Avimukteshwaranand in Varanasi: 'भगवा-तिलक लगाने वाला हर शख्स हिंदू नहीं...' काशी में अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान

Avimukteshwaranand in Varanasi: काशी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान! बोले— सिर्फ भगवा पहनने या तिलक लगाने से कोई हिंदू नहीं हो जाता। गोरक्षा, बीफ निर्यात और सरकारों की नीति पर उठाए तीखे सवालों से मचा सियासी और धार्मिक हलचल।

Update:2026-05-14 13:10 IST

Avimukteshwaranand in Varanasi: धर्म की नगरी काशी बुधवार को एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी, जब गोरक्षा के संकल्प के साथ निकली '81 दिवसीय गविष्ठी गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा' लेकर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वाराणसी पहुंचे। शिव की नगरी में कदम रखते ही पूरा शहर 'जय गोमाता' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। ढोल-नगाड़ों की थाप, पुष्पवर्षा और भव्य कलश यात्रा के बीच श्रद्धालुओं का सैलाब शंकराचार्य के स्वागत में उमड़ पड़ा। रोहनिया से लेकर लंका और सिगरा तक, काशी की सड़कों पर आस्था का ऐसा ज्वार दिखा जैसे साक्षात धर्म ने गोवंश की रक्षा के लिए कमर कस ली हो।

धर्म के नाम पर भ्रम फैलाने वाले 'कालनेमियों' से सावधान

शंकराचार्य ने अपने संबोधन में 'कालनेमियों को पहचानो' विषय पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती उन छद्म धर्मावलंबियों को पहचानना है, जो धार्मिक वेशभूषा धारण कर और नारों का सहारा लेकर समाज को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सिर्फ माथे पर तिलक लगाने या भगवा कपड़े पहन लेने से कोई धार्मिक नहीं हो जाता। सच्चा धार्मिक वही है, जिसके भीतर गोवंश के प्रति संवेदना और सनातन धर्म के सिद्धांतों के प्रति अडिग निष्ठा हो। उन्होंने चेतावनी दी कि रामायण काल के कालनेमि की तरह आज भी कई लोग धर्म का चोला पहनकर गोवंश के विनाश में परोक्ष रूप से सहयोग कर रहे हैं।

बीफ निर्यात और सरकारों की दोहरी नीति पर घेरा

गो-हत्या और मांस निर्यात के मुद्दे पर शंकराचार्य ने सरकारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि गोरक्षा के नाम पर केवल राजनीति हो रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। बीफ निर्यात पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि गाय और भैंस के मांस को एक ही श्रेणी में रखकर जनता के बीच भ्रम फैलाया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कई बार जांच में गोमांस की पुष्टि हुई है, जो पूरे देश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने गो-हत्या को महापाप बताते हुए कहा कि जो लोग मांस के व्यापार से लाभ कमा रहे हैं या इसकी अनुमति दे रहे हैं, वे भी हत्यारे के समान ही पाप के भागीदार हैं।

भदोही की ओर कूच करेगा गोरक्षार्थ धर्मयुद्ध

वाराणसी के विभिन्न इलाकों जैसे कचहरी और जाल्हूपुर में सभाएं करने के बाद, यह यात्रा अब अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ने को तैयार है। मीडिया प्रभारी संजय पांडेय के अनुसार, बृहस्पतिवार को शंकराचार्य अजगरा, पिंडरा और सेवापुरी में भक्तों को संबोधित करेंगे, जिसके बाद यह धर्मयुद्ध यात्रा भदोही जिले में प्रवेश करेगी। इस यात्रा का उद्देश्य देशभर में गो-हत्या के खिलाफ जनचेतना जगाना और गोवंश को 'राष्ट्रमाता' का सम्मान दिलाना है। काशी से उठी यह आवाज अब पूरे उत्तर भारत में गूंजने के लिए तैयार है।

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