आपके सेहत को बर्बाद कर रही है आपकी रोजाना की ये 1 आदत, भूलकर भी ना करें ये काम वरना पड़ेगा भारी! जानें क्या?

Side Effects Of Mouth Breathing: मुंह से सांस लेने की आदत कई कारणों से होती है और शरीर पर इसका गलत प्रभाव पड़ता है, आईए जानते है-

Akriti Pandey
Published on: 9 Nov 2025 5:09 PM IST (Updated on: 9 Nov 2025 5:30 PM IST)
Effects Of Mouth Breathing
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Effects Of Mouth Breathing

Side Effects Of Mouth Breathing: हमारा शरीर नाक से सांस लेने के लिए बना है। नाक से ली गई हवा पहले साफ, गर्म और नम हो जाती है ताकि फेफड़ों तक पहुंचने पर वह शरीर के अनुकूल रहे। नाक के अंदर मौजूद सिलिया और म्यूकस धूल, प्रदूषण और बैक्टीरिया जैसी चीजों को रोकते हैं। लेकिन जब किसी कारण नाक से सांस लेना कठिन हो जाता है, तो शरीर मुंह से सांस लेना शुरू कर देता है।

लोग नाक की बजाय मुंह से सांस क्यों लेते हैं?

लोग कई कारणों से नाक की बजाय मुंह से सांस लेने लगते हैं। सबसे आम कारण नाक का बंद होना है, जो सर्दी-जुकाम, एलर्जी या साइनस की समस्या के कारण होता है, जिससे मुंह से सांस लेना आसान लगता है। इसके अलावा, नाक की बनावट में गड़बड़ी, जैसे टेढ़ा सेप्टम या नाक में पॉलीप्स होने से हवा का मार्ग रुक जाता है। कुछ लोगों में चेहरे या जबड़े की बनावट ऐसी होती है कि मुंह थोड़ा खुला रहता है, जिससे मुंह से सांस लेना आदत बन जाता है। बचपन में अंगूठा चूसने या मुंह खुला रखने जैसी आदतें भी इसे बढ़ावा दे सकती हैं। इसके अलावा, स्लीप एपनिया जैसी नींद संबंधी समस्या में, जिसमें सोते समय सांस रुक-रुक कर चलती है, व्यक्ति अनजाने में मुंह से सांस लेने लगता है।

मुंह से सांस लेने के नुकसान

मुंह का सूखापन और बदबू: लार मुंह को नम रखती है और बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकती है। मुंह से सांस लेने पर लार सूख जाती है, जिससे बदबू और संक्रमण का खतरा बढ़ता है।

दांत और मसूड़ों की बीमारियां: लार में मौजूद खनिज दांतों को मजबूत रखते हैं। सूखापन दांतों में कैविटी और मसूड़ों की सूजन का कारण बन सकता है।

नींद की खराब क्वालिटी: रात में मुंह से सांस लेने पर नींद अधूरी रहती है, जिससे दिन में थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी महसूस होती है।

बच्चों में ग्रोथ पर असर: लगातार मुंह से सांस लेने से चेहरे की हड्डियों की बनावट बदल सकती है और दांत टेढ़े-मेढ़े हो सकते हैं।

ब्रेन फॉग और थकान: मुंह से सांस लेने पर शरीर को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिलती, जिससे दिमाग ठीक से काम नहीं करता और व्यक्ति सुस्त महसूस करता है।

Disclaimer: यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है। हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। NEWSTRACK इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता इसकी पुष्टि नही करता है।

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Akriti Pandey

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Akriti Pandey is a journalist with more than three years of experience in the media industry. She holds a degree in Mass Communication and Journalism and specializes in writing on education, lifestyle, health, and astrology-related topics. Known for her reader-focused approach and engaging storytelling, Akriti is passionate about creating informative and accessible content. In her free time, she enjoys writing, sports, and traveling.

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