दुनिया का अनोखा मेला! यहां संतान सुख के लिए पेट के बल लेटती हैं 1000 महिलाएं, ऊपर से गुजरते हैं लोग…

Chhattisgarh fertility fair: छत्तीसगढ़ के धमतरी में शुक्रवार को मड़ई नामक मेला आयोजित किया गया। इस मेले में करीब 52 गांवों के देव विग्रह ने हिस्सा लिया। आपने कभी ऐसा सोचा भी होगा... कि इस कार्यक्रम में तक़रीबन 1000 से अधिक महिलाएं पेट के बल लेटीं फिर बैगा जनजाति के लोग उनके ऊपर से होकर गुजरे।

Priya Singh Bisen
Published on: 25 Oct 2025 11:51 AM IST
Unique Fertility Fair in Chhattisgarh
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Unique Fertility Fair in Chhattisgarh

Unique Fertility Fair in Chhattisgarh: आजकल बच्चे पैदा करना आसान नहीं रह गया है। आज जो महिला माँ नहीं बन पातीं, वे कई तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं - जिनमें IVF सबसे ज्यादा मशहूर है। लेकिन एक ऐसी भी प्रथा है बच्चे पैदा करने क जिसके बारे में आपने कभी नहीं सुना होगा। छत्तीसगढ़ के धमतरी में हाल ही में परंपरागत देव मड़ई का भाव आयोजन किया गया। इस अवसर पर आसपास के करीब 52 गांव के देवी देवता पहुंचे। मड़ई मेले के दौरान मां अंगारमोती माता के मंदिर में संतान सुख के लिए हजारों महिलाएं पेट के बल लेटीं जिसके बाद बैगा जनजाति के लोग उनके ऊपर से होकर गुजरे। इसे परण के नाम से जाना जाता है।

संतान प्राप्ति के लिए मान्यता कि यकीन नहीं कर पाएंगे आप....


ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से महिलाओं को संतान का सुख मिलता है। आपको बता दे, परण करने के लिए महिलाएं हाथों में नींबू, नारियल और अन्य पूजा सामग्री लेकर पेट के बल लेट जाती हैं। और ऐसा भी माना जाता है कि यहाँ सभी महिलाओं की मनोकामना पूर्ण होती है इसीलिए हर साल परण करने वाली महिलाओं की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। बीते साल लगभग 300 महिलाओं ने मन्नत मांगी थी। इस साल तकरीबन 1000 से अधिक महिलाओं ने मन्नत मांगने के लिए छत्तीसगढ़ के आलावा अन्य दूसरे राज्यो से पहुंची थीं।

दरअसल, मड़ई मेला का आयोजन दिवाली के बाद प्रथम शुक्रवार को किया गया। इस मेले में 52 गांवों के देव विग्रह सम्मिलित हुए। आदिशक्ति मां अंगारमोती ट्रस्ट के अध्यक्ष जीवराखन मरई ने इस कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मां अंगारमोती वनदेवी हैं, जिन्हें गोंड़ों की कुल देवी भी कहा जाता है। हजारों साल पूर्व आदिशक्ति मां अंगारमोती महानदी के तट एवं ग्राम-चंवर, बटरेल, कोकड़ी, कोरलमा के सीमा पर विराजमान थीं, जिसकी विधिविधान से क्षेत्रवासी पूजा-अर्चना किया करते थे।

गोंड़ समाज के पुजारी व सेवादार के ज़रिये ही माता की पूजा और सेवा की जाती थी। दीवाली के बाद प्रथम शुक्रवार को देव मड़ई मेला आयोजन करने की कई सालों से चली आ रही है। जिसे गंगरेल में पुर्नस्थापित किए जाने के बाद निभाया जा रहा है। मेले के दिन निसंतान महिलाएं भारी संख्या में मां अंगारमोती के दरबार पहुंची और माता का परण किया। भक्तों की ऐसी मान्यता है कि माता स्वयं सिरहा के शरीर में प्रवेश करती हैं और पूरे मेला का भ्रमण करती हैं।

1000 से अधिक महिलाओं ने मांगी मन्नत

आपको बात दे, इलाके में पूरे साल में मड़ई का दिन सबसे विशेष माना जाता है। इस दिन यहां सैकड़ों की संख्या में लोग जाते हैं। आदिवासी परंपराओं के साथ पूजा और सभी रीतियां धूम-धाम से निभाई जाती हैं। इस साल यहां लगभग 1000 से अधिक संख्या के बीच में महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए मन्नत मांगने पहुंचीं। इस अवसर पर महिलाएं मंदिर के सामने हाथ में नारियल, अगरबत्ती, नींबू लिए लंबी लाइन में खड़ी हुईं।

लोगों का ऐसा मानना है कि यहां वे तमाम बैगा भी पहुँचते हैं, जिन पर देवी सवार होती हैं। वो झूमते-झूपते थोड़े बेसुध से मंदिर की ओर बढ़ते हैं। चारों ओर ढोल-नगाड़ों की तेज़ आवाज गूंजती रहती है। बैगाओं को आता देख कतार में खड़ी सभी महिलाएं बाल को खुला कर पेट के बल दंडवत लेट जाती है और सारे बैगा उनके ऊपर से गुजरते हैं। ताकि माता का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हो सके और उन्हें सन्तान सुख की प्राप्ति हो सके।

52 गांवों की माता हैं अंगारमोती

प्राचीन कथाओं के मुताबिक, माता अंगारमोती 52 गांवों की देवी के रूप में जानी जाती हैं। इन गांवों के लोगों को यदि कोई परेशानी या समस्या होती है तो वे मां अंगारमोती के पास जाकर मन्नत मांगते हैं और मन्नत पूरी होने पर शुक्रवार के दिन माता का भव्य पूजा कराते हैं। माता के दरबार में विशेषकर निसंतान महिलाएं मातृसुख के लिए फरियाद लेकर पहुंचती हैं, जिसको माता अपनी आर्शीवाद देती हैं।

बेहद हैरान करने वाली ऐसी मान्यता

बहरहाल मौजूदा समय में जहां संतान के लिए लोग आधुनिकतम टेस्ट ट्यूब और IVF तकनीक का सहयोग ले रहे हैं, तो वहीं ऐसे समय में आज भी यह मान्यता हैरान करने वाली है। यहां माता के प्रति महिलाओं की श्रद्धा बढ़ते ही जा रही है। छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों से भी महिलाएं इस मड़ई मेले में पहुंचकर माता से संतान सूख का आशीर्वाद लेने पहुंच रही हैं, जिनकी महिमा अपरंपार है।

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Priya Singh Bisen
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Priya Singh Bisen

Priya Singh Bisen is a journalist with over five years of experience in the news and digital media industry. She covers a wide range of topics, including weather, lifestyle, health, politics, and international affairs. In addition to news writing, Priya has experience in news script writing, voice-overs, anchoring, field reporting, and social media management. She holds a Bachelor's degree in Mass Communication and a Master's degree in Advertising and Public Relations. Priya also enjoys writing, traveling, and playing sports, pursuits that reflect her curiosity and passion for exploring new perspectives.

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