Lucknow News: गन्ने की फसल पर चूसक कीटों का बढ़ता खतरा, विभाग ने जारी किया अलर्ट और बचाव के उपाय

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में गन्ने की फसल पर चूसक कीटों का खतरा बढ़ा। जानिए काला चिकटा, थ्रिप्स और सैनिक कीट से बचाव के प्रभावी उपाय।

Update:2026-05-05 12:35 IST

Lucknow News(Photo-Social Media)

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गन्ना किसानों की बेहतरी के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने फसल को कीटों से बचाने के लिए अलर्ट जारी किया है। अपर गन्ना आयुक्त वी.के. शुक्ला के अनुसार, इस समय चूसक कीटों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इस संबंध में गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर ने किसानों के लिए जरूरी सुझाव जारी किए हैं।

वर्तमान में बढ़ते तापमान और शुष्क मौसम के कारण उत्तर प्रदेश में गन्ने की पौध और पेड़ी फसल में चूसक कीटों का प्रकोप देखा जा रहा है। इससे फसल की वृद्धि और उत्पादकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर ने इन कीटों की पहचान, लक्षण और प्रभावी नियंत्रण के उपायों की विस्तृत जानकारी किसानों के साथ साझा की है।

कीटों की पहचान और नुकसान

काला चिकटा (ब्लैक बग):

यह चूसक कीट काले रंग का होता है। इसका प्रकोप अधिक तापमान और शुष्क मौसम में, विशेषकर अप्रैल से जून के बीच, पेड़ी फसल में अधिक और बावक फसल में कम देखा जाता है। प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली हो जाती हैं और उन पर कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। इसके शिशु पत्रकंचुक और गन्ने के गोंफ के बीच पाए जाते हैं। प्रौढ़ और शिशु दोनों ही पत्तियों का रस चूसते हैं, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है।

थ्रिप्स कीट:

ये कीट बहुत छोटे, लगभग 2–3 मिमी आकार के होते हैं। मादा गहरे भूरे रंग की और नर हल्के रंग के होते हैं। इनका प्रकोप अधिक तापमान और शुष्क मौसम में तेजी से बढ़ता है। थ्रिप्स पत्तियों की ऊपरी सतह के अंदर अंडे देते हैं और निकलने वाले निम्फ पत्तियों का रस चूसते हैं। इससे पत्तियों का अग्रभाग मुड़कर नुकीला हो जाता है और पत्तियां ऊपर से नीचे की ओर सफेद या पीली हो जाती हैं। बारिश शुरू होते ही इनकी संख्या में कमी आने लगती है।

सैनिक कीट (पत्ती खाने वाला कीट):

इस कीट की सूंडी अवस्था गन्ने की पत्तियों को कुतरकर खाती है। मादा कीट पत्तियों में समूह में अंडे देती है। इसका प्रकोप विशेष रूप से पेड़ी फसल में अधिक होता है।

नियंत्रण के उपाय

शोध वैज्ञानिकों के अनुसार इन कीटों के नियंत्रण के लिए निम्न उपाय अपनाने चाहिए:

खेत की नियमित अंतराल पर सिंचाई करें।

खेत को खरपतवार और गन्ने की सूखी पत्तियों से मुक्त रखें।

संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करें।

सुबह या शाम के समय कीटनाशक का छिड़काव करें।

रासायनिक नियंत्रण के लिए:

प्रोफेनोफॉस 40% + साइपरमेथ्रिन 4% ई.सी. (संयुक्त उत्पाद) 750 मिली प्रति हेक्टेयर

या

इमिडाक्लोप्रिड 17.8% एस.एल. 200 मिली प्रति हेक्टेयर

इन दवाओं को 625 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

इन उपायों को अपनाकर किसान अपनी गन्ने की फसल को चूसक कीटों से बचाकर उत्पादन में होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं।

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