श्रवण बाधित बच्चों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट सुविधा विस्तार व बेरा जांच क्षमता बढ़ाने के निर्देश
Prayagraj News: श्रवण बाधित बच्चों के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट सुविधाओं के विस्तार और बेरा जांच क्षमता बढ़ाने को लेकर मंडलायुक्त ने समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
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Prayagraj News: भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों में जन्मजात विकारों, बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों तथा विकासात्मक दिव्यांगताओं की समयबद्ध पहचान एवं उपचार सुनिश्चित किया जाता है। इसी क्रम में श्रवण बाधिता से प्रभावित बच्चों के चिन्हांकन, उनकी बेरा (BERA) जांच तथा पात्र बच्चों को कॉक्लियर इम्प्लांट की सुविधा उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की समीक्षा हेतु मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कार्यालय स्थित त्रिवेणी सभागार में सभी संबंधित अधिकारियों की उपस्थिति में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अब तक चिन्हित श्रवण बाधित बच्चों को योजना का अधिकतम लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रतिदिन औसतन दो से चार बच्चों की बेरा (BERA) जांच सुनिश्चित करने तथा आगामी दो माह के भीतर 65 से अधिक बच्चों की बेरा (BERA) जांच संपन्न कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। साथ ही जांच के उपरांत पात्र पाए जाने वाले बच्चों की कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी शीघ्र कराए जाने के निर्देश दिए गए। इसके लिए टीबी सप्रू चिकित्सालय एवं कोल्विन चिकित्सालय में बेरा (BERA) जांच की समुचित व्यवस्था विकसित करने, साउंड-प्रूफ कक्ष स्थापित करने, आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने तथा दोनों चिकित्सालयों की क्षमता वृद्धि (कैपेसिटी बिल्डिंग) सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए।
वर्तमान में प्रयागराज में मेडिकल कॉलेज के माध्यम से प्रति सप्ताह लगभग छह बच्चों की ही बेरा जांच हो पा रही है। बेरा जांच एक जटिल प्रक्रिया है, जिसके दौरान अनेक व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बच्चों के कानों में वैक्स की उपस्थिति, सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) जैसी चिकित्सकीय स्थितियों अथवा जांच के दौरान उनके जाग जाने के कारण जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है। बेरा जांच के माध्यम से बच्चों में श्रवण बाधिता की पुष्टि की जाती है, जिसके उपरांत उन्हें दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाता है तथा उसी के आधार पर कॉक्लियर इम्प्लांट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
मंडलायुक्त ने कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हेतु कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक प्रयास किए जाने के निर्देश उपनिदेशक, दिव्यांगजन सशक्तीकरण को दिए। उन्हें निजी कंपनियों से समन्वय स्थापित कर CSR फंडिंग सुनिश्चित करने को कहा गया। इसके अतिरिक्त स्थानीय स्तर पर कॉक्लियर इम्प्लांट सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विशेषज्ञ चिकित्सकों के सहयोग से डॉक्टरों के प्रशिक्षण तथा आवश्यक तकनीकी क्षमता विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही मंडल के सभी जिलाधिकारियों को पत्र प्रेषित कर अपने-अपने जनपदों के मेडिकल कॉलेजों एवं चिकित्सालयों में कॉक्लियर इम्प्लांट संबंधी आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा बेरा जांच क्षमता में वृद्धि सुनिश्चित करने को कहा गया।
मंडलायुक्त ने कहा कि कॉक्लियर इम्प्लांट आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की एक प्रभावी तकनीक है, जिसके माध्यम से श्रवण बाधित बच्चों में सुनने एवं बोलने की क्षमता विकसित की जा सकती है। इससे उनके शैक्षिक, सामाजिक एवं मानसिक विकास को नई दिशा मिलती है। उन्होंने निर्देश दिए कि पात्र बच्चों को योजना का लाभ दिलाने हेतु सभी संबंधित विभाग समन्वित एवं प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करें।बैठक में स्क्विंट (भेंगापन) से प्रभावित बच्चों की सर्जरी की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अवगत कराया गया कि मंडल में ऐसे लगभग 100 बच्चों का चिन्हांकन किया जा चुका है। इस पर मंडलायुक्त ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करते हुए उनकी सर्जरी शीघ्र संपन्न कराने के निर्देश दिए।