जामिया से जेल तक...अल-फलाह के मालिक जवाद अहमद सिद्दीकी का काला कारनामा आया सामने

फरीदाबाद का अल-फलाह स्कूल ऑफ़ मेडिकल साइंसेस दिल्ली धमाके के बाद कड़ी जांच के घेरे में है। इसके संस्थापक जवाद अहमद सिद्दीकी अपने संस्थान पर एनआईए की जांच के बढ़ते दबाव का सामना कर रहे हैं।

Shivam Shrivastava
Published on: 13 Nov 2025 5:39 PM IST (Updated on: 13 Nov 2025 6:17 PM IST)
जामिया से जेल तक...अल-फलाह के मालिक जवाद अहमद सिद्दीकी का काला कारनामा आया सामने
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अरबी शब्द ‘अल-फलाह’ का अर्थ है सफलता, समृद्धि और कल्याण। यही कारण था कि फरीदाबाद के एक मेडिकल कॉलेज का नाम अल-फलाह रखना जो पूरी तरह उपयुक्त था। 2019 में स्थापित, अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज छह वर्षों तक छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ के साथ सफलतापूर्वक संचालित होता रहा जब तक 10 नवम्बर को दिल्ली में धमाका नहीं हुआ।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी, और इसके मेडिकल कॉलेज के पीछे का व्यक्ति है जव्वाद अहमद सिद्दीकी। एक समय के व्याख्याता सिद्दीकी अब अल-फलाह ग्रुप ऑफ कंपनीज के तहत लगभग दर्जनभर उपक्रमों के संस्थापक और निदेशक बन चुके हैं। उनकी सफलता निर्विवाद है। और उनकी यूनिवर्सिटी में दाखिल हजारों छात्रों, खासकर मेडिकल के होनहारों के लिए, उनकी यात्रा इस बात का वादा लगती थी कि वे भी एक दिन सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

दिल्ली के लाल किले के बाहर हुए विस्फोट, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए, ने अल-फलाह ग्रुप को चर्चा में ला दिया है, वो भी गलत वजहों से। इस घटना ने यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है और इससे जुड़े सभी लोगों की छवि भी प्रभावित हुई है।

अगर उनकी यूनिवर्सिटी को दिल्ली धमाके के आतंकियों का अड्डा और उनके और भी खतरनाक साजिशों का केंद्र न बताया गया होता, तो कुलपति और संस्थापक जव्वाद अहमद सिद्दीकी शायद अपने आलीशान जामिया नगर स्थित अल-फलाह हाउस में अपना जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहे होते।

अब 61 वर्षीय जव्वाद अहमद सिद्दीकी का जन्म 15 नवंबर 1964 को हुआ था। वे तीन भाइयों में से एक हैं, उनके पिता का नाम हाम्माद अहमद सिद्दीकी है। सिद्दीकी का बचपन मध्यप्रदेश के महू में बीता जहाँ भीमराव अंबेडकर का जन्म हुआ था और जिसकी वजह से शहर का नाम बदल गया। सिद्दीकी के लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से औद्योगिक और उत्पाद डिजाइन में बीटेक किया। बाद में परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया।

एक पूर्व सहयोगी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि सिद्दीकी ने 1993 में जामिया मिलिया इस्लामिया में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के व्याख्याता के तौर पर काम शुरू किया। लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा उस साधारण प्रोढ़ कक्षा से कहीं आगे थी। जामिया में रहते हुए, उन्होंने कारोबारी प्रयास किए अपने भाई सऊद के साथ कई छोटे उद्यम शुरू किए। इन्हीं में एक था अल-फलाह इनवेस्टमेंट्स जिसकी वजह से दोनों भाइयों को तिहाड़ जेल में तीन साल बिताने पड़े।

जामिया से जेल तक

जामिया में पढ़ाते हुए, जव्वाद ने कुछ सहयोगियों को अपने व्यवसाय में निवेश करने के लिए राज़ी किया, शानदार मुनाफे का वादा किया। लेकिन जल्दी ही वे धोखाधड़ी, गबन और ठगी के आरोपों में फंस गए। 2000 में, केआर सिंह ने नई फ्रेंड्स कॉलोनी, दिल्ली में अल-फलाह इनवेस्टमेंट्स लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर (नंबर 43/2000) दर्ज करवाई। दिल्ली अपराध शाखा की आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरू की, जिसके बाद जव्वाद की गिरफ्तारी हुई। वे और उनके भाई तीन साल से अधिक जेल में रहे।

मार्च 2003 में, दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए लिखा कि आरोपों के अनुसार दिल्ली फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी ने पाया कि “निवेशकों के हस्ताक्षर जाली थे, जमाएं गैर-मौजूद कंपनियों के नाम पर की गई थीं, निवेशकों से प्राप्त बड़ी धनराशि पिटिशनर्स के व्यक्तिगत खातों में डाली गई और गलत तरीके से खर्च की गई।”

जव्वाद को फरवरी 2004 में जमानत मिली, और 2005 में पटियाला कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया लेकिन केवल तब, जब उन्होंने और उनके भाई ने ठगे गए निवेशकों को रकम वापस करने पर सहमति दी।

सूत्रों के अनुसार, अल-फलाह स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज की शुरुआत 2019 में अच्छी रही। लेकिन समय के साथ, कॉलेज में कश्मीरी डॉक्टरों की भर्ती बढ़ गई, मुख्यतः क्योंकि वे सस्ती सेवा देते थे। पहले से ही अल्पसंख्यक संचालित संस्थान होने के कारण, यह धरना अधिक रूढ़िवादी वातावरण की ओर बढ़ गया। प्रबंधन को जानकारी थी, लेकिन उसने अनदेखा किया।

वही सूत्र बताते हैं, कि डॉ शाहीन सईद जो दिल्ली धमाके के अगले दिन आतंकवादी मॉड्यूल से जुड़ी होने के आरोप में गिरफ्तार हुई अक्सर अपने सहयोगियों और छात्रों को अधिक कट्टर इस्लामिक तौर-तरीकों, जैसे हिजाब और बुर्का पहनने, के लिए प्रोत्साहित करती थीं। उन्हें इस तरह के व्यवहार के लिए आधिकारिक तौर पर चेतावनी भी दी गई थी।

कोविड-19 महामारी के दौरान, अल-फलाह की नर्सों ने आरोप लगाया था कि उच्च-जोखिम वाले माहौल में जीवन बीमा मांगने पर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। पिछले साल, मेडिकल इंटर्न्स ने कॉलेज की अव्यवस्थित अवस्थापना और वजीफे की अदायगी न होने पर विरोध किया, जिस वजह से उन्हें निलंबित कर दिया गया।

इन विवादों को जव्वाद शायद संभाल लेते, लेकिन मेडिकल कॉलेज के कई डॉक्टरों की आतंकवाद संबंधी आरोपों में गिरफ्तारी ने संस्थान को एनआईए की कठोर जांच के दायरे में ला दिया है।

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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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