अब बारी हमारी है! व्हाइट हाउस में ट्रंप-नेतन्याहू की खामोश तस्वीर ने खोला ईरान के खिलाफ खौफनाक प्लान का राज
Trump Netanyahu nuclear plan: व्हाइट हाउस की एक तस्वीर इन दिनों पूरी दुनिया को डरा रही है। डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू, दोनों अपने-अपने चेहरों पर खामोशी का नकाब ओढ़े, लेकिन उनकी आंखों में एक ही भावना बदला। ईरान के खिलाफ छेड़े गए न्यूक्लियर हमले के बाद यह फोटो किसी इत्तेफाक की उपज नहीं है, बल्कि आने वाले तूफान की भविष्यवाणी है।
Trump Netanyahu nuclear plan: व्हाइट हाउस की एक तस्वीर इन दिनों पूरी दुनिया को डरा रही है। डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू, दोनों अपने-अपने चेहरों पर खामोशी का नकाब ओढ़े, लेकिन उनकी आंखों में एक ही भावना बदला। ईरान के खिलाफ छेड़े गए न्यूक्लियर हमले के बाद यह फोटो किसी इत्तेफाक की उपज नहीं है, बल्कि आने वाले तूफान की भविष्यवाणी है। ट्रंप और नेतन्याहू अब खुलकर इस्लामी सत्ता के प्रतीकों को चुनौती दे चुके हैं और ईरान की सत्ता हिल चुकी है।
व्हाइट हाउस से आई सबसे खतरनाक तस्वीर
सोमवार को इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वॉशिंगटन पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने एक तस्वीर जारी की, जिसमें वो एक स्क्रीन पर कुछ देख रहे थे लेकिन चेहरों पर भाव थे युद्ध के, और पीछे पड़ी परछाइयाँ थीं ईरान के ध्वस्त न्यूक्लियर रिएक्टर की। माना जा रहा है कि दोनों नेता ईरान पर किए गए उस संयुक्त हमले की फुटेज देख रहे थे, जिसने खमेनेई शासन की नींव हिला दी। तस्वीर को लेकर खुफिया सूत्रों का कहना है यह महज़ एक राजनीतिक फोटोशूट नहीं, बल्कि एक चेतावनी है अब कोई भी हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा जवाब सीधे न्यूक्लियर लेवल पर मिलेगा।
ट्रंप पर दो-दो बार हुआ जानलेवा हमला
13 जुलाई 2024 को अमेरिकी चुनावी सभा के दौरान पेंसिल्वेनिया के बटलर शहर में ट्रंप पर फायरिंग हुई थी। एक गोली उनके कान को छूते हुए निकल गई। यह घटना अमेरिका को दहशत में डालने के लिए काफी थी, लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं हुई। 64 दिन बाद फ्लोरिडा के पाम बीच इंटरनेशनल गोल्फ क्लब में एक और जानलेवा हमला ट्रंप पर हुआ। अमेरिकी न्याय विभाग की जांच के बाद यह दावा किया गया कि इन दोनों हमलों की साजिश के पीछे ईरान का हाथ था। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की एक कट्टर शाखा ने ट्रंप की हत्या के लिए करोड़ों डॉलर की सुपारी तक दी थी।
नेतन्याहू का वार, ट्रंप की जीत का परमाणु बदला
ईरान ने ट्रंप के राष्ट्रपति पद पर वापसी पर ठंडी प्रतिक्रिया दी थी। उनका कहना था कि इससे कुछ बदलने वाला नहीं। लेकिन अब साफ हो गया है कि ट्रंप और नेतन्याहू पहले ही तय कर चुके थे बदला जरूर लिया जाएगा। हाल ही में हुए 12 दिनों के संघर्ष में ट्रंप ने इजरायली सेना को अमेरिका की सैन्य तकनीक और खुफिया जानकारी से लैस किया। इसके बाद इजरायल ने ईरान के खामेनेई न्यूक्लियर प्रोजेक्ट को एक सर्जिकल ऑपरेशन में पूरी तरह तबाह कर दिया। इस हमले के बाद ईरान का सबसे गोपनीय न्यूक्लियर रिएक्टर अब सिर्फ एक रेडियोधर्मी खंडहर है, और उसकी सुरक्षा प्रणाली की बिखरी हुई परतें इस बात की गवाही दे रही हैं कि हमला बाहर से नहीं – अंदर तक घुसकर किया गया था।
ईरान की खामोशी डरावनी है
आश्चर्य की बात यह है कि इतने बड़े हमले के बावजूद ईरान ने अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। न कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस, न कोई धमकी, न ही कोई बयान। खुफिया सूत्रों का मानना है कि यह सन्नाटा किसी तूफान से पहले की चेतावनी हो सकता है। ईरान के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने सिर्फ इतना कहा – ट्रंप की जीत का हमारे देश पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन जो तस्वीर व्हाइट हाउस से जारी हुई है, वह साफ बताती है कि असर तो पड़ेगा और बहुत गहरा पड़ेगा।
क्या ट्रंप-नेतन्याहू की जोड़ी छेड़ने वाली है तीसरा युद्ध?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जोड़ी ईरान के खिलाफ एक पूर्ण युद्ध की भूमिका बना रही है? जिस तरह से ट्रंप खुलेआम ईरान पर हमला करने की बात कर रहे हैं, और जिस तरह नेतन्याहू की सरकार आक्रामक रुख अपनाए हुए है, उससे यही संकेत मिल रहे हैं कि मध्य-पूर्व एक बार फिर जंग के मुहाने पर खड़ा है। इस बार फर्क सिर्फ इतना है अब अमेरिका और इजराइल मिलकर ड्रोन युद्ध या मिसाइल हमला नहीं, बल्कि सीधे न्यूक्लियर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर वार कर रहे हैं।