Bihar Election 2025: बिहार में बदलाव की आहट, ऐतिहासिक चुनाव की ओर संकेत

Bihar Assembly Election 2025: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब पहले चरण में 121 विधानसभा सीटों पर 64.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

Neel Mani Lal
Published on: 7 Nov 2025 3:24 PM IST
Bihar Assembly Election 2025 Record Turnout Political Shift Analysis Report in Bihar Chunav Update
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Bihar Assembly Election 2025 Record Turnout Political Shift Analysis Report in Bihar Chunav Update

Bihar Assembly Election 2025: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब पहले चरण में 121 विधानसभा सीटों पर 64.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह राज्य के चुनावी इतिहास का अब तक का सबसे अधिक मतदान है। इस अप्रत्याशित सहभागिता ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। विश्लेषक इसे बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव या बड़े पुनर्संरचना की शुरुआत मान रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 2020 विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान 55.68 प्रतिशत था और इस बार करीब 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इस मतदान वृद्धि के पीछे मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी और युवाओं के नेतृत्व वाला सोशल मीडिया आधारित जागरूकता अभियान सबसे प्रमुख कारक रहे। विशेषकर ‘एक्स’ और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर मतदान को लेकर चलाया गया अभियान अत्यंत प्रभावी साबित हुआ।

चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो बिहार में अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों का आंकड़ा यह स्पष्ट संकेत देता है कि जब भी मतदान प्रतिशत में 5 प्रतिशत या उससे अधिक का उतार-चढ़ाव हुआ है, तब राजनीतिक सत्ता का समीकरण व्यापक रूप से बदला है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब मतदान बढ़ता है तो इसका अर्थ होता है कि “मौन मतदाता”—विशेषकर महिलाएं और पहली बार वोट देने वाले युवा—चुनाव की दिशा निर्धारित करने के लिए घरों से बाहर निकल रहे हैं। यहीं से अप्रत्याशित चुनावी परिणामों की पटकथा शुरू होती है।

ऐतिहासिक रूप से देखें तो 1967 में मतदान में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी और इसी के साथ कांग्रेस का लंबा शासन समाप्त हुआ। महामाया प्रसाद सिन्हा ने पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई और बिहार में गठबंधन राजनीति का दौर शुरू हुआ। 1980 में लगभग 6.8 प्रतिशत अधिक मतदान के बाद कांग्रेस जगन्नाथ मिश्र के नेतृत्व में फिर सत्ता में लौटी, हालांकि कुछ वर्षों में ही राजनीतिक अस्थिरता शुरू हो गई। 1990 में करीब 5.8 प्रतिशत की वृद्धि ने लालू प्रसाद यादव को उभार दिया और मंडल राजनीति का दौर शुरू हुआ, जिसने बिहार की सामाजिक संरचना को एक नई दिशा दी। फिर 2005 में मतदान में 16.1 प्रतिशत की भारी गिरावट आई और इसी के साथ आरजेडी के 15 वर्षों के शासन का अंत हुआ। नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली और बिहार में विकास की राजनीति का नया अध्याय आरंभ हुआ।

अब जब 2025 के चुनाव में मतदान का उत्साह इस स्तर तक पहुंच चुका है, तो सवाल यह है कि आगे क्या होगा? यदि यही ऊर्जा दूसरे और अंतिम चरण के मतदान तक कायम रहती है, जिसमें शेष 122 सीटें शामिल होंगी, तो विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार बड़े राजनीतिक पुनर्संरचना के मुहाने पर खड़ा है—चाहे सत्ता परिवर्तन हो या न हो। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखें, लेकिन जातीय समीकरण, युवाओं की मतदान प्रवृत्ति, महिलाओं का बढ़ता प्रभाव और गठबंधनों की राजनीति आने वाले समय में नए राजनीतिक ध्रुवों को जन्म दे सकती है। यह चुनाव सिर्फ जीत-हार तक सीमित नहीं है; बल्कि यह तय करेगा कि आने वाले दशक की राजनीतिक भाषा, एजेंडा और दिशा कौन निर्धारित करेगा। जैसे-जैसे मतगणना का दिन निकट आ रहा है, यह रिकॉर्ड तोड़ मतदान केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस बिहार की दस्तक है जो खुद को नए रूप में गढ़ने के लिए तैयार है।

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