Sonbhadra News: डाला गोलीकांड की बरसी पर भव्य काव्य संध्या, शहीदों को कवियों ने दी श्रद्धांजलि

Sonbhadra News: सोनभद्र में डाला गोलीकांड की बरसी और शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट की वर्षगांठ पर कचहरी बार एसोसिएशन सभागार में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया।

Update:2026-06-02 18:09 IST

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Sonbhadra News: डाला गोलीकांड के अमर शहीदों की स्मृति और शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट करारी की 16वीं स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर मंगलवार को बार एसोसिएशन सभागार, कचहरी में शहीदों को समर्पित भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस आयोजन में देशभक्ति, ओज, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र ने की। अतिथि के रूप में ओमप्रकाश त्रिपाठी, डॉ. धर्मवीर तिवारी, कमलेश सिंह खांबे और अशोक कुमार श्रीवास्तव उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।गीतकार ईश्वर विरागी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत करते हुए “काट कपट कलिकाल कलुषता, निर्मल मन निर्झर सा कर दे” सुनाकर कार्यक्रम को भावपूर्ण शुरुआत दी। संचालन कर रहे नवगीतकार दिलीप सिंह दीपक ने “बुजुर्गों ने लहू देकर रखी है आबरू इसकी, तुम सब कुछ बेच दो लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो” सुनाकर देशभक्ति का माहौल बना दिया।

कौशल्या कुमारी चौहान ने “होने न दूंगी अपने भारत का अपमान” तथा श्रृंगार रस की रचनाएं सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। दिव्या राय ने नारी सशक्तिकरण पर आधारित अपनी प्रभावशाली रचना “मत रोक संवरिया घूंघट में मुझे, नील गगन तक जाने दे” प्रस्तुत कर श्रोताओं को नई सोच का संदेश दिया।आयोजक प्रद्युम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने भोजपुरी में “लहरत रहै तिरंगा नभ में, सबकर ई अरमान बा, वंदेमातरम जैहिंद बानी, पावन हिंदुस्तान बा” सुनाकर राष्ट्रप्रेम का संचार किया। अजय चतुर्वेदी ‘कक्का’ ने हास्य-व्यंग्य की रचनाओं से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। प्रयागराज से आए शारिक मखदूम फूलपुरी ने “कब तलक शिकवा करोगे तुम यहां तकदीर का, हौसले से अब पकड़ लो रास्ता तदबीर का” सुनाकर जीवन में संघर्ष और आत्मविश्वास का संदेश दिया।

शिवदास, धर्मेश चौहान एडवोकेट, अशोक तिवारी, दयानंद दयालु, मदन चौबे, सुधाकर पांडेय, स्वदेश प्रेम, दिवाकर द्विवेदी ‘मेघ’, विवेक चतुर्वेदी और विशेष अस्थाना ने भी अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की। गोपाल कुशवाहा और राधेश्याम पाल ने गजलों के माध्यम से आमजन की पीड़ा और सामाजिक विसंगतियों को स्वर दिया। वरिष्ठ कवि अमरनाथ अजेय की प्रस्तुति को भी खूब सराहना मिली।

ओमप्रकाश त्रिपाठी, कमलेश सिंह खांबे, डॉ. धर्मवीर तिवारी और अशोक कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में डाला गोलीकांड के शहीद श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहीद स्थल करारी द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। प्रकाश चंद्र गिरि ने ऐसे साहित्यिक एवं सामाजिक आयोजनों को निरंतर जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया।कार्यक्रम में सभी अतिथियों एवं कवियों का सारस्वत सम्मान किया गया। सुशील मिश्रा ने अपनी सुमधुर संगीत प्रस्तुति से आयोजन को यादगार बना दिया। उनकी प्रस्तुति “धरती आजाद तिलक बलिदानी, बोस भगत अशफाक सरेखैं...” ने श्रोताओं को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया।

अध्यक्षीय संबोधन में रामनाथ शिवेन्द्र ने शहीद स्थल करारी की स्थापना से जुड़े संघर्षों, शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के असहयोग के बावजूद साहित्यकारों एवं समाज के सहयोग से चल रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने डाला गोलीकांड के शहीद श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके बलिदान को सदैव स्मरणीय बताया।अंत में प्रद्युम्न त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में देवानंद पांडेय, जयशंकर त्रिपाठी, ऋषभ आत्मप्रकाश त्रिपाठी, त्रिपुरारी मिश्रा, प्रदीप सिंह, गुलाम हुसैन, आद्या, अंशिका, अनीषा चौहान, हर्ष चौहान, लालता प्रसाद मिश्र, गोपाल बंगाली सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे ।

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