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वाह रे योगी पुलिस ! घटना से पहले ही करवा डाला मेडिकल, दरोगा जी ने दिखाया अपना कमाल

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 1 Aug 2018 2:16 PM GMT

वाह रे योगी पुलिस ! घटना से पहले ही करवा डाला मेडिकल, दरोगा जी ने दिखाया अपना कमाल
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मुरादाबाद: जिले के थाना सिविल लाइन पुलिस का एक ऐसा कारनामा सामने आया है। जिसमें घटना होने से पहले ही पुलिस ने मेडिकल करवा डाला है। हैरत की बात ये है कि इसमें वादी खुद सिविल लाइन थाने के एक दरोगा जी ही हैं।

दरोगा जी ने कर दिया खेल

उत्तर प्रदेश पुलिस को लेकर कहावतें ऐसे ही नही बनी हैं, देश के किसी भी हिस्से में चले जाइए, यूपी पुलिस को लेकर एक कहावत तो निश्चित रूप से कही जाती हैं " रस्सी को सांप बना देती है "। जी हां इसी कहावत को साकार करता हुआ एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है।

दरअसल बीती 12 जुलाई को थाना सिविल लाइन क्षेत्र भटावली के रहने वाले जरीफ अहमद को चौकी इंचार्ज अगवानपुर सन्दीप अपनी टीम के साथ एक पुराने जमीनी विवाद में गिरफ्तार करने के लिए पहुँचे थे। जहाँ से पुलिस का खेल शुरू हो गया। न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे जरीफ अहमद के बेटे जहीर अहमद ने कैमरे के सामने जो एफआईआर और मेडिकल के कागज दिखाए, उन्होंने तो सिविल लाइन पुलिस की पोल ही खोल कर रख दी।

पीड़ित के अनुसार चौकी इंचार्ज सन्दीप उनके परिवार के पीछे पड़ा हुआ है। जिसकी लिखित में शिकायत पुलिस के आला अधिकारियों से की गई थी। जिसका खामियाजा उसके परिवार को बारह जुलाई को भुगतना पड़ा। पुलिस अपनी टीम के साथ उनके घर पहुँची और उनके मां-बाप से मारपीट करते हुए उनके पिताजी को उठा कर थाने ले गई। जहां पहुँच कर पुलिस ने अपना रंग दिखा दिया। उनके पिताजी के साथ मारपीट की गई और उल्टा दरोगा सन्दीप ने अपने सिपाही को वादी बनाते हुए यह मुकदमा दर्ज किया कि दबिश के दौरान जरीफ अहमद ने पुलिस पर हमला किया और सिपाही का गाल तक काट लिया।

मेडिकल से खुला मामला

पीड़ित के अनुसार ये मुकदमा सरासर फर्जी है। सिविल लाइन पुलिस ने ये मुकदमा तो जरूर कायम किया है। लेकिन वह इसमें बुरी तरह फंस गई है। दरअसल पुलिस की एफआईआर के अनुसार घटना दोपहर डेढ़ बजे की अंकित है। जबकि जिला अस्पताल में सिपाही ने जो अपना मेडिकल कराया है, उसमें समय दोपहर एक बजे का अंकित हैं। घटना से पहले मेडिकल हो जाना पूरे घटनाक्रम को संदेह के दायरे में ले आया है।

जरीफ अहमद को पुलिस ने घटना वाले दिन ही जेल भेज दिया था। लेकिन पुलिस की कहानी में इतना बड़ा झोल सिविल लाइन पुलिस के गले की हड्डी बन गया है। इस मामले में जब सीओ सिविल लाइन अपर्णा गुप्ता से बात की गई तो पहले तो वो बात करने के लिए तैयार ही नहीं हुईं। लेकिन फिर अपने विभाग के दरोगा और सिपाही का बचाव करते हुए इस झोल की जांच कराने की बात जरूर कह रही हैं।

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