Sonbhadra News: बिजली व्यवस्था पर संकट: उपभोक्ता परेशान, कर्मचारी बेहाल संघर्ष समिति ने उठाए सवाल

Sonbhadra News: भीषण गर्मी में बढ़ी बिजली मांग के बीच संघर्ष समिति ने वर्टिकल व्यवस्था, संविदाकर्मियों की छंटनी और प्रबंधन के फैसलों को संकट की बड़ी वजह बताया।

Update:2026-05-30 18:33 IST

बिजली व्यवस्था पर संकट: उपभोक्ता परेशान, कर्मचारी बेहाल संघर्ष समिति ने उठाए सवाल (Photo- Newstrack)

Sonbhadra News: सोनभद्र। उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था इस समय दोहरे संकट से गुजर रही है। एक ओर भीषण गर्मी में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली की मांग बढ़ रही है, दूसरी ओर विद्युत विभाग का शीर्ष प्रबंधन ऐसे निर्णय लेने में जुटा है जिनसे व्यवस्था की जड़ें कमजोर होती जा रही हैं। यह आरोप विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने लगाया है। समिति का कहना है कि बिजली कर्मी दिन-रात मेहनत कर उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति देने में लगे हैं, लेकिन प्रबंधन संवाद और समाधान के बजाय उत्पीड़न का रास्ता अपना रहा है।

समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से चली आ रही जवाबदेह व्यवस्था को खत्म कर लागू की गई वर्टिकल प्रणाली ने बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहले किसी क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति, शिकायतों और तकनीकी समस्याओं के लिए संबंधित जेई या एसडीओ सीधे जिम्मेदार होते थे, जिससे उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिल जाती थी। लेकिन नई व्यवस्था में जिम्मेदारियां कई विंगों में बांट दी गई हैं, जिसके कारण जवाबदेही लगभग समाप्त हो गई है।

शिकायतें दर्ज हो रहीं, समाधान गायब

संघर्ष समिति का कहना है कि अब उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए केवल 1912 हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टलों का सहारा लेना पड़ रहा है। शिकायतें तो दर्ज हो रही हैं, लेकिन उनका समयबद्ध निस्तारण नहीं हो पा रहा। गलत बिजली बिल, मीटर संबंधी गड़बड़ियां, लंबे समय तक बिजली कटौती और तकनीकी खामियों से आम जनता परेशान है।

स्थिति यह है कि उपभोक्ता यह तक नहीं समझ पा रहा कि उसकी समस्या का समाधान कराने वाला वास्तविक अधिकारी कौन है। अलग-अलग विभागों में बंटी जिम्मेदारियों ने व्यवस्था को और जटिल बना दिया है।

समन्वय खत्म, उपभोक्ता हो रहे परेशान

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि बिलिंग, मीटरिंग और लाइन संचालन जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं को अलग-अलग इकाइयों में बांट दिए जाने से जमीनी स्तर का समन्वय पूरी तरह समाप्त हो गया है। पहले जो कार्य एक ही कार्यालय से आसानी से हो जाते थे, अब उनके लिए उपभोक्ताओं को कई स्तरों पर भटकना पड़ रहा है।

समिति का कहना है कि इस अव्यवस्था का खामियाजा केवल कर्मचारी ही नहीं बल्कि लाखों उपभोक्ता भी भुगत रहे हैं।

अनुभवी संविदाकर्मियों को हटाने का असर अब दिख रहा

संघर्ष समिति ने कहा कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू करने के साथ ही 20 से 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले हजारों संविदा कर्मियों को कार्य से बाहर कर दिया गया। उस समय कर्मचारियों और अभियंताओं ने इसके दुष्परिणामों को लेकर आगाह किया था, लेकिन उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया।

अब जब बिजली व्यवस्था में कठिनाइयां बढ़ रही हैं, तब अनुभवी मानव संसाधन की कमी साफ दिखाई दे रही है। समिति का दावा है कि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ रहा है।

रिकॉर्ड मांग के बीच बिजली कर्मियों पर बढ़ा दबाव

संघर्ष समिति ने कहा कि भीषण गर्मी के चलते प्रदेश में बिजली की मांग देश में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में बिजली कर्मचारी और अभियंता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप प्रदेशवासियों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए चौबीसों घंटे कार्य कर रहे हैं।

इसके बावजूद प्रबंधन कर्मचारियों और अभियंताओं की समस्याएं सुनने या उनसे संवाद स्थापित करने को तैयार नहीं है। इससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है और उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।

सुझावों की अनदेखी, उत्पीड़न की कार्रवाई जारी

संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए कर्मचारियों और अभियंताओं द्वारा लगातार व्यावहारिक सुझाव दिए गए, लेकिन उन पर विचार करने के बजाय प्रबंधन उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों में लगा हुआ है।

समिति का कहना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों की राय को दरकिनार कर लिए जा रहे फैसले न केवल कर्मचारियों को हतोत्साहित कर रहे हैं बल्कि पूरी बिजली व्यवस्था को कमजोर बना रहे हैं।

सरकार से हस्तक्षेप की मांग

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कराई जाए और यदि यह जनहित व विभागीय हित में कारगर नहीं है तो इसे वापस लिया जाए। साथ ही लंबे अनुभव वाले संविदा कर्मियों की सेवाएं बहाल की जाएं, कर्मचारियों के खिलाफ चल रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां रोकी जाएं तथा अभियंताओं और कर्मचारियों को विश्वास में लेकर जवाबदेह एवं व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जाए।

समिति का कहना है कि यदि समय रहते हालात नहीं सुधारे गए तो इसका सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश की बिजली व्यवस्था और आम उपभोक्ताओं को उठाना पड़ सकता है।

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