नीतीश होंगे सत्ता से बाहर? NDA '160 पार' कहीं हो ना जाए फेल, PK ने पलट दिया पूरा खेल

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में NDA का 160 पार का लक्ष्य मुश्किल में, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने बदला राजनीतिक खेल, महिलाओं और युवाओं के वोट होंगे निर्णायक।

Harsh Srivastava
Published on: 6 Nov 2025 9:28 PM IST
नीतीश होंगे सत्ता से बाहर? NDA 160 पार कहीं हो ना जाए फेल, PK ने पलट दिया पूरा खेल
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Nitish Kumar Vs Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव का पहला चरण संपन्न हो चुका है और अब सबकी निगाहें दूसरे चरण और 14 नवंबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने इस बार '160 पार' का एक भव्य और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। यह लक्ष्य 243 सीटों वाली विधानसभा में लगभग दो-तिहाई बहुमत के बराबर है। सत्ता में वापसी की उम्मीद पाले NDA को लग रहा है कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार का फायदा उसे मिलेगा।

हालांकि, बिहार के जटिल राजनीतिक समीकरण, तीखे जातीय गणित और सबसे बड़े 'गेमचेंजर' माने जा रहे प्रशांत किशोर (PK) की जन सुराज पार्टी के निर्णायक उभार ने इस लक्ष्य की राह को उतना आसान नहीं छोड़ा है, जितना यह कागजों पर दिखता है। कई राजनीतिक पंडितों को यह लक्ष्य कुछ वैसा ही लग रहा है, जैसा हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का '400 पार' का नारा हुआ था, जो आखिरकार 293 सीटों पर थम गया था। क्या बिहार में भी NDA को जमीनी हकीकत से झटका लगने वाला है?

NDA की उम्मीदें बनाम जमीनी हकीकत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जैसे कद्दावर नेताओं ने इंडिया टुडे जैसे मंचों पर आत्मविश्वास से कहा है कि "स्थिति बहुत अच्छी है। हम बिहार में 160 से ज्यादा सीटें जीतेंगे।" यह दावा NDA के भीतर आत्मविश्वास को दर्शाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही संकेत दे रही है। साल 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में NDA ने महागठबंधन को बहुत मामूली अंतर से हराया था, जहाँ NDA को 125 सीटें मिली थीं, वहीं महागठबंधन ने 110 सीटें जीती थीं। अबकी बार जनता के बीच बेरोजगारी, पलायन और राज्य में विकास के ठहरने की बातों से एक स्पष्ट नाराजगी झलक रही है। मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि पिछली सरकारें उनकी मूलभूत समस्याओं का समाधान करने में विफल रही हैं, और यह सत्ता-विरोधी लहर (Anti-Incumbency) NDA के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

जन सुराज: समीकरण बिगाड़ने वाला नया फैक्टर

इस बार के चुनाव का सबसे दिलचस्प और अप्रत्याशित फैक्टर है चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) की जन सुराज पार्टी। PK ने इस बार सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं और दावा कर रहे हैं कि कम से कम 150 सीटों पर वे सीधी लड़ाई में हैं। जन सुराज का चुनावी एजेंडा पारंपरिक जातीय या धार्मिक मुद्दों से हटकर बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और क्लीन पॉल‍िट‍िक्स पर केंद्रित है। उनका यह फोकस सीधे तौर पर NDA और महागठबंधन, दोनों के पारंपरिक वोट शेयर को काटने की क्षमता रखता है। पटना और बेगूसराय जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जन सुराज की रैलियों में दिखी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि PK की पार्टी सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि एक गंभीर चुनौती बन चुकी है जो कई सीटों पर जीत-हार का फैसला कर सकती है।

जातीय गणित और महिला वोटर का निर्णायक फैक्टर

बिहार की राजनीति की धुरी आज भी जाति आधारित समीकरणों पर घूमती है। NDA ने इस बार अपने उम्मीदवारों में राजपूत और पिछड़ी जातियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया है, ताकि वह अपने मजबूत सामाजिक आधार को बरकरार रख सके। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अपने पुराने और भरोसेमंद यादव-मुस्लिम (M-Y) वोट बैंक पर निर्भरता बनाए हुए है, जबकि वह 'A to Z' यानी सभी वर्गों को साधने का प्रयास कर रही है। हालांकि, इस बार भी महिला वोटर्स निर्णायक भूमिका में हैं। साल 2020 में भी महिलाओं ने NDA को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। NDA ने इस बार 35 महिला उम्मीदवार उतारी हैं। वहीं, विपक्षी खेमे से तेजस्वी यादव ने जीविका दीदियों (महिला स्वयं सहायता समूह) के लिए ₹30,000 की नकद मदद का लुभावना वादा किया है, जो महिला वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने की एक बड़ी कोशिश है।

NDA की अंदरूनी खींचतान और पुरानी चुनौती

'160 पार' के लक्ष्य की राह में NDA की अंदरूनी खींचतान भी एक बड़ा रोड़ा है। सीट बंटवारे में BJP और जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 101-101 सीटें दी गई हैं, लेकिन चिराग पासवान की पार्टी LJP (RV) को 29 सीटें मिलना JDU को अखर रहा है। इसके अलावा, BJP के लिए 2024 लोकसभा चुनाव में जीती गई 68 विधानसभा क्षेत्रों को इस विधानसभा चुनाव में दोबारा अपने पक्ष में बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। कई सीटों पर असंतुष्ट नेताओं ने NDA के लिए मुश्किलें खड़ी की हैं। बिहार में किसी भी गठबंधन ने 200 सीट का आंकड़ा आखिरी बार 2010 में पार किया था, जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA ने 206 सीटें जीती थीं। 2015 में नीतीश ने RJD के साथ मिलकर 178 सीटें हासिल की थीं। यानि 160 पार का सपना देखना, 15 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराने जैसा है।

बेरोजगारी और युवाओं की कसौटी

राज्य में बेरोजगारी आज भी सबसे बड़ा और भावनात्मक मुद्दा है। NDA ने बेशक एक करोड़ नौकरियों का बड़ा वादा किया है, लेकिन जनता के मन में उस वादे पर भरोसा कम है। सोशल मीडिया पर चल रहे मीम्स और रील्स साफ दिखाते हैं कि युवा अब केवल खोखले वादों से ज्यादा ठोस काम देखना चाहते हैं। युवाओं की यही नाराजगी कई सीटों पर NDA के खिलाफ भारी पड़ सकती है। पहले चरण की 121 सीटों के लिए मतदान हो चुका है, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा। नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। अगर NDA 122 के जादुई आंकड़े को पार करता है तो नीतीश कुमार पांचवीं बार सत्ता में वापसी कर सकते हैं। लेकिन अगर वोटों का थोड़ा भी झुकाव हुआ और जन सुराज ने अपेक्षित वोट काटे, तो '160 पार' का लक्ष्य भी 400 पार की तरह एक अधूरा सपना बनकर रह सकता है।

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Harsh Srivastava

Former Content Writer Mail ID - newstrack@gmail.comharshsri764@gmail.com

Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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