ और लकड़ी के तैयार किए गए ईको-फ्रेंडली 'कॉपियो' (Kopio) कॉपियर पेपर का भव्य शुभारंभ किया गया। आयोजकों ने इसे केवल एक नए उत्पाद की लॉन्चिंग नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में बड़ा कदम बताया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वैश्य नटवर गोयल ने कॉपियो कॉपियर पेपर का अनावरण करते हुए कहा कि यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान की भावना को साकार करती है। उन्होंने कहा कि इस पेपर के निर्माण में न तो लकड़ी का उपयोग किया गया है और न ही किसी पेड़ या जंगल की कटाई की गई है। ऐसे उत्पाद जंगलों की कटाई रोकने और पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।


क्वांटम पेपर्स के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर संजय खोसला और लखनऊ पेपर डिस्ट्रीब्यूटर्स के संचालक आई.डी. गोयल ने बताया कि 'कॉपियो' को अत्याधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से तैयार किया गया है। यह उच्च गुणवत्ता वाला कॉपियर पेपर प्रिंटिंग और फोटोकॉपी के सभी प्रमुख मानकों पर खरा उतरता है। इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को टिकाऊ, भरोसेमंद और पर्यावरण हितैषी विकल्प उपलब्ध होगा।

विशिष्ट अतिथि पुष्पिंदर कुमार ने कहा कि आज समय की जरूरत केवल नए उत्पादों की नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक और सोच की है जो विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करे। उनके मुताबिक, 'कॉपियो' सिर्फ एक कॉपियर पेपर नहीं, बल्कि हरित क्रांति की शुरुआत है, जो लोगों को ईको-फ्रेंडली उत्पाद अपनाने और पर्यावरण के प्रति जागरूक होने के लिए प्रेरित करेगा।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आए वितरकों, स्टेशनरी व्यवसायियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को उत्पाद की निर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता मानकों और वितरण प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने बताया कि कॉपियो जल्द ही प्रदेश के सभी 75 जिलों में उपलब्ध होगा। उनका विश्वास है कि बिना पेड़ों की कटाई से तैयार यह कॉपियर पेपर उद्योग जगत के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनेगा और पर्यावरण संरक्षण के साथ आधुनिक तकनीक के संतुलित उपयोग की नई मिसाल स्थापित करेगा।

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