ISI का 'कट्टरपंथी' मिशन! हादी की मौत के बाद भारत में हाई अलर्ट...सरहद पार रचा जा रहा खूनी गेम प्लान

Bangladesh violence: बांग्लादेश में छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में हिंसा भड़क उठी है। ISI की बढ़ती मौजूदगी और पाकिस्तान से नजदीकी ने भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं।

Update:2025-12-20 08:20 IST

Bangladesh violence: बांग्लादेश इन दिनों उबाल पर है। राजधानी ढाका से लेकर कई बड़े शहरों तक सड़कों पर धुआं, जलते वाहन और गुस्से में भरी भीड़ दिखाई दे रही है। एक छात्र नेता की मौत से भड़की यह हिंसा अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय साजिश और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ते नजर आ रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या बांग्लादेश की यह अशांति सिर्फ आक्रोश का नतीजा है या इसके पीछे कोई गहरी रणनीति काम कर रही है?

छात्र नेता की मौत और भड़की आग

छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हालात तेजी से बिगड़े। ढाका में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़, आगजनी और हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले। सरकारी और निजी संपत्तियों को निशाना बनाया गया, वहीं हालात संभालने में सुरक्षा एजेंसियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हादी की मौत ने युवाओं के गुस्से को सड़क पर ला दिया, लेकिन जल्द ही यह गुस्सा संगठित हिंसा में बदलता दिखा।

सत्ता बदली, नीति बदली

बीते साल अगस्त में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस सत्ता में आए। सत्ता परिवर्तन के साथ ही बांग्लादेश की विदेश नीति में भी बदलाव दिखने लगा। भारत से दूरी और पाकिस्तान से नजदीकी ने नई बहस को जन्म दिया है। जानकारों का मानना है कि इसी बदलाव ने ढाका में बाहरी ताकतों के लिए दरवाजे खोल दिए।

ढाका में ISI की बढ़ती मौजूदगी

रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने ढाका में गहरी और सुनियोजित पैठ बना ली है। पंद्रह साल बाद पहली बार ISI का बांग्लादेश के राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे पर सीधा असर देखा जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ढाका स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन के भीतर एक विशेष ISI सेल के सक्रिय होने की खबर है, जिसमें सेना, नौसेना और वायुसेना के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

भारत की सीमाओं पर नजर

रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर में पाकिस्तानी सेना के वरिष्ठ अधिकारी जनरल साहिर शमशाद मिर्जा के ढाका दौरे के बाद दोनों देशों के बीच इंटेलिजेंस साझा करने का तंत्र बना। आधिकारिक तौर पर इसे बंगाल की खाड़ी की निगरानी बताया गया, लेकिन असल चिंता भारत की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर है। नई दिल्ली इसे सीधे तौर पर क्षेत्रीय संतुलन के लिए खतरा मान रही है।

कट्टरपंथ की ओर धकेले जा रहे युवा

खुफिया विश्लेषकों का कहना है कि ISI का मुख्य फोकस बांग्लादेश के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर मोड़ना है। जमात-ए-इस्लामी और इंकलाब मंच जैसे संगठनों के जरिए माहौल बनाया जा रहा है। शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद फैली हिंसा में इसी रणनीति की झलक देखी जा रही है। हालात बिगड़ने के साथ ही ढाका में भारतीय उच्चायोग और चटगांव में सहायक उच्चायोग पर हुए हमलों ने भारत विरोधी माहौल को और उजागर किया।

भारत की बढ़ती बेचैनी

भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है। कोलंबो सिक्योरिटी कॉन्क्लेव समिट के दौरान एनएसए अजीत डोभाल ने बांग्लादेशी एनएसए के सामने ढाका में ISI की मौजूदगी का मुद्दा उठाया था। भारत के लिए यह सिर्फ एक पड़ोसी देश की समस्या नहीं, बल्कि ‘नेबर फर्स्ट’ नीति और पूरे क्षेत्र की स्थिरता से जुड़ा सवाल बन गया है।

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