Sonbhadra News: पत्नी की हत्या के दोषी पति को 10 साल की सजा, अदालत ने सुनाया सख्त फैसला

Sonbhadra News: सोनभद्र के दुद्धी क्षेत्र में पत्नी की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पति रामप्यारे को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे घरेलू हिंसा का गंभीर मामला मानते हुए सख्त संदेश दिया है।

Update:2026-05-22 17:57 IST

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Sonbhadra News: घरेलू हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करने वाले चर्चित ललिता हत्याकांड में शुक्रवार को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी पति को कठोर सजा दी। करीब दो वर्ष पुराने इस मामले में सत्र न्यायाधीश राम सुलीन सिंह की अदालत ने पत्नी की हत्या के दोषी रामप्यारे को 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी पर 11 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर उसे तीन माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि सजा में समाहित की जाएगी।इस फैसले के बाद अदालत परिसर में पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का दौर चलता रहा। अभियोजन पक्ष ने इसे घरेलू हिंसा के खिलाफ मजबूत संदेश बताया।

मामले के अनुसार दुद्धी थाना क्षेत्र के कोरची टोला बियादामर निवासी शिवकुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि 1 अप्रैल 2023 की शाम उसका बड़ा भाई रामप्यारे अपनी पत्नी ललिता (45) के साथ अचानक गाली-गलौज करने लगा। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि उसने डंडे से पत्नी पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। सिर पर गंभीर चोट लगने से ललिता लहूलुहान होकर गिर पड़ी।परिजन उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस को पर्याप्त साक्ष्य मिले, जिसके आधार पर आरोपी रामप्यारे के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की गई।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत से आरोपी का यह पहला अपराध बताते हुए नरमी बरतने की मांग की। वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ज्ञानेंद्र शरण रॉय ने इसे बेहद गंभीर अपराध बताते हुए कठोर दंड दिए जाने की जोरदार पैरवी की।अदालत ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों और पत्रावली का गहन अवलोकन करने के बाद माना कि आरोपी ने अपनी पत्नी की निर्मम हत्या की है। इसके बाद न्यायालय ने दोषसिद्ध पाते हुए रामप्यारे को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।इस फैसले को घरेलू हिंसा और पारिवारिक अत्याचार के मामलों में एक अहम संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत के फैसले ने साफ कर दिया कि घर की चारदीवारी के भीतर होने वाले अपराध भी कानून की नजर से बच नहीं सकते।

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