चुनाव आयोग ने करवाई वोट चोरी!? RJD को मिले BJP से ज्यादा वोट फिर भी सीटें मिलीं 2/3 से कम

कल आये परिणाम में आरजेडी को सबसे अधिक वोट (22.9%) मिलने के बावजूद चुनाव में सफलता नहीं मिली। वहीं बीजेपी ने 20.17 प्रतिशत हासिल कर 91 सीटें जीतकर राजद को पीछे छोड़ दिया।

Shivam Shrivastava
Published on: 15 Nov 2025 1:00 PM IST (Updated on: 15 Nov 2025 1:18 PM IST)
चुनाव आयोग ने करवाई वोट चोरी!? RJD को मिले BJP से ज्यादा वोट फिर भी सीटें मिलीं 2/3 से कम
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राजनीति के गणित को नया मोड़ दे दिया है। इस बार मत प्रतिशत और सीटों का समीकरण बिल्कुल अलग कहानी कह रहा है। आरजेडी को जनता से सबसे ज्यादा वोट मिले, लेकिन सत्ता की राह उससे कोसों दूर रह गई। दूसरी तरफ, भाजपा और जदयू ने कम वोट शेयर के बावजूद गठबंधन और रणनीति के दम पर बहुमत की फिनिश लाइन पार कर ली। परिणामों की इस विसंगति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है क्या वोट प्रतिशत अब बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा ‘मिथक’ बन चुका है?

लेकिन ऐसा नहीं है वोट प्रतिशत सब कुछ नहीं होता, रणनीति, गठबंधन और सीट बंटवारा ही तय करते हैं कि बाजी किसके हाथ लगेगी। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत हासिल किया, लेकिन सीटों के मामले में भाजपा और जदयू दोनों उससे बहुत आगे निकल गए।

RJD को सबसे ज्यादा वोट, फिर भी कम सीटें

तेजस्वी यादव की अगुवाई में आरजेडी ने इस चुनाव में 143 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 22.9 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। दूसरी ओर, भाजपा ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा और 20.17 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि जदयू ने समान संख्या में सीटों पर 19.24 प्रतिशत वोट प्राप्त किए।

इसके बावजूद भाजपा ने 91 सीटें जीत लीं, जदयू को 85 और आरजेडी मात्र 25 सीटों पर सिमट गया। यानी, आरजेडी के पास सबसे बड़ा वोट शेयर था, मगर कम सीटों का “पैराडॉक्स” उसके लिए झटका साबित हुआ।

सीट बंटवारे और गठबंधन का असर

दरअसल, एनडीए (भाजपा, जदयू, लोजपा(राम विलास), हम और रालोसपा) का संयुक्त वोट शेयर 47.2 प्रतिशत रहा, जबकि महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वामदल, वीआईपी) का वोट शेयर 37.3 प्रतिशत पर सिमट गया। इसका सबसे बड़ा फायदा एनडीए को सीट रूपांतरण में मिला। भाजपा ने 101 में से 91 सीटें जीतकर 90 प्रतिशत का शानदार स्ट्राइक रेट बनाया, जबकि जदयू का स्ट्राइक रेट करीब 82 प्रतिशत रहा। वहीं, आरजेडी का स्ट्राइक रेट सिर्फ 19 प्रतिशत पर ठहरा।

सहयोगी दल बने कमजोर कड़ी

महागठबंधन की सबसे बड़ी कमजोरी उसके सहयोगी दल साबित हुए। कांग्रेस को 61 सीटों में से केवल 6 पर जीत मिली। वामदलों में सीपीआई(एमएल)एल को 2, सीपीआई(एम) को 1 सीट मिली जबकि सीपीआई का खाता भी नहीं खुला। मुकेश सहनी की वीआईपी ने 15 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाई। परिणामतः पूरा महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों तक सीमित रह गया।

आंकड़े बताते हैं असली कहानी

एनडीए के भीतर भाजपा ने सबसे ज्यादा 89 सीटों से योगदान दिया, जदयू ने 85, लोजपा(राम विलास) को 19, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 5 और रालोसपा को 4 सीटें मिलीं।

इन नतीजों ने साफ कर दिया कि बिहार की राजनीति में सीट बंटवारे और आपसी तालमेल की समझ ही असली शक्ति है। RJD मतों के लिहाज से नंबर वन तो रही, लेकिन संगठनात्मक समन्वय और वोट ट्रांसफर की कमी ने उसकी मेहनत पर पानी फेर दिया।

नतीजों का राजनीतिक संदेश

तेजस्वी यादव के लिए यह नतीजा दोहरी चुनौती है। एक ओर पार्टी का वोट आधार स्थिर और मजबूत दिखता है, दूसरी ओर सीटों में गिरावट संगठनात्मक और गठबंधन रणनीति की नाकामी दिखाती है। इस चुनाव ने यह सिद्ध कर दिया कि बिहार में आंकड़े नहीं, संगठन और एकजुट रणनीति तय करते हैं कि सत्ता की कुर्सी किसके हिस्से में आएगