70 साल पुरानी मस्जिद पर कोर्ट का बड़ा फैसला, 30 दिन में हटाने का आदेश, 6.41 करोड़ का जुर्माना

Saharanpur News: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को अदालत ने सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश दिया। 6.41 करोड़ रुपये जुर्माना और 30 दिन में कब्जा हटाने के निर्देश।

Update:2026-07-16 22:25 IST

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में बनी एक मस्जिद को लेकर नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने सरकारी भूमि पर बने इस निर्माण को अवैध मानते हुए बेदखली के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही संबंधित पक्षों पर 6.41 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत चल रही सुनवाई के बाद आया है।

शिकायत के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई

इस मामले की शुरुआत एक शिकायत के बाद हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद का उपयोग केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। शिकायतकर्ता का कहना था कि परिसर में एक डाकघर भी संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा कुछ कमरों को किराये पर देकर उनसे आय प्राप्त की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और संबंधित दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए गए।

अदालत ने क्या कहा?

नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। अदालत ने उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख और अन्य दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद अपना फैसला सुनाया। आदेश में कहा गया कि कलेक्ट्रेट परिसर की खसरा संख्या-539 सरकारी रिकॉर्ड में कचहरी और कलेक्ट्रेट की भूमि के रूप में दर्ज है। अदालत के अनुसार इसी सरकारी जमीन के करीब 315 वर्ग मीटर हिस्से पर संबंधित निर्माण किया गया था। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इसे सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा माना।

दोनों पक्षों को सुनने के बाद दिया फैसला

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निर्णय लेने से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया। दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया। सुनवाई के दौरान संबंधित पक्ष अपने दावे को अदालत के सामने पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सके। इसी आधार पर अदालत ने बेदखली का आदेश जारी किया।

30 दिन में हटाना होगा कब्जा

अदालत ने संबंधित पक्षों को 30 दिन का समय दिया है। इस अवधि के भीतर उन्हें स्वयं सरकारी भूमि से कब्जा हटाना होगा। यदि तय समय सीमा के भीतर ऐसा नहीं किया जाता, तो प्रशासन कानूनी प्रक्रिया के तहत बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई करेगा। इसके साथ ही अदालत द्वारा लगाए गए 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये के जुर्माने की वसूली भी नियमों के अनुसार की जाएगी।

प्रशासन ने शुरू की आगे की तैयारी

अदालत के फैसले के बाद जिला प्रशासन ने आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि अदालत के आदेश का पूरी तरह पालन कराया जाएगा और सभी कदम कानून के अनुसार उठाए जाएंगे। फिलहाल प्रशासन संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर आगे की प्रक्रिया तय कर रहा है।

फैसले पर टिकी सबकी नजर

कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद यह धार्मिक ढांचा काफी पुराना बताया जाता है। ऐसे में अदालत के इस फैसले के बाद पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है।आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पक्ष अदालत के आदेश का पालन करते हैं या फिर किसी उच्च अदालत का रुख अपनाते हैं। फिलहाल प्रशासन अदालत के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा हुआ है।

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