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Oyo Drags Lenskart to Court: Oyo ने Lenskart को फिर से कोर्ट में घसीटा - फिस लीज विवाद का नया मोड़
Oyo Drags Lenskart to Court : Oyo ने लीज विवाद में Lenskart को फिर कोर्ट में घसीटा, मुआवज़े और ब्याज पर आर्बिट्रेशन फैसले को चुनौती दी।
Oyo Drags Lenskart to Court
Oyo Drags Lenskart to Court: Oyo Hotels and Homes Pvt Ltd ने Lenskart Solutions Pvt Ltd के साथ चल रहे ऑफिस लीज विवाद में Delhi High Court का दरवाज़ा खटखटाया है। यह मामला COVID-19 महामारी के दौरान को-वर्किंग स्पेस की लीज के समय से पहले खत्म होने को लेकर है। यह जानकारी Bar and Bench की रिपोर्ट में सामने आई है। मंगलवार को Justice Amit Bansal की कोर्ट में Oyo की पिटीशन पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने Lenskart को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
विवाद कैसे शरू हुआ ?
Oyo और Lenskart के बीच एक लीज एग्रीमेंट 30 जुलाई 2019 को हुआ। Lenskart ने MG Road, Bengaluru स्थित Subharam Complex के पहले फ्लोर को 6 साल के लिए किराए पर लिया था, जिसमे लॉक-इन पीरियड 36 महीने तय किया था। और मार्च के महामारी के समय Lenskart ने 15 दिन का किराया रोक दिया और Force Majeure का सौप दिया। Lenskart ने 24 मई 2020 को लीज खत्म कर दी और ₹1.21 करोड़ का सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने की मांग की। Oyo ने कहा कि यह टर्मिनेशन समय से पहले और अवैध था, और उसने ₹7.8 करोड़ से अधिक की रकम मांगी, जो लॉक-इन पीरियड के बचे समय का किराया और लेट पेमेंट चार्ज था।
Arbitration में क्या हुआ?
सितंबर 2021 में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सोल आर्बिट्रेटर नियुक्त किया। ट्रिब्यूनल ने लंबी सुनवाई के बाद निर्णय लिया कि COVID-19 लीज के Force Majeure क्लॉज़ को लागू नहीं करेगा क्योंकि यह क्लॉज़ केवल तभी लागू होता था जब संपत्ति को नुकसान होता था।
यह निर्णय Oyo के पक्ष में था, आर्बिट्रेटर ने Lock-in Compensation को कम कर दिया और ब्याज और Stamp Duty पर कुछ टिप्पणियां दीं, जिससे Oyo सहमत नहीं था।
अब हाई कोर्ट में मामला क्यों?
Lenskart और Oyo के बीच एक बार फिर ऑफिस किराया विवाद को कोर्ट में ले गया है। 2019 में दोनों ने छह साल के लिए कार्यालय किराए पर लेने का समझौता किया, जिसमें तीन साल तक कार्यालय खाली नहीं करने की शर्त थी। लेकिन महामारी के दौरान, 2020 में Lenskart ने किराया देना बंद कर दिया और कुछ महीनों बाद कार्यालय का अनुबंध खत्म कर दिया। Oyo का कहना है कि Lenskart ने समय से पहले काम छोड़ दिया है और उसे इसके लिए भुगतान किया जाना चाहिए। इस मामले में पहले आर्बिट्रेशन हुआ, जिससे Oyo को कुछ फायदा हुआ, लेकिन पूरी रकम नहीं मिली। Oyo अब हाई कोर्ट आर्बिट्रेशन के कुछ फैसलों को बदलना चाहती है, जैसे मुआवज़े की रकम, ब्याज और स्टांप ड्यूटी पर टिप्पणियां। कोर्ट अब पूरे मामले को दोबारा नहीं सुनेंगे, बल्कि सिर्फ उन भागों को बदलेंगे जिनमें गलती साबित होगी।


