Lucknow News: 7 सर्जरी, बदला चेहरा और नई पहचान... फिर भी पुलिस के हत्थे चढ़ी ‘लोला’
Lucknwo News: लखनऊ में विदेशी महिलाओं को अवैध तरीके से ठहराने और देह व्यापार नेटवर्क चलाने की आरोपी उज्बेकिस्तानी महिला लोला कायूमोवा गिरफ्तार।
Lucknow News
Lucknow News: लखनऊ में विदेशी महिलाओं को अवैध तरीके से ठहराकर देह व्यापार का नेटवर्क संचालित करने के मामले में करीब एक साल से फरार चल रही उज्बेकिस्तानी महिला लोला कायूमोवा आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गई। पुलिस के मुताबिक, पहचान छिपाने के लिए लोला ने प्लास्टिक सर्जरी का सहारा लिया और अपने हुलिए में बड़े बदलाव कराए, लेकिन लगातार की जा रही निगरानी और जांच के बाद उसे मंगलवार देर रात मैक्स अस्पताल के पास से गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस और आईबी की संयुक्त टीम ने की।
छापेमारी से बचने के लिए बदला हुलिया, फर्जी दस्तावेजों से बनाई नई पहचान
पुलिस जांच में सामने आया है कि लोला ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अपनी पहचान बदलने की पूरी कोशिश की। आरोप है कि उसने फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट के आधार पर आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज तैयार कराए। कथित तौर पर मैरिज सर्टिफिकेट में जिस व्यक्ति को पति बताया गया, वह उसका ग्राहक था।
एक फ्लैट से खुला था विदेशी महिलाओं के नेटवर्क का राज
इस मामले की शुरुआत जून 2025 में हुई कार्रवाई से हुई थी। सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने ओमेक्स अपार्टमेंट के एक फ्लैट पर छापा मारकर दो उज्बेकिस्तानी युवतियों नीलोफर और होलिड़ा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि विदेशी युवतियों को लखनऊ लाने और उनके ठहरने की व्यवस्था में लोला की भूमिका थी। इसके बाद से ही पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
49 की उम्र में 29 जैसा दिखने की कोशिश, सात सर्जरी का दावा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, लोला ने अपना चेहरा और शारीरिक पहचान बदलने के लिए करीब सात प्लास्टिक सर्जरी कराईं। इनमें चेहरे, होंठ, अंडरआर्म्स और निजी अंगों से जुड़ी सर्जरी शामिल होने का दावा किया गया है। जांच में अहिमामऊ स्थित एक निजी क्लीनिक और वहां के डॉक्टर की भूमिका भी सामने आने की बात कही जा रही है।
अब खुलेगा पूरे नेटवर्क का राज
लोला की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में विदेशी महिलाओं को लखनऊ लाने, उनके ठहरने की व्यवस्था करने और कथित रैकेट को संचालित करने में मदद करने वाले अन्य लोगों की जानकारी मिल सकती है। पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और आरोपियों को कथित रूप से संरक्षण देने वालों की भूमिका की भी जांच कर रही है।