Unnao News: राम मंदिर आंदोलन से संसद तक, कैसे बने साक्षी महाराज हिंदुत्व की मजबूत आवाज़
Unnao News: राम जन्मभूमि आंदोलन के समर्थन से लेकर लगातार चुनावी सफलताओं तक, जानिए साक्षी महाराज के धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।
राम मंदिर आंदोलन से संसद तक, कैसे बने साक्षी महाराज हिंदुत्व की मजबूत आवाज़ (Photo- Newstrack)
Unnao News: भगवा वस्त्र... माथे पर तिलक... हाथ में माला... और मंच पर ऐसी आवाज़, जो लाखों लोगों तक पहुंचती है। एक ऐसा चेहरा... जो संत भी है, सांसद भी... जो धर्म की बात भी करता है और राजनीति के केंद्र में भी रहता है। राम मंदिर आंदोलन से लेकर संसद के गलियारों तक... बेबाक बयानों से लेकर लगातार चुनावी जीत तक... यह कहानी है भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज की।
आख़िर कौन हैं साक्षी महाराज? कैसे तय हुआ उनका सफर? और क्यों आज भी उनका नाम देश की राजनीति में चर्चा का विषय बना रहता है?
स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज
साक्षी महाराज का पूरा नाम स्वामी सच्चिदानंद हरि साक्षी महाराज है। उनका जन्म 12 जनवरी 1956 को उत्तर प्रदेश के जलीलपुर गांव, कासगंज में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव धर्म और अध्यात्म की ओर था। आगे चलकर उन्होंने संस्कृत और वेदांत की शिक्षा प्राप्त की, संन्यास ग्रहण किया और देशभर में धार्मिक प्रवचन देने लगे। समय के साथ वे संत समाज का एक चर्चित चेहरा बन गए।
धर्म के मंच से राजनीति तक पहुंचा उनका सफर भी काफी दिलचस्प रहा। साल 1991 में उन्होंने पहली बार मथुरा से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में कदम रखा। इसके बाद 1996 और 1998 में फर्रुखाबाद से सांसद बने। बाद में कुछ समय के लिए वे (राज्यसभा) के सदस्य भी रहे। फिर भारतीय जनता पार्टी में वापसी हुई और (2014, 2019 और 2024) में उन्नाव से लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। इस तरह साक्षी महाराज छह बार संसद के सदस्य रह चुके हैं, जिनमें पांच बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा का कार्यकाल शामिल है।
साक्षी महाराज लंबे समय तक (राम जन्मभूमि आंदोलन) के समर्थक रहे। वे सार्वजनिक मंचों से राम मंदिर निर्माण की वकालत करते रहे। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद उन्होंने इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और लंबे संघर्ष की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। धार्मिक मुद्दों पर उनकी स्पष्ट राय ने उन्हें हिंदुत्व की राजनीति का प्रमुख चेहरा भी बनाया।
साक्षी महाराज जितने अपनी राजनीति के लिए जाने जाते हैं, उतने ही अपने बेबाक बयानों के लिए भी चर्चा में रहते हैं। जनसंख्या नियंत्रण, समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण, राष्ट्रवाद और धार्मिक मुद्दों पर उनके कई बयान राष्ट्रीय बहस का विषय बने। समर्थकों ने उनके बयानों को स्पष्टवादिता कहा, जबकि विपक्ष ने कई बार कड़ी आलोचना की। उनके कई बयान दिनों तक मीडिया और राजनीति की सुर्खियां बने रहे।
राजनीति के साथ-साथ साक्षी महाराज धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं। वे शिक्षा, आध्यात्म और सामाजिक सेवा से जुड़े कई कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं। समर्थकों के लिए वे एक संत और जननेता दोनों की छवि रखते हैं, जबकि विरोधियों के लिए वे मुखर और विवादों में रहने वाले नेता हैं। लेकिन यह भी सच है कि दशकों से भारतीय राजनीति में उनकी मौजूदगी लगातार बनी हुई है।
भगवा वस्त्रों से संसद तक... धर्म से लोकतंत्र तक... और प्रवचन से राजनीति तक का यह सफर आज भी जारी है।
संत की पहचान... सांसद का अनुभव... और बेबाक तेवर... शायद यही वजह है कि साक्षी महाराज भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनका नाम आते ही समर्थकों और विरोधियों—दोनों के बीच चर्चा शुरू हो जाती है।