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भारत में बढ़ रहे कोविड-19 के केस, फिर बंद होंगे स्कूल? जाने क्या पड़ेगा कोरोना का शिक्षा पर प्रभाव
Covid-19 Cases in India: आइए जानते हैं कि भारत में इस महामारी के कारण शिक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा,भविष्य में इस महामारी से निपटने के लिए हम कितने तैयार
Covid-19 Cases in India
Covid-19 Cases in India Latest News: कोरोना का नाम सुनते ही याद आता है वो भयानक मंजर जब हर ओर दहशत का माहौल था। लोग अपने ही घरों में कैद हो कर रह गये थे।इस बीच फिर खबर आ रही है कि देश में कोरोना वायसर(Corona Virus) के मामले बढ़ते(Active Covid-19 Cases in India) जा रहे हैं।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 1047 हो गई है। केरल में सबसे ज्यादा 430 एक्टिव केस सामने आये हैं। महाराष्ट्र में 208, दिल्ली में 104 और गुजरात में 83 केस हैं। कर्नाटक के 80 केसों में से सिर्फ 73 बेंगलुरु में हैं। वहीं पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में कुल 11 मरीजों की मौत हो चुकी है।
कोविड-19 का असर न केवल स्वास्थय पर पड़ा बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी इस महामारी ने काफी नुकसान पहुचाया और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हमारी शिक्षा व्यवस्था। कोविड-19 महामारी(Covid-19 pandemic) ने वैश्विक स्तर पर शिक्षा प्रणाली को झकझोर कर रख दिया। भारत में भी इसका सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव व्यापक रूप से देखा गया। कहीं स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ऑनलाइन शिक्षा का प्रसार हुआ तो कहीं इंटरनेट,डिजिटल संसाधनों की उचित जानकारी न होना और आर्थिक तंग के कारण लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ा।
आइए जानते हैं कि भारत में इस महामारी के कारण शिक्षा व्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा और भविष्य में एसी परिस्थितियों से निपटने के लिए हम कितने तैयार हैं।
सकारात्मक प्रभाव
-ऑनलाइन शिक्षा का विकास- देश में कोविड-19 से पहले ऑनलाइन शिक्षा(Online Education in India) पर इतना ध्यान नहीं दिया जाता था लेकिन इस महामारी के आने के बाद ऑनलाइन शिक्षा में काफी इजाफा हुआ। आइएमएआरसी ग्रुप(IMARC Group) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में ऑनलाइन शिक्षा बाजार का आकार 2024 में 2.92 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और यह 2033 तक 20.98 बिलियन डॉलर तक पंहुचने की संभवना है।
-डिजिटल डिवाइस और टूल्स के ज्ञान में वृद्धि- एक मीडीया रिपोर्ट की माने तो 14-16 वर्ष के बच्चों में से 82.2% ने स्मार्टफोन का उपयोग करना सीखा है और इनमें से 57% शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए इसका प्रयोग किया है।
-शिक्षा में नवाचार और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तार- कोरोना के बाद भारत कि शिक्षा व्यवस्था में ब्लेंडेड लर्निंग, गैमिफिकेशन और माइक्रो लर्निंग जैसी तकनीकों का तेजी से विकास हुआ। साथ ही भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय (NDU) जैसी पहल से डिजिटल शिक्षा को एक संरचित रूप भी मिला।
नकारात्मक प्रभाव
-स्टुडेंट्स के लर्निंग प्रोसेस में कमी- ऐनुएल स्टेटस ऑफ एजुकेशन 2022 की रिपोर्ट के अनुसार(ASER), ग्रामीण भारत में कक्षा 3 के केवल 20.5% छात्र कक्षा 2 के स्तर की किताबें पढ़ पा रहे थे। यह संख्या 2024 में बढ़कर 27.1% हुई, लेकिन सीखने में गिरावट अभी भी चिंता का विषय बना हुआ है।
-डिजिटल असमानता- वर्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट की माने तो भारत में करीब 30 मिलियन छात्रों के पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए जरूरी डिवाइस नहीं थे। ग्रामीण क्षेत्रों में यह समस्या और अधिक गंभीर थी।
-शिक्षकों की कमी और रोजगार पर असर- 2020-21 में देश में शिक्षकों की संख्या 97.87 लाख थी जो 2021-22 में घटकर 95.07 लाख रह गई यानी शिक्षकों की संख्या में लगभग 2% की कमी हुई।
-मानसिक स्वास्थ्य पर असर- स्कूल बंद होने और सहपाठियों से दूरी के कारण छात्रों में अकेलापन, तनाव और अवसाद की शिकायतें तेजी से बढ़ीं।
यदि भविष्य में फिर से लॉकडाउन जैसी स्थिति बनती है तो शिक्षा प्रणाली और स्टुडेंट्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा
-अब स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में लर्निंग मेनेजमेंट सिस्टम (Learning Management Systems), ज़ूम(Zoom), गूगल क्लासरुम (Google Classroom) जैसे प्लेटफॉर्म्स का अनुभव पहले से है इसलिए ऑनलाइन एजुकेशन में पहले जैसी समस्याएं कम रहेंगी।
-शिक्षकों और छात्रों में अब डिजिटल टूल्स की समझ बढ़ चुकी है, जिससे स्टुडेंट्स को अधिक सहजता से ऑनलाइन मोड पर पढ़ाया जा सकता है
-लॉकडाउन के दौरान छात्रों ने खुद से सीखने की क्षमता विकसित की थी। यदि स्थिति दोबारा बनती है तो अब स्टुडेंट्स ज़्यादा आत्मनिर्भर और सेल्फ मोटिवेटेड(self-motivated learners) हैं।
-ऑनलाइन मोड के माध्यम से शिक्षा अब समय और स्थान से बंधी नहीं है। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार लर्निंग शेड्यूल बना सकते हैं।
-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(AI,AR/VR) और एडटेक ऐप्स जैसे खान एकेडमी (Khan Academy), दीक्षा(Diksha) आदि का अधिक प्रयोग होने की संभावना है। यह शिक्षा को इंटरएक्टिव, गेमिफाइड और विज़ुअल बना सकता है, जिससे सीखने की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है।


