विश्व निमोनिया दिवस 2025 पर बाल जीवन रक्षा का आह्वान, केजीएमयू के डॉक्टरों ने बताएं रोकथाम के उपाय

World Pneumonia Day 2025: विश्व निमोनिया दिवस 2025 पर विशेषज्ञों ने कहा कि निमोनिया मानव जीवन के लिए एक गंभीर समस्या है, जो 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।

Newstrack Network
Published on: 12 Nov 2025 6:23 PM IST
विश्व निमोनिया दिवस 2025 पर बाल जीवन रक्षा का आह्वान, केजीएमयू के डॉक्टरों ने बताएं रोकथाम के उपाय
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World Pneumonia Day 2025: विश्व निमोनिया दिवस 2025 को बाल जीवन रक्षा के रूम में मनाया जा रहा है। इस अवसर पर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में प्रेस बातचीत के दौरान विशेषज्ञों ने निमोनिया को बच्चों में मृत्यु का एक प्रमुख संक्रामक कारण बताते हुए, इसकी रोकथाम, शीघ्र निदान और उपचार की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया है। विशेषज्ञों ने कहा कि निमोनिया मानव जीवन के लिए एक गंभीर समस्या है, जो 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।

टीकाकरण निमोनिया के विरुद्ध हथियार

डॉ वेद प्रकाश ने कहा कि प्रारंभिक निदान, टीकाकरण और शिक्षा निमोनिया के विरुद्ध हमारे सबसे मजबूत हथियार हैं। उन्होंने बताया कि आंकड़ों ने निमोनिया के गंभीर वैश्विक और राष्ट्रीय बोझ को उजागर किया है। यूनिसेफ के अनुसार दुनिया भर में हर 39 सेकंड में एक बच्चे की निमोनिया से मृत्यु हो जाती है। वर्ष 2019 में 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 6.10 लाख बच्चों की मृत्यु निमोनिया के कारण हुई थी। भारत में हर साल 5 साल से कम उम्र के बच्चों में गंभीर निमोनिया के लगभग 26 लाख मामले सामने आते हैं। अनुमान के अनुसार भारत में निमोनिया के इलाज से जुड़ी स्वास्थ्य देखभाल की लागत सालाना लगभग 3,000 करोड़ है।


भारतीय आबादी का 18 प्रतिशत हिस्सा

उत्तर प्रदेश में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की भारतीय आबादी का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है, लेकिन गंभीर निमोनिया के लगभग 24 प्रतिशत और निमोनिया से होने वाली मृत्यु का लगभग 26 प्रतिशत का योगदान करता है। एचएनआईएस (2022-23) के अनुसार प्रदेश में निमोनिया के कारण 1-5 वर्ष आयु वर्ग में 452 मृत्यु हुईं। विशेषज्ञों ने रोकथाम पर केंद्रित किया, जिसमें टीकाकरण, पर्याप्त पोषण और पर्यावरणीय जोखिमों का समाधान शामिल है। भारत सरकार ने 2017 से न्यूमोकोकल वैक्सीन (PSV) को यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया है। टाइप वी वैक्सीन और खसरे का टीका निमोनिया को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


वायरस निमोनिया के प्रमुख कारण

बैक्टीरिया और वायरस निमोनिया के प्रमुख कारण हैं। कुपोषण, पुरानी बीमारियां और वायु प्रदूषण निमोनिया के जोखिम को बढ़ाते हैं। अनुमान अनुसार कि ठोस ईंधन के उपयोग से होने वाला घरेलू वायु प्रदूषण 5 साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के लगभग 40 प्रतिशत मामलों में योगदान देता है। उपचार में एंटीबायोटिक्स, एंटीवायरल दवाएं और ऑक्सीजन थेरेपी शामिल है। केजीएमयू का पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग निमोनिया प्रबंधन में सबसे आगे रहा है। अत्याधुनिक श्वसन गहन चिकित्सा इकाई (RICU) और उन्नत सुविधाओं के साथ, विभाग गंभीर श्वसन संक्रमण वाले रोगियों को व्यापक देखभाल प्रदान करता है और जागरूकता अभियानों के माध्यम से जनता को शिक्षित करता है।

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