Uttarakhand News: देहरादून में ‘एकात्म यात्रा’ का लोकार्पण, अमेजन प्री-बुकिंग में बनी बेस्टसेलर

Uttarakhand News: देहरादून में आयोजित 15वें नेशनल यंग थिंकर्स मीट-2026 में सत्येंद्र त्रिपाठी की पुस्तक ‘एकात्म यात्रा’ का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राम माधव और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने किया।

Update:2026-07-18 20:08 IST

Uttarakhand News (Image Credit-Newstrack)

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित 15वें नेशनल यंग थिंकर्स मीट-2026 के उद्घाटन सत्र में जनसंवाद के संयोजक एवं लोकनीति इंडिया के अध्यक्ष सत्येंद्र त्रिपाठी की नई पुस्तक ‘एकात्म यात्रा’ का लोकार्पण किया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. राम माधव और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने संयुक्त रूप से पुस्तक का विमोचन किया।

सर्व भाषा ट्रस्ट, दिल्ली द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक औपचारिक प्रकाशन से पहले ही पाठकों और बौद्धिक जगत में चर्चा का विषय बन गई थी। अमेजन पर प्री-बुकिंग के दौरान पुस्तक ने बेस्टसेलर सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया, जिससे इसे व्यापक पाठकीय रुचि मिलने का संकेत मिला।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने ‘एकात्म यात्रा’ को समकालीन सामाजिक और वैचारिक विमर्श में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली कृति बताया। उनके अनुसार यह पुस्तक जनसंवाद, लोकनीति और भारतीय सांस्कृतिक दृष्टि को नए परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करती है तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद को मजबूत करने का प्रयास करती है।

पुस्तक में भारत की सांस्कृतिक विविधता को विभाजन का नहीं, बल्कि गहरी एकात्मता का प्रतीक बताया गया है। लेखक का मत है कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों, भाषाओं, लोक परंपराओं और सामाजिक पृष्ठभूमियों के बावजूद एक साझा सांस्कृतिक धारा पूरे भारत को जोड़ती है। यही अदृश्य सांस्कृतिक सूत्र भारत की पहचान और उसकी शक्ति का आधार है।

पुस्तक के एक अंश में कहा गया है कि भारत एक ऐसी माला की तरह है, जिसमें फूलों के रंग, स्वरूप और सुगंध भले अलग-अलग हों, लेकिन उन्हें जोड़ने वाला सूत्र एक ही है। लेखक के अनुसार यही सांस्कृतिक एकात्म भारत की सबसे बड़ी विशेषता है, जो धर्म, स्मृति, परिवार, लोकमर्यादा और साझा सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से पीढ़ियों से समाज को एकजुट रखे हुए है।

‘एकात्म यात्रा’ के विमोचन के साथ ही यह पुस्तक वैचारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विमर्श में नई चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय संस्कृति, समाज और राष्ट्रीय एकात्मता को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण संदर्भ साबित हो सकती है।

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