Sonbhadra News: इंटर कालेज की प्रबंध कमेटी में फर्जीवाड़ा! अध्यक्ष का प्रबंधक और कार्यवाहक प्रधानाचार्य पर आरोप, FIR दर्ज करने का आदेश
Sonbhadra News: मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आलोक सिंह यादव की अदालत ने प्रथमदृष्ट्या संज्ञेय अपराध पाते हुए, प्रभारी निरीक्षक राबटर्सगंज को मामला दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया गया है।
इंटर कालेज की प्रबंध कमेटी में फर्जीवाड़ा (photo: social media )
Sonbhadra News: यूपी बोर्ड से संबद्ध जिले के प्रतिष्ठित कालेजों में स्थान रखने वाले राबटर्सगंज कोतवाली क्षेत्र के मधुपुर स्थित श्री चंद्रगुप्त मौर्य इंटर कालेज की कमेटी में फर्जीवाड़ा किए जाने का आरोप लगाया गया है। कमेटी के अध्यक्ष ने इसके लिए विद्यालय के प्रबंधक और कार्यवाहक प्रधानाचार्य को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की गुहार लगाई गई। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी आलोक सिंह यादव की अदालत ने प्रथमदृष्ट्या संज्ञेय अपराध पाते हुए, प्रभारी निरीक्षक राबटर्सगंज को मामला दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया गया है।
बताते चलें कि प्रकरण में अतिवक्ता विकास शाक्य के जरिए न्यायालय में धारा-173 (4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल कर हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई थी। आवेदक का कहना था कि वह चन्द्रगुप्त मौर्य इंटरमीडिएट कालेज, मधुपुर, सोनभद्र, की वर्तमान प्रबंध सोसाइटी का अध्यक्ष है और सारनाथ यादव, उप्रबंधक, धर्म कोषाध्यक्ष, श्रीलाल, रामराज सिंह, रामअधार सिंह, भगवान दास, केषनाथ, नन्हकू सिंह और रामप्रसाद सदस्यगण हैं।
नए सदस्य बढ़ाए जाने हेतु न कोई सदस्यता अभियान चलाया गया
प्रबंध समिति 2023-24 का चुनाव सन् 2024 में होने वाला था, लेकिन इस दरम्यान प्रबंध समिति व साधारण सभा में नए सदस्य बढ़ाए जाने हेतु न कोई सदस्यता अभियान चलाया गया और न ही प्रबंध सोसाइटी व प्रबंध समिति की सहमति ली गई, न ही बगैर किसी विधिक प्रक्रिया के बढ़ाए गए सदस्यों का कार्यकारिणी व साधारण सभा द्वारा अनुमोदन किया गया। आरोप है कि कालेज के प्रबंधक दयाशंकर सिंह और कार्य प्रधानाचार्य दयाशंकर सिंह कुषवाहा ने लालच में पड़कर विद्यालय हड़पने की नियत से कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और फर्जी हस्ताक्षर बनाए। 105 नए सदस्य बढ़ाए जाने की जानकारी पर जानने का प्रयास किया तो धमकी दी जाने लगी।
इस पर न्यायालय ने राबटर्सगंज थाने से आख्या तलब आई। रिपोर्ट आई कि मामले में कोई अभियोग पंजीकृत नहीं है। सुनवाई के दौरान कमेटी की अध्यक्ष की ओर से सहायक निबंधक फर्म सोसाइटी की आख्या न्यायालय के सामने प्रस्तुत की गई जिसके अवलोकन पर न्यायालय के सामने आया कि प्रबंधक दयाशंकर सिंह की तरफ से सहायक निबंधक के यहां सुनवाई के दौरान ऐसा कोई साक्ष्य या अभिलेख प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिससे उनके द्वारा की गई कार्यवाही तथा नए बनाए गए साधारण सभा के सदस्यों की सदस्यता स्पष्ट किया जा सके।
समिति के नए सदस्यों को सदस्यता दी गई
न्यायालय ने माना कि जांच आख्या से प्रथम दृष्टया यह दर्षित होता है कि प्रबंधक दयाषंकर सिंह द्वारा फर्जी हस्ताक्षर करके समिति के नए सदस्यों को सदस्यता दी गई है। मामले में प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का कारित किया जाना दर्शित है। थानाध्यक्ष राबटर्सगंज को आदेशित किया गया है कि वह इस मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करना/ कराना सुनिश्चित करें।