डोनाल्ड ट्रंप को हुआ Chronic Venous Insufficiency, जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज के तरीके

Chronic Venous Insufficiency: Chronic Venous Insufficiency कोई जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह गंभीर रूप ले सकती है।

Ragini Sinha
Published on: 18 July 2025 11:28 AM IST
Donlad trump
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Donlad trump Chronic Venous Insufficiency (social media)

Donald Trump Suffer from Chronic Venous Insufficiency: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हाल ही में Chronic Venous Insufficiency (CVI) नाम की बीमारी होने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने पैरों में सूजन देखी थी, जिसके बाद डॉक्टर्स ने जांच की और यह बीमारी पाई गई। अच्छी बात यह रही कि डॉक्टर्स ने Deep Vein Thrombosis (DVT) जैसी गंभीर बीमारी की संभावना को खारिज कर दिया है।

क्या है Chronic Venous Insufficiency?

यह एक वेस्कुलर यानी नसों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें पैरों की नसें सही तरीके से खून को दिल तक नहीं पहुंचा पाती हैं। इसके कारण खून पैरों में जमा होने लगता है जिससे सूजन, भारीपन और स्किन में बदलाव जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।


पैरों में कौन-कौन सी नसें होती हैं?

  • Deep Veins: ये मसल्स के अंदर होती हैं
  • Superficial Veins: त्वचा के करीब होती हैं
  • Perforator Veins: ये दोनों नसों को जोड़ती हैं

जब इन नसों के वॉल्व कमजोर या डैमेज हो जाते हैं तो खून उल्टा बहने लगता है और पैरों में इकट्ठा हो जाता है।

CVI के लक्षण क्या हैं?

क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी (CVI) एक ऐसी समस्या है जिसमें पैरों की नसें सही से खून को वापस दिल तक नहीं पहुंचा पाती हैं। इसके कारण पैरों में भारीपन या दर्द महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को रात में पैरों में क्रैम्प्स आते हैं और एड़ियों के पास सूजन हो जाती है। त्वचा में खुजली, पपड़ी बनना या रंग बदलना जैसे लक्षण दिखते हैं। वैरिकोज़ नसें उभर आती हैं और जलन या झनझनाहट भी हो सकती है। अगर समय पर इलाज न किया जाए तो पैरों पर घाव या अल्सर बन सकते हैं। डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।


इसके होने के कारण

  • जन्मजात नसों की खराबी
  • बढ़ती उम्र या ज्यादा खड़े रहना
  • पिछली नसों की चोट या सर्जरी

क्या है इसका इलाज और बचाव

CVI यानी क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी का इलाज संभव है। इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाकर आराम पाया जा सकता है। सबसे पहले, डॉक्टर की सलाह पर कम्प्रेशन स्टॉकिंग पहनें। दिन में कुछ बार पैरों को ऊंचा रखें ताकि ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो। नियमित रूप से वॉक करना भी फायदेमंद होता है। लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से बचें। अगर लक्षण ज्यादा बढ़ जाएं, तो लेजर थैरेपी, स्क्लेरोथैरेपी या सर्जरी जैसे आधुनिक इलाज का विकल्प अपनाया जा सकता है।

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Ragini Sinha is a Former News Publisher at Newstrack.com.

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