बाप रे बाप! इस बिमारी से 2030 तक 9 लाख से अधिक मौतें! विशेषज्ञों की चेतावनी, 7 लाख बच्चों पर 'खतरा'
World Largest Malaria Funding Agency Warns: विश्व के सबसे बड़े मलेरिया फंडिंग एजेंसी ने अलर्ट जारी किया है। यदि अब मलेरिया पर इन्वेस्ट नहीं किया गया, तो साल 2030 तक तकरीबन 9,90,000 लोगों की मौत हो सकती है, जिनमें से लगभग 7,50,000 बच्चे भी शामिल हैं। जानें आखिर क्या है मलेरिया के खतरे, मौतों का आंकड़ा और फाइनेंशियल चुनौती।
World Largest Malaria Funding Agency Warns (photo: AI generated)
World Largest Malaria Funding Agency Warns: क्या कभी आपने सोचा है... एक खतरनाक बीमारी है जो मच्छर के काटने से फैलती है, वह जानलेवा है, जिससे सबसे अधिक मौतें बच्चों की होती हैं। विश्व का सबसे बड़ा मलेरिया फंडिंग एजेंसी इस बार की चेतावनी दे रहा है कि यदि इस बीमारी के खिलाफ अब भी पैसा नहीं लगाया गया, तो आगामी साल 2030 तक तकरीबन 9,90,000 और लोगों की मौत हो सकती है, जिनमें से लगभग 7,50,000 बच्चे 5 साल से कम उम्र के हैं।
आपको बता दे, मलेरिया... एक ऐसी बिमारी है जो मच्छरों और पैरासाइट के वजह से फैलता है। लेकिन इसके खतरों को हमेशा ही अनदेखा कर दिया जाता है। लोग आवश्यक सावधानी नहीं बरतते इसीलिए तो यही बीमारी को और खतरनाक हो जाती है।
विशेषज्ञों का Alert!
एड्स, टीबी और मलेरिया... इन बिमारियों से लड़ने वाले वैश्विक कोष के कार्यकारी निदेशक पीटर सैंड्स ने बर्लिन में हुए विश्व स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन में कहा कि यदि मैं HIV, TB और मलेरिया से जुड़ी मौजूदा स्थिति के बारे में विचार करूं, तो मुझे रातों में सबसे अधिक मलेरिया की बीमारी रातों में सोने नहीं देगी। उन्होंने आगे अकह कि, “मेरे लिए यह बिल्कुल साफ है कि इस साल मलेरिया से पिछले साल की तुलना में अधिक लोग मरेंगे। यह सिर्फ पैसे की कमी का गंभीर प्रभाव है, और मलेरिया एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जो अविश्वसनीय रूप से तेजी से प्रतिक्रिया करती है।” मलेरिया नो मोर यूके के गैरेथ जेनकिंस ने इसे और आसान भाषा में कहा, “विकल्प साफ़ है कि मलेरिया जैसी घातक बिमारी को खत्म करने के लिए अभी निवेश करें या जब यह वापस आए तो कहीं अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।”
मलेरिया से बढ़ा मौतों का आंकड़ा
WHO) के अनुसार, मलेरिया से हर साल तकरीबन 5,97,000 लोग मरते हैं, जिनमें अधिकतर बच्चे हैं। मौतों का करीबी 95 % भाग अफ्रीका में होता है। टीकाकरण और इलाज मौजूद होने के बावजूद, विशेषज्ञों का यह स्पष्ट रूप से कहना है कि मलेरिया के खिलाफ लड़ाई अभी भी कमजोर पड़ रही है।