मोहनलालगंज से निगोहां तक धर्मांतरण गिरोह का शातिराना नेटवर्क: पहचान छिपाकर ले रहे थे आरक्षण का लाभ, 'चंगाई सभा' में बदलते थे नाम

Lucknow: लखनऊ के मोहनलालगंज और निगोहां क्षेत्र में कथित अवैध धर्मांतरण गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में आरोप है कि कुछ लोग धर्मांतरण के बाद भी पुराने हिंदू नाम और पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर अनुसूचित जाति से जुड़ी सुविधाओं का लाभ उठा रहे थे।

Update:2026-07-29 16:12 IST

Lucknow News

Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में अवैध धर्मांतरण कराने वाले गिरोहों के शातिराना खेल का बड़ा खुलासा हुआ है। मोहनलालगंज और निगोहां क्षेत्र में हिंदुओं को बरगलाकर ईसाई बनाने वाले पादरी व उनके सहयोगी दोहरी जिंदगी जी रहे थे। गिरोह के मुख्य सदस्य ईसाई धर्म अपनाकर चंगाई सभाओं में पादरी और जोसेफ बन जाते थे, लेकिन कागजों और पहचान पत्र में अपना पुराना हिंदू नाम ही बनाए रखते थे, ताकि अनुसूचित जाति (SC) को मिलने वाले सरकारी आरक्षण और सुविधाओं का पूरा लाभ उठाया जा सके।

सुब्रमण्यम बना 'डेनियल' और मलखान बना 'जोसेफ'

पुलिस जांच में धर्मांतरण गिरोह के दो प्रमुख चेहरों का सच सामने आया है:

डेनियल उर्फ सुब्रमण्यम: मोहनलालगंज पुलिस द्वारा हाल ही में जेल भेजा गया पादरी डेनियल का वास्तविक हिंदू नाम सुब्रमण्यम है। वह हरिकंशगढ़ी का निवासी है। वह बनारस की एक चर्च में पास्टर (पादरी) का काम करता था, लेकिन उसने अनुसूचित जाति का आरक्षण लाभ जारी रखने के लिए अपने पहचान पत्र पर नाम दर्ज नहीं बदला था। उसे चर्च से धर्मांतरण का टारगेट पूरा करने पर भारी फंड मिलता था।

मलखान उर्फ जोसेफ: निगोहां क्षेत्र में करीब 500 से अधिक हिंदुओं का धर्मांतरण कराने के आरोप में जेल जा चुका मलखान (हाल ही में जमानत पर बाहर) भी अनुसूचित जाति से आता है। वह सामान्य दिनों में मलखान रहता था, लेकिन चंगाई सभाओं में पहुंचते ही 'जोसेफ' बन जाता था।

तमिलनाडु से जुड़ाव और वाराणसी में धर्मांतरण का ठेका

पुलिस के अनुसार, आरोपी सुब्रमण्यम उर्फ डेनियल किशोरावस्था में तमिलनाडु के अरुप्पुकोट्टई स्थित एक एफजीपीसी (FGPC) चर्च से करीब 28 वर्षों तक जुड़ा रहा। वहाँ उसने कन्याकुमारी निवासी सुबला से विवाह किया और 1998 में हरिकंशगढ़ी वापस लौट आया। इसके बाद उसे क्षेत्र में धर्मांतरण का ठेका दिया गया। बीते शुक्रवार को पुलिस ने डेनियल और उसकी पत्नी समेत 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उनके पास से भारी मात्रा में ईसाई धर्म से जुड़ी सामग्री और धार्मिक पुस्तकें बरामद हुई थीं।

कलावा छोड़कर गले में क्रॉस पहनने लगे थे ग्रामीण

क्षेत्र के भोलाखेड़ा, फुलवरिया और बक्तौरी खेड़ा गांवों में बड़ी संख्या में लोग धर्मांतरण के जाल में फंस चुके हैं। ग्रामीणों के अनुसार:

बदली जीवनशैली: धर्मांतरित हो चुके लोगों ने हाथ में कलावा पहनना छोड़ दिया है और अब गले में क्रॉस पहनते हैं।

प्रतिमाएं हटाईं: घरों से देवी-देवताओं की प्रतिमाएं हटा दी गई हैं। हर रविवार को प्रार्थना सभा के बाद टोलियां बनाकर गांवों में धार्मिक पुस्तकों का वितरण किया जाता है।

इस मामले को लेकर अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी और स्थानीय हिंदू संगठनों ने कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया था।

कार्रवाई के खौफ से पादरी फिर बना पेंटर, दिखावे के लिए 'घर वापसी'

क्षेत्र में धर्मांतरण का मामला तूल पकड़ने और पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद गिरोह के अन्य सदस्य खौफ में हैं। मोहनलालगंज-मौरावां मार्ग स्थित एक गांव का रहने वाला पादरी, जो पहले बीमारियों के इलाज का झांसा देकर लोगों को चंगाई सभाओं में बुलाता था, उसने आनन-फानन में दोबारा अपना पेंटिंग का काम शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों ने बताया कि उसके घर की दीवारों पर सीमेंट का बड़ा क्रॉस बना हुआ है और उसके यहाँ मिजोरम व तमिलनाडु से लोग आते थे। पुलिसिया कार्रवाई के डर से बाहरी लोग भाग चुके हैं और वह खुद को बचाने के लिए दिखावे की घर वापसी कर पेंटर का काम करने लगा है, हालाँकि वह अब भी केवल 25 दिसंबर (क्रिसमस) और गुड फ्राइडे ही मनाता है।

धर्मांतरण और आरक्षण पर संवैधानिक स्थिति

अनुसूचित जाति (SC) और धर्मांतरण नियम: भारत के संविधान (अनुसूचित जाति आदेश, 1950) के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म मानने वाले व्यक्तियों को ही प्राप्त है। यदि कोई व्यक्ति इस्लाम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो कानूनन उसे अनुसूचित जाति (SC) के आरक्षण और सुविधाओं का अधिकार समाप्त हो जाता है।

उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम: उत्तर प्रदेश में प्रलोभन, छल, बल या धोखे से कराए गए धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कानून लागू है। इसमें गैर-जमानती धाराओं के तहत 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

Tags:    

Similar News