जब किताबों से निकली आवाज सड़क तक पहुंची: टीचर्स की कमी पर छात्रों ने लगाया मोहान रोड पर जाम
Lucknow News: लखनऊ में शिक्षकों की कमी से नाराज जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्रों ने मोहान रोड पर प्रदर्शन किया। मंत्री असीम अरुण ने समस्याएं सुनीं और शिक्षक की कमी दूर करने का आश्वासन दिया।
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Lucknow News: लखनऊ में शुक्रवार को शिक्षकों की कमी से परेशान छात्रों का आक्रोश सड़क पर देखने को मिला। जयप्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने स्कूल में पर्याप्त शिक्षक न होने और इससे पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए बुद्धेश्वर चौराहे के पास मोहान रोड पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में छात्रों के सड़क पर उतरने से यातायात प्रभावित हुआ और कुछ देर के लिए सड़क पर जाम की स्थिति बन गई।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि विद्यालय में शिक्षकों की पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई विषयों की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित नहीं हो पा रही हैं। छात्रों ने मांग की कि स्कूल में जल्द से जल्द पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की तैनाती की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई सुचारु रूप से चल सके।
छात्रों के सड़क पर उतरने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने का प्रयास किया। करीब 15 मिनट तक बुद्धेश्वर चौराहे के आसपास यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान सड़क पर वाहनों की कतार लग गई। इसी बीच समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण भी मौके पर पहुंच गए। छात्रों ने मंत्री को घेरकर अपनी समस्याएं बताईं। मंत्री ने सड़क पर ही बच्चों से बातचीत कर उनकी शिकायतें सुनीं और उन्हें समझाने का प्रयास किया। इसके बाद मंत्री छात्रों के साथ विद्यालय पहुंचे और वहां बैठकर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना।
छात्रों ने मंत्री के सामने शिक्षकों की कमी के साथ पढ़ाई से जुड़ी अन्य परेशानियां भी रखीं। मंत्री ने छात्रों को आश्वस्त किया कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाएगा और शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
मंत्री के आश्वासन के बाद छात्रों ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया और सड़क से हट गए। इसके बाद यातायात व्यवस्था सामान्य हो सकी।
इस पूरे घटनाक्रम में खास बात यह रही कि जिन बच्चों के हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए थीं, वही बच्चे अपनी पढ़ाई के अधिकार की मांग लेकर सड़क पर खड़े दिखाई दिए। छात्रों का यह विरोध साफ संदेश दे गया कि कक्षा में शिक्षक नहीं होंगे तो सवाल सिर्फ पढ़ाई का नहीं, बच्चों के भविष्य का भी होगा।