Lucknow News: लखनऊ में करोड़ों का I&C सेंटर बंद, फिटनेस के लिए निजी ATS के भरोसे वाहन मालिक

Lucknow News: लखनऊ में 6.85 करोड़ रुपये की लागत से बना I&C सेंटर बंद है। 1.40 करोड़ रुपये के अपग्रेड बजट का इंतजार जारी है, जबकि निजी ATS की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं।

Update:2026-08-08 20:35 IST

Lucknow Vehicle Fitness Center (Image Credit-Social Media)

लखनऊ। सड़क सुरक्षा मजबूत करने, व्यावसायिक वाहनों की तकनीकी जांच बेहतर बनाने और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए राजधानी के ट्रांसपोर्ट नगर में करोड़ों रुपये खर्च कर बनाया गया इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर (I&C) अब बंद पड़ा है। वर्ष 2019 में करीब 6.85 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस सेंटर को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 1.40 करोड़ रुपये और चाहिए, लेकिन धनराशि उपलब्ध न हो पाने से दस महीने बाद भी इसे दोबारा शुरू नहीं किया जा सका है। इसका नतीजा यह है कि राजधानी के वाहन मालिकों को फिटनेस जांच के लिए बख्शी का तालाब स्थित ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन तक जाना पड़ रहा है।

ट्रांसपोर्ट नगर का यह सेंटर केंद्र सरकार की सड़क सुरक्षा पहल के तहत तैयार किया गया था। आधुनिक उपकरण लगाने के लिए स्पेन की एक कंपनी से तकनीकी करार किया गया और केंद्र व राज्य सरकार ने मिलकर इसके निर्माण तथा मशीनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए। उद्देश्य था कि व्यावसायिक वाहनों की नियमित और वैज्ञानिक जांच हो, तकनीकी रूप से खराब वाहन सड़कों पर न उतरें और हादसों में कमी लाई जा सके। लेकिन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नवंबर 2025 में इस सेंटर का संचालन बंद करा दिया। इसके बाद इसे नए मानकों के अनुरूप अपग्रेड करने का सर्वे भी कराया गया, पर आवश्यक बजट अब तक उपलब्ध नहीं हो पाया है।

दो लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन, लेकिन शहर में फिटनेस सुविधा सीमित

लखनऊ में दो लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन पंजीकृत बताए जाते हैं। बस, ट्रक, टैक्सी, स्कूल वाहन और अन्य कमर्शियल वाहनों को निर्धारित समय पर फिटनेस प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य होता है। ऐसे में ट्रांसपोर्ट नगर का सेंटर बंद होने से बड़ी संख्या में वाहन मालिकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। उन्हें फिटनेस के लिए शहर से दूर बख्शी का तालाब स्थित निजी ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन जाना पड़ रहा है।

केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के संचालन के लिए नियम तय किए थे। इस व्यवस्था के पीछे प्रमुख उद्देश्य था कि वाहनों की जांच मशीनों से हो, मानवीय हस्तक्षेप घटे और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने में भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो। लेकिन लखनऊ में निजी एटीएस की कार्यप्रणाली को लेकर उलटे सवाल उठने लगे हैं।

निजी एटीएस में बिना पूरी जांच फिटनेस देने के आरोप

बख्शी का तालाब स्थित निजी एटीएस को लेकर आरोप हैं कि कुछ मामलों में वाहनों का समुचित भौतिक परीक्षण किए बिना फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे हैं। वाहन मालिकों ने निर्धारित शुल्क से अधिक रकम वसूले जाने की भी शिकायतें की हैं। इन्हीं आरोपों ने व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस तेज कर दी है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और अंतिम पुष्टि आवश्यक है, लेकिन मामला इतना गंभीर हो चुका है कि इसकी गूंज विधान परिषद तक पहुंच गई।

