कर्बला के शहीदों की याद में गूंजीं मजलिसें, दरियाबाद में फूलों से सजा ज़ुलजनाह निकाला गया
Prayagraj News: प्रयागराज में मोहर्रम की पहली तारीख पर मजलिसों का आयोजन, दरियाबाद में फूलों से सजा ज़ुलजनाह निकाला गया।
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Prayagraj News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद में माहे मोहर्रम की पहली तारीख पर कर्बला के शहीदों की याद में शहर भर के इमामबाड़ों और अज़ाखानों में मजलिसों का आयोजन किया गया। दिनभर और देर रात तक चले कार्यक्रमों में हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के अन्य शहीदों की कुर्बानियों का ज़िक्र किया गया। श्रद्धालुओं ने मजलिसों में शामिल होकर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
माहे मोहर्रम के आगाज़ के साथ ही बक्शी बाजार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन में सालाना मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना अमीरुर रिज़वी ने संबोधित करते हुए कर्बला की घटना, हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी और इस्लाम की मूल शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन ने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था।
शहर के विभिन्न इमामबाड़ों और अज़ाखानों में भी मजलिसों का आयोजन किया गया। इनमें हाता खुर्रशैद हुसैन, अली मुख्तार, ताहिरा हाउस सहित अन्य स्थानों पर अलग-अलग ज़ाकिरों ने कर्बला के शहीदों का ज़िक्र किया। जीरो रोड स्थित इमामबाड़ा डिप्टी जाहिद हुसैन में आयोजित दस रोज़ा अशरे की पहली मजलिस को मौलाना जमीर हैदर ने संबोधित किया।
इमामबाड़ा सैयद मियां घंटाघर में आयोजित मजलिस को मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी ने खिताब किया, जबकि रज़ा इस्माइल साफवी ने मर्सिया पढ़कर उपस्थित लोगों को कर्बला की यादों से रूबरू कराया। मजलिसों का सिलसिला बक्शी बाजार, छोटी चक, गुड़ मंडी, मीरगंज, घंटाघर, सब्जी मंडी, पत्थर गली, रानी मंडी, करेली, करेला बाग, शाहगंज, दरियाबाद और रोशन बाग समेत शहर के विभिन्न इलाकों में देर रात तक जारी रहा।
दरियाबाद स्थित अज़ाखाना सैयद फरहत अली में भी पहली मोहर्रम की सालाना मजलिस आयोजित की गई। इस दौरान रियाज मिर्जा और शुजा मिर्जा ने मर्सिया पढ़ा, जबकि मौलाना अशरफ अब्बास ने मजलिस को संबोधित किया। मजलिस के बाद हजरत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े के प्रतीक ज़ुलजनाह को गुलाब और चमेली के फूलों से सजाकर निकाला गया।
ज़ुलजनाह के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। लोगों ने फूल चढ़ाकर दुआएं मांगीं और अपनी मन्नतें पेश कीं। इस दौरान अंजुमन-ए-हाशिमिया के नौहाख्वानों ने नौहे पेश किए, जिससे माहौल गमगीन हो गया और श्रद्धालु भावुक नजर आए।
कार्यक्रम में शहर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। मोहर्रम की पहली तारीख पर आयोजित इन धार्मिक आयोजनों के माध्यम से कर्बला के शहीदों की कुर्बानी, इंसानियत, न्याय और सत्य के संदेश को याद किया गया।