Raebareli News: राणा बेनी माधव और वीरा पासी की प्रतिमा अनावरण, राहुल गांधी ने किया उद्घाटन

Raebareli News: रायबरेली के शंकरपुर में राणा बेनी माधव और वीरा पासी की प्रतिमाओं का अनावरण हुआ। राहुल गांधी ने 1857 के वीरों को श्रद्धांजलि दी।

Update:2026-05-20 14:59 IST

Raebareli News(Photo-Social Media)

Raebareli News: उत्तर प्रदेश के बैसवारा की ऐतिहासिक धरती एक बार फिर 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास की गवाह बनी है। रायबरेली के शंकरपुर में देश के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा महान स्वतंत्रता सेनानी राणा बेनी माधव सिंह और उनके सबसे विश्वस्त सेनापति व महानायक वीरा पासी की प्रतिमाओं के अनावरण के साथ ही इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय जीवंत हो उठा है। बीते 20 फरवरी 2025 को राहुल गांधी ने शंकरपुर में राणा बेनी माधव सिंह की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया था। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए ब्लॉक प्रमुख राही धर्मेन्द्र कुमार यादव के प्रयासों से आज 1857 के एक और महानायक वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण भी उनके कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर ने क्षेत्रीय इतिहास और जनभावनाओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

1857 का स्वतंत्रता संग्राम और राणा बेनी माधव सिंह

राणा बेनी माधव सिंह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अवध क्षेत्र के प्रमुख क्रांतिकारियों में से एक थे। शंकरपुर के शासक रहे राणा बेनी माधव एक कुशल रणनीतिकार और साहसी योद्धा के रूप में जाने जाते थे। अंग्रेजी शासन के खिलाफ उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही और उन्होंने बेगम हजरत महल के साथ मिलकर लखनऊ की घेराबंदी में सक्रिय भागीदारी निभाई। उनकी छापामार युद्ध शैली ने अंग्रेजी सेना को कई बार पीछे हटने पर मजबूर किया। स्थानीय इतिहासकारों के अनुसार, राणा बेनी माधव का साहस इतना प्रभावशाली था कि अंग्रेजी अफसर भी उनकी रणनीति से सतर्क रहते थे। उन्होंने आत्मसमर्पण के कई प्रस्तावों को ठुकरा दिया और अपने देश तथा मातृभूमि के प्रति अडिग निष्ठा दिखाई।

राणा बेनी माधव के विश्वस्त सेनापति थे वीरा पासी

इतिहास के अनुसार वीरा पासी, राणा बेनी माधव सिंह के सबसे विश्वस्त सेनापति और दाहिने हाथ माने जाते थे। दोनों के बीच की साझेदारी केवल सैन्य नहीं, बल्कि गहरे विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित थी। वीरा पासी ने कई अवसरों पर राणा बेनी माधव के साथ मिलकर अंग्रेजी सेना को करारी टक्कर दी। जब शंकरपुर किले पर अंग्रेजों ने हमला कर उसे ध्वस्त कर दिया, तब वीरा पासी ने अपनी सूझबूझ और साहस के बल पर राणा बेनी माधव को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों ने मिलकर लंबे समय तक नेपाल की तराई के जंगलों में संघर्ष जारी रखा और अंतिम समय तक अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ते रहे। नवंबर 1859 में दोनों के वीरगति प्राप्त करने का उल्लेख ऐतिहासिक स्रोतों में मिलता है।

लोकसंस्कृति में अमर हैं दोनों महानायक

राणा बेनी माधव और वीरा पासी की वीरता केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोकगीतों और लोककथाओं में आज भी उनकी बहादुरी की गूंज सुनाई देती है। बैसवारा और अवध क्षेत्र में इन दोनों योद्धाओं को जननायक के रूप में पूजा जाता है। ग्रामीण समाज में यह माना जाता है कि इन दोनों की दोस्ती और संघर्ष ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी थी। उनकी गाथाएं आज भी आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति, साहस और एकता का संदेश देती हैं।

शंकरपुर में प्रतिमा अनावरण से भावनात्मक जुड़ाव

शंकरपुर में दोनों महानायकों की प्रतिमाओं का अनावरण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पुनर्स्मरण का क्षण माना जा रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे न केवल क्षेत्र के इतिहास को नई पहचान मिली है, बल्कि युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने का अवसर भी मिला है। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इसे ऐतिहासिक सम्मान बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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