Meerut News: मेरठ से दौड़ी रफ्तार की नई पहचान: नमो भारत ने 3 करोड़ यात्राओं का आंकड़ा पार किया
Meerut News: दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर ने 3 करोड़ यात्राओं का आंकड़ा पार कर लिया है, जिससे मेरठ से दिल्ली की यात्रा अब सिर्फ एक घंटे में पूरी हो रही है।
Meerut News
Meerut News: दिल्ली-गाज़ियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर ने क्षेत्रीय परिवहन की तस्वीर बदलते हुए 3 करोड़ कम्यूटर ट्रिप्स का आंकड़ा पार कर लिया है। खास बात यह है कि मेरठ से जुड़े इस कॉरिडोर ने महज कुछ महीनों में ही यात्रियों का भरोसा इस कदर जीता है कि अब यह रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।22 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री द्वारा मेरठ मेट्रो के साथ पूरे कॉरिडोर के लोकार्पण के बाद से यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। वर्तमान में सामान्य दिनों में 90 हजार से 1.14 लाख तक यात्री नमो भारत से सफर कर रहे हैं, जबकि रविवार को भी यह संख्या करीब 85 हजार बनी रहती है।
मेरठ के यात्रियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव यात्रा समय में आया है। जहां पहले दिल्ली पहुंचने में सड़क मार्ग से करीब तीन घंटे लगते थे, वहीं अब नमो भारत से यह दूरी महज एक घंटे में पूरी हो रही है। इससे नौकरीपेशा, छात्र और व्यापारियों के लिए रोजाना आवागमन आसान और समयबद्ध हो गया है।नमो भारत सेवा की शुरुआत अक्टूबर 2023 में साहिबाबाद से दुहाई डिपो के बीच हुई थी। इसके बाद चरणबद्ध विस्तार के साथ मेरठ साउथ तक सेवा पहुंची और अब पूरा कॉरिडोर चालू हो चुका है। फरवरी 2026 में शेष खंड शुरू होने के बाद राइडरशिप में जबरदस्त उछाल आया और मार्च 2026 में मासिक यात्रियों की संख्या करीब 27 लाख तक पहुंच गई।
डिजिटल टिकटिंग, रीयल-टाइम ट्रेन ट्रैकिंग और दिल्ली मेट्रो के साथ बेहतर कनेक्टिविटी ने इसे और सुविधाजनक बना दिया है। साथ ही, 10 मिनट के अंतराल पर ट्रेन सेवा और जरूरत पड़ने पर इसे 3 मिनट तक करने की क्षमता यात्रियों के भरोसे को और मजबूत करती है।सुरक्षा के लिहाज से भी नमो भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है। सीसीटीवी निगरानी, महिलाओं के लिए आरक्षित कोच और बेहतर स्टेशन सुविधाओं ने खासकर महिला यात्रियों के लिए सफर को सुरक्षित बनाया है।लगातार बढ़ती राइडरशिप इस बात का संकेत है कि मेरठ समेत एनसीआर में अब लोग निजी वाहनों से हटकर आधुनिक और तेज सार्वजनिक परिवहन की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। नमो भारत अब सिर्फ एक ट्रेन सेवा नहीं, बल्कि बदलती शहरी जीवनशैली का प्रतीक बन चुकी है।