विधान परिषद में सदस्यों ने उठाया मामला

मानसून सत्र के दौरान विधान परिषद में वाहनों की फिटनेस व्यवस्था पर कई सदस्यों ने सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी के सदस्य आशुतोष सिन्हा ने स्कूल बसों की फिटनेस की अवधि को लेकर कहा कि चूंकि ये वाहन सामान्य व्यावसायिक वाहनों की तुलना में कम चलते हैं, इसलिए उनकी फिटनेस केवल समय के आधार पर नहीं बल्कि तय किलोमीटर के आधार पर किए जाने पर भी विचार होना चाहिए।

उन्होंने मौजूदा फिटनेस व्यवस्था की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े किए। भाजपा के उमेश द्विवेदी, डॉ. हरि सिंह ढिल्लो और ध्रुव कुमार त्रिपाठी सहित कई सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई।

भाजपा सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने तो निजी क्षेत्र को फिटनेस जांच सौंपे जाने के बाद कथित वसूली का मुद्दा उठाते हुए पुरानी व्यवस्था को बेहतर बताया। विभिन्न दलों के सदस्यों का एक ही व्यवस्था पर सवाल उठाना इस बात का संकेत है कि वाहन फिटनेस व्यवस्था में सुधार की जरूरत को लेकर व्यापक चिंता है।

परिवहन विभाग के पास फिलहाल स्पष्ट जवाब नहीं

परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन के अनुसार ट्रांसपोर्ट नगर स्थित I&C सेंटर को दोबारा संचालित करने को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। यही अनिश्चितता वाहन मालिकों की परेशानी बढ़ा रही है। जिस सेंटर पर करोड़ों रुपये पहले ही खर्च किए जा चुके हैं, उसके बंद रहने और मामूली अनुपात में अतिरिक्त धनराशि के अभाव में उपयोग न हो पाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

I&C और ATS में क्या है अंतर?

इंस्पेक्शन एंड सर्टिफिकेशन सेंटर (I&C) मूल रूप से वाहनों की विस्तृत फिटनेस जांच के लिए विकसित सरकारी ढांचा है। इसमें मशीनों के साथ प्रशिक्षित निरीक्षकों की भूमिका भी रहती है और वाहन के विभिन्न तकनीकी पहलुओं का निरीक्षण किया जाता है। पुराने मॉडल के कई सेंटरों में मानवीय निर्णय की भूमिका अपेक्षाकृत अधिक होती है।

इसके विपरीत ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) में ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, हेडलाइट, उत्सर्जन और अन्य तकनीकी मानकों की जांच स्वचालित मशीनों तथा सेंसर से की जाती है। इसका उद्देश्य मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम करना है। जांच के नतीजे सॉफ्टवेयर से तैयार होते हैं और कई प्रक्रियाओं का डिजिटल रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखा जाता है।

सैद्धांतिक रूप से ATS व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और वैज्ञानिक मानी जाती है, लेकिन इसका लाभ तभी संभव है जब मशीन-आधारित परीक्षण वास्तव में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो और किसी भी स्तर पर सिस्टम को दरकिनार न किया जाए।

सड़क सुरक्षा से सीधा जुड़ा है सवाल

वाहन फिटनेस केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं है। खराब ब्रेक, घिसे टायर, कमजोर स्टीयरिंग, खराब सस्पेंशन या अन्य यांत्रिक खामियां सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन सकती हैं। यही वजह है कि फिटनेस जांच की विश्वसनीयता सीधे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है।

ट्रांसपोर्ट नगर में सरकारी सेंटर का बंद रहना और दूसरी तरफ निजी एटीएस व्यवस्था पर लगातार सवाल उठना एक बड़ी नीतिगत चुनौती की ओर इशारा करता है। अब सवाल यह है कि करोड़ों रुपये से बनी सरकारी सुविधा कब दोबारा शुरू होगी और निजी फिटनेस केंद्रों में पारदर्शिता तथा निगरानी सुनिश्चित करने के लिए परिवहन विभाग क्या कदम उठाएगा।

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