UP Politics: यूपी में मंत्रियों के विभागों पर सस्पेंस गहराया, PWD के लिए अड़े भूपेंद्र-केशव

UP Cabinet News: यूपी कैबिनेट विस्तार के बाद भी मंत्रियों के विभागों के बंटवारे पर सस्पेंस बरकरार है। PWD और ऊर्जा मंत्रालय को लेकर भूपेंद्र चौधरी और केशव प्रसाद मौर्य के बीच खींचतान जारी है, जिस पर अखिलेश यादव ने भी तंज कसा है।

By :  Shivam
Update:2026-05-16 18:20 IST

बीते रविवार को हुए कैबिनेट विस्तार के काफी दिन बीत जाने के बाद भी नए मंत्रियों को विभागों का आवंटन नहीं हो सका है। शपथ लेने वाले छह नए चेहरों और दो प्रमोटेड मंत्रियों के पास फिलहाल कोई काम नहीं है, जिसे लेकर राज्य की सियासत में गरमाहट आ गई है। विपक्ष इस देरी को लेकर लगातार सरकार पर हमलावर है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि मंत्रालयों के बंटवारे में हो रही देरी की असली वजह कमीशन और कमाई का विवाद है, जिसके चलते डबल इंजन आपस में टकरा रहा है।

हालांकि इस पूरी देरी के पीछे सबसे बड़ा कारण कद्दावर नेताओं के बीच बड़े मंत्रालयों को लेकर चल रही दावेदारी है। कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाले भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडेय के समर्थक उनके राजनीतिक कद के अनुसार बड़े विभागों की मांग कर रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों में मुख्यमंत्री सहित पांच ऐसे चेहरे हैं जिनके मंत्रालयों में फेरबदल की संभावना है, लेकिन इनमें से दो मंत्री सहयोगी दलों के हैं जिनके विभागों में बदलाव की उम्मीद बेहद कम है। ऐसे में सारा दारोमदार उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और नगर विकास मंत्री एके शर्मा के विभागों पर आकर टिक गया है, क्योंकि इन्हीं के पास एक से अधिक बड़े विभाग हैं।

पीडब्ल्यूडी और ऊर्जा मंत्रालय को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान इस विवाद के केंद्र में है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दिल्ली आलाकमान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को कोई बड़ा और महत्वपूर्ण विभाग सौंपने के पक्ष में है। केशव प्रसाद मौर्य के समर्थक चाहते हैं कि उन्हें उनका पुराना पीडब्ल्यूडी विभाग वापस मिले, जो उनके पहले कार्यकाल में उन्हीं के पास था। फिलहाल यह विभाग मुख्यमंत्री के पास है। दूसरी तरफ, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के समर्थक भी उनके वरिष्ठ कद को देखते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग पर दावा ठोक रहे हैं। भूपेंद्र चौधरी के पास पहले पंचायती राज विभाग था, जो अब सहयोगी दल के पास जा चुका है, इसलिए उनके लिए एक गरिमापूर्ण मंत्रालय की तलाश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

इसी तरह ऊर्जा विभाग को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वर्तमान में यह मंत्रालय एके शर्मा के पास है, लेकिन पिछले कुछ समय से इस विभाग को लेकर हो रही किरकिरी के बाद मुख्यमंत्री इसे कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय को सौंपना चाहते हैं। हालांकि, इसके लिए एके शर्मा को किसी अन्य वजनदार मंत्रालय में एडजस्ट करना होगा। मनोज पांडेय के लिए दूसरा विकल्प ग्राम्य विकास विभाग भी माना जा रहा है, लेकिन यह तभी संभव है जब केशव प्रसाद मौर्य को पीडब्ल्यूडी विभाग मिल जाए। इसके अलावा प्रमोट होकर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर के लिए भी मंत्रालयों की व्यवस्था करनी है, जिन्हें संभवतः खनन और खाद्य प्रसंस्करण जैसे विभाग सौंपे जा सकते हैं।

इस बीच, विभागों के इस उलझे हुए समीकरण को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली का दौरा भी किया, जहां उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से लंबी चर्चा की। माना जा रहा है कि इस मुलाकात में मंत्रालयों के बंटवारे के अंतिम फार्मूले पर सहमति बन चुकी है। हालांकि, विपक्षी आरोपों और देरी पर सफाई देते हुए भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि कहीं कोई पेंच नहीं फंसा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागों का बंटवारा पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है और मुख्यमंत्री के राजधानी से बाहर होने के कारण इसमें थोड़ा समय लग रहा है।

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