टाटा संस के इतिहास में पहली बार, चंद्रशेखरन को मिला तीसरा कार्यकाल!

टाटा संस ने इतिहास रच दिया है! एन. चंद्रशेखरन को लगातार तीसरी बार चेयरमैन बनाया गया। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय व्यवसाय में नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं।

Sonal Girhepunje
Published on: 13 Oct 2025 9:28 AM IST
टाटा संस के इतिहास में पहली बार, चंद्रशेखरन को मिला तीसरा कार्यकाल!
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Tata Sons Gives Chandrasekaran Historic Term: भारत के सबसे भरोसेमंद और पुराने उद्योग समूहों में से एक टाटा समूह ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। टाटा ट्रस्ट्स ने अपनी रिटायरमेंट नीति में बदलाव करते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए मंजूरी दे दी है। यह निर्णय इसलिए खास है क्योंकि अब वे टाटा समूह के इतिहास में पहले ऐसे चेयरमैन बन गए हैं जिन्हें लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुना गया है, ऐसा रिकॉर्ड रतन टाटा जैसे दिग्गज भी नहीं बना पाए थे। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने डिजिटल, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय कारोबार के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है और अब उनका तीसरा कार्यकाल समूह के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।

निरंतरता के लिए बड़ा कदम

एन. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होगा। उस समय उनकी उम्र 65 वर्ष हो जाएगी, जो टाटा समूह में रिटायरमेंट की तय सीमा है। लेकिन टाटा समूह की कई बड़ी परियोजनाएं जैसे सेमीकंडक्टर निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी निर्माण और एयर इंडिया के संचालन को जारी रखने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने उन्हें तीसरे कार्यकाल की मंजूरी दे दी है। यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि यह पहली बार है जब किसी सक्रिय चेयरमैन को रिटायरमेंट की उम्र पार करने के बाद भी कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई है। इस कदम से टाटा समूह की भविष्य की योजनाओं में स्थिरता और निरंतर विकास सुनिश्चित होगा।

टाटा बोर्ड में सर्वसम्मति से समर्थन

11 सितंबर 2025 को हुई टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने एन. चंद्रशेखरन के लिए तीसरे कार्यकाल का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव को सभी ट्रस्टीज ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। माना जा रहा है कि फरवरी 2027 में इस निर्णय को औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।

चंद्रशेखरन की बड़ी उपलब्धियां

एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने नए युग की ओर कदम बढ़ाते हुए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। समूह का कुल राजस्व 15.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि शुद्ध लाभ 1.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस अवधि में टाटा समूह की मार्केट कैपिटलाइजेशन तीन गुना से अधिक बढ़ गई, जो उनके नेतृत्व की सफलता को दर्शाती है।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा डिजिटल, टाटा न्यू, बिगबास्केट, टाटा 1एमजी और टाटा क्लिक जैसी नई कंपनियों को नई दिशा मिली। इसके साथ ही, 69 साल बाद एयर इंडिया फिर से टाटा समूह के अधीन आई और विस्तारा तथा एयरएशिया इंडिया का विलय भी सफलतापूर्वक पूरा हुआ। समूह की कुल संपत्ति 2018 के 43,252 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

बदलते दौर में टाटा समूह की चुनौतियाँ और उम्मीदें

हाल में टाटा समूह की प्रमुख कंपनी TCS के शेयरों में गिरावट से समूह की कुल मार्केट कैप में ₹6.9 लाख करोड़ की कमी आई है। इसके बावजूद, समूह भारत और यूके में बैटरी गीगाफ़ैक्ट्री और स्वदेशी सेमीकंडक्टर निर्माण जैसी योजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। ये प्रोजेक्ट्स आने वाले समय में टाटा समूह को भविष्य की तकनीक का वैश्विक लीडर बना सकते हैं।

एन. चंद्रशेखरन का प्रेरणादायक सफर

एन. चंद्रशेखरन का जीवन सफलता की मिसाल है। वे तमिलनाडु के एक किसान परिवार से आते हैं। उन्होंने TCS में एक साधारण कर्मचारी के रूप में काम शुरू किया था। कड़ी मेहनत और लगन से वे कंपनी के सीईओ बने और बाद में पूरे टाटा समूह के चेयरमैन बने। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर डिजिटल, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के युग में कदम रखा है।

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Sonal Girhepunje

Sonal Girhepunje is a Former Senior Writer at Newstrack.com.

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