Taj Mahal में छिपा है शिव मंदिर का राज! HC ने केंद्र और ASI से मांगा जवाब, अब उठेगा रहस्य से पर्दा?

Taj Mahal Row: ताजमहल को तेजो महालय और भगवान शिव का प्राचीन मंदिर बताए जाने के दावे से जुड़ी याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई से जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं ने ताजमहल के निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की है।

Update:2026-07-06 20:20 IST

Image Source- Ai

Taj Mahal Row: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में एक याचिका दाखिल कर अंतरराष्ट्रीय धरोहर ताजमहल (Taj Mahal) का निरीक्षण कराने और उसके अंदर की तस्वीरें लेने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर (Advocate Commissioner) नियुक्त करने की मांग की गई है। यह अर्जी एक लंबित दीवानी वाद (Civil Case) के संबंध में दाखिल की गई है, जिसमें दावा किया गया है कि ताजमहल वास्तव में तेजो महालय (Tejo Mahalaya) था, जो भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित एक हिंदू मंदिर था।

केंद्र सरकार और ASI से जवाब तलब

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल (Rohit Ranjan Agarwal) ने सोमवार, 6 जुलाई को केंद्र सरकार (Central Government) और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India-ASI) से जवाब मांगा है। अदालत ने दोनों पक्षों को इस मामले में काउंटर एफिडेविट (Counter Affidavit) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

साथ ही हाईकोर्ट ने इस रिट याचिका (Writ Petition) में चौथे प्रतिवादी पंकज कुमार वर्मा (Pankaj Kumar Verma) को भी नोटिस जारी किया है।

निचली अदालत के आदेश को चुनौती

यह याचिका आगरा (Agra) की जनपद अदालत के उन आदेशों के खिलाफ दाखिल की गई है, जिनमें दीवानी न्यायाधीश वरिष्ठ प्रभाग (Civil Judge Senior Division) और अपर जिला न्यायाधीश (Additional District Judge) ने विवादित परिसर के सर्वेक्षण के लिए अधिवक्ता आयोग गठित करने का आदेश पारित करने से इनकार कर दिया था।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) के माध्यम से पेश हुए अधिवक्ता हरिशंकर जैन (Harishankar Jain) ने अदालत में दलील दी कि अधिवक्ता आयोग गठित करने और विवादित परिसरों की फोटोग्राफी कराने के लिए दिया गया आवेदन गलत तरीके से खारिज किया गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) को भी यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि वह सुनवाई योग्य नहीं है, जबकि विवाद के निस्तारण के लिए यह आवश्यक है।

वर्ष 2015 से लंबित है मामला

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सौम्या श्रीवास्तव (Saumya Srivastava) ने बताया कि वर्ष 2015 में एक घोषणात्मक वाद (Declaratory Suit) दाखिल किया गया था। इसमें अदालत से यह घोषणा करने का अनुरोध किया गया था कि ताजमहल परिसर में भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर (Tejo Mahalaya Temple) स्थित है।

यह मामला वर्तमान में आगरा की दीवानी न्यायाधीश वरिष्ठ प्रभाग की अदालत में लंबित है।

आयोग गठित करने की मांग पर विवाद

वाद के लंबित रहने के दौरान एक अधिवक्ता आयोग (Advocate Commission) गठित करने के लिए आवेदन दिया गया था। हालांकि, जनपद न्यायालय की दोनों अदालतों ने इस पर आदेश पारित करने से इनकार कर दिया। इसी आदेश को वर्तमान याचिका में चुनौती दी गई है।

यह याचिका भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान तेजो महालय मंदिर, हरिशंकर जैन और चार अन्य लोगों की ओर से दाखिल की गई है। इस मामले में केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और दो अन्य पक्षकार प्रतिवादी बनाए गए हैं।

निरीक्षण को बताया गया जरूरी

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ताजमहल की बनावट और संरचना से जुड़ी उन विशेषताओं का दस्तावेजीकरण करना जरूरी है, जो उनके दावे का समर्थन करती हैं। उनका तर्क है कि ऐसे तथ्यों और साक्ष्यों को केवल मौखिक गवाही के जरिए प्रभावी ढंग से साबित नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि ताजमहल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के नियंत्रण में एक संरक्षित स्मारक है, इसलिए वे स्वयं उन हिस्सों तक नहीं पहुंच सकते और न ही उनकी तस्वीरें ले सकते हैं, जिनका उल्लेख वे ट्रायल कोर्ट (Trial Court) में करना चाहते हैं।

इसी वजह से वर्ष 2017 में एक अर्जी दाखिल की गई थी, जिसमें ताजमहल का निरीक्षण कराने, उसकी तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग कराने तथा ट्रायल कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई थी।

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