Mohammad Bagher Ghalibaf:: ईरान में मोहम्मद बाघेर गालिबाफ फिर बने संसद स्पीकर, सातवीं बार मिली जिम्मेदारी

Mohammad Bagher Ghalibaf: ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ सातवीं बार संसद (मजलिस) के स्पीकर चुने गए। 271 में से 235 वोट हासिल कर उन्होंने पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज की।

Update:2026-05-25 18:20 IST

Mohammad Bagher Ghalibaf (Image Credit-Social Media)

Mohammad Bagher Ghalibaf: अपने बेबाक बयान के लिए पहचाने जाने वाले ईरान के वरिष्ठ नेता मोहम्मद बाघेर गालिबाफ को सातवीं बार संसद (मजलिस) का स्पीकर चुना गया है। सोमवार को इसका ऐलान किया गया।

वोटिंग के जरिए सांसदों ने पूर्ण बहुमत से उन्हें फिर चुना। तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, संसद के तीसरे वार्षिक सत्र के लिए प्रेसीडिंग बोर्ड का चुनाव सोमवार सुबह खुले सत्र में आयोजित किया गया। स्पीकर पद के लिए गालिबाफ के अलावा मोहम्मद तकी नक्दली और उस्मान सालारी ने भी उम्मीदवारी दाखिल की थी।

तीन उम्मीदवारों के बीच गालिबाफ की बादशाहत कायम रही और उन्होंने आसानी से चुनाव जीत लिया। 271 में से उन्हें 235 वोट मिले। वह 11वीं संसद के पूरे कार्यकाल और 12वीं संसद के पहले दो वर्षों के दौरान भी स्पीकर रह चुके हैं। अब 12वीं संसद का तीसरा वार्षिक सत्र शुरू हो गया है।

ईरानी संसद के प्रेसीडिंग बोर्ड में कुल 12 पद होते हैं, जिनमें एक स्पीकर, दो उपाध्यक्ष, छह सचिव और तीन पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) शामिल होते हैं।

गालिबाफ हाल के महीनों में अमेरिका संग जारी वार्ता और संघर्ष विराम बातचीत में भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ईरान की सत्ता संरचना में उन्हें प्रभावशाली चेहरों में से एक माना जाता है। ईरान-इजरायल तनाव और अमेरिका संग बढ़ते टकराव के बीच गालिबाफ की भूमिका और मजबूत हुई है।

12 वर्षों तक तेहरान के मेयर रहे गालिबाफ पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड कमांडर रह चुके हैं। वे 2020 से संसद स्पीकर हैं और उन्हें वर्तमान सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई का करीबी माना जाता है।

आईएसएनए न्यूज एजेंसी के अनुसार, 1961 में मशहद में जन्मे गालिबाफ ने कम उम्र में ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) में शामिल होकर अपने करियर की शुरुआत की। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने अहम भूमिका निभाई और 1982 में खुर्रमशहर को इराकी कब्जे से मुक्त कराने वाले अभियानों में हिस्सा लिया।

गालिबाफ तीन बार राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल हुए, लेकिन हर बार सफलता नहीं मिली। 2017 में उन्होंने चुनाव से अपना नाम वापस लेते हुए कट्टरपंथी खेमे के उम्मीदवार इब्राहिम रईसी का समर्थन किया था।

 

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