US Election: अमेरिकी चुनावों में गूंजा भारत का Voter ID मॉडल, ट्रंप ने SAVE Act पर दिया जोर

US Election: डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी चुनावों में सख्त Voter ID व्यवस्था की वकालत करते हुए भारत के फोटो पहचान पत्र मॉडल का उदाहरण दिया। जानें क्या है SAVE Act और क्यों हो रहा विरोध।

Update:2026-08-19 23:06 IST

US Election (Image Credit-Social Media)

वाशिंगटन/नई दिल्ली; विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की चुनावी पहचान प्रणाली की चर्चा अब अमेरिकी राजनीति के केंद्र में आ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चुनाव व्यवस्था में अनिवार्य मतदाता फोटो पहचान पत्र (EPIC) प्रणाली का उदाहरण देते हुए अमेरिका में भी सख्त चुनावी नियम लागू करने की जोरदार वकालत की है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों की सरगर्मी के बीच ट्रंप ने मतदान के दौरान वैध पहचान पत्र की अनिवार्यता पर जोर देते हुए 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE Act) को तुरंत पारित करने की मांग उठाई है।

सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए ट्रंप ने तर्क दिया कि जब भारत जैसा विशाल देश—जहां 60 करोड़ से अधिक मतदाता मतदान करते हैं—प्रत्येक नागरिक के लिए वैध फोटो पहचान पत्र सुनिश्चित करके निष्पक्ष चुनाव करा सकता है, तो अमेरिका में मतदान के लिए वैध पहचान की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि भारतीय चुनाव प्रक्रिया में भौतिक सत्यापन और पुख्ता पहचान तंत्र चुनावी विश्वसनीयता का मुख्य आधार है।

क्या है 'SAVE Act' और क्यों मचा है घमासान?

अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी 'सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी एक्ट' (SAVE Act) को कानून बनाने के लिए लगातार दबाव बना रही है। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य संघीय चुनावों में केवल अमेरिकी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना और मतदान के समय वैध सरकारी फोटो पहचान पत्र व नागरिकता प्रमाण को अनिवार्य बनाना है।

हालांकि, विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी और कई प्रमुख मानवाधिकार संगठन इस बिल का कड़ा विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि अमेरिका में पहचान पत्र जारी करने की कोई केंद्रीकृत राष्ट्रीय प्रणाली नहीं है। कई स्वतंत्र अध्ययनों के अनुसार, देश के लाखों योग्य मतदाताओं—विशेषकर ग्रामीण, बुजुर्ग और वंचित वर्गों—के पास तत्काल प्रभाव से नागरिकता प्रमाणित करने वाले पुख्ता दस्तावेज या सरकारी फोटो आईडी उपलब्ध नहीं हैं। आलोचकों का कहना है कि ऐसे कड़े नियमों से गैर-दस्तावेजी पात्र नागरिकों के मताधिकार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले मतदाता पहचान और चुनावी सुधारों को लेकर छिड़ी इस बहस ने एक बार फिर भारत के व्यापक, व्यवस्थित और तकनीकी रूप से सुदृढ़ मतदाता पहचान तंत्र को अंतरराष्ट्रीय पटल पर विमर्श का मुख्य विषय बना दिया है।

Tags:    

Similar News