Mainpuri News: मैनपुरी में जमीन पैमाइश विवाद: लेखपालों पर पक्षपात के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
Mainpuri News: मैनपुरी के तहसील सदर क्षेत्र के ग्राम छतरी में जमीन की पैमाइश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने लेखपालों पर पक्षपात और गलत पैमाइश का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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Mainpuri News: मैनपुरी तहसील सदर क्षेत्र के ग्राम छतरी में जमीन की पैमाइश को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। गांव निवासी स्वर्गीय जमुना प्रसाद के पुत्रों ने राजस्व विभाग के लेखपालों पर गलत पैमाइश करने तथा विपक्षी पक्ष को लाभ पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र के साथ शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ताओं राजेंद्र, शिवेंद्र और सत्येंद्र का कहना है कि गाटा संख्या 353 उनकी पैतृक भूमि है, जिस पर उनका वर्षों से कब्जा है। परिवार के सदस्यों ने इसी भूमि पर अपने मकान बनाए हुए हैं तथा ट्रैक्टर और पशुओं के आवागमन के लिए कुछ हिस्सा रास्ते के रूप में छोड़ा गया था।परिवार का आरोप है कि गांव के ही मुनेन्द्र यादव उर्फ मोनू और रामअवतार यादव ने गाटा संख्या 352 का बैनामा कराया है, लेकिन उसका दाखिल-खारिज अभी तक राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं हुआ है। इसके बावजूद लेखपाल प्रज्ञा दीप शाक्य द्वारा विपक्षी पक्ष से मिलकर गलत पैमाइश किए जाने का आरोप लगाया गया है।
पीड़ित पक्ष के अनुसार कथित गलत पैमाइश के आधार पर रास्ते के रूप में छोड़ी गई भूमि पर दीवार खड़ी कर गेट लगा दिया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। परिवार का कहना है कि उन्होंने पुलिस और संबंधित चौकी में भी शिकायत की, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।इसके बाद मामला तहसील सदर पहुंचा, जहां शिकायत के आधार पर एसडीएम सदर ने दोबारा पैमाइश कराने के लिए टीम गठित की। इस टीम में लेखपाल विमल कुमार और प्रज्ञा दीप शाक्य को मौके पर भेजा गया। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पैमाइश से पहले विपक्षी पक्ष के लोग दोनों लेखपालों को अपने साथ गांव लेकर पहुंचे और काफी देर तक बातचीत की।
परिवार का कहना है कि दूसरी पैमाइश में भी निष्पक्षता नहीं बरती गई और वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज करते हुए विपक्षी पक्ष को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। राजेंद्र, शिवेंद्र और सत्येंद्र ने जिलाधिकारी से मांग की है कि तहसीलदार, कानूनगो और अन्य वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों की निगरानी में पुनः पैमाइश कराई जाए तथा पूरे मामले का निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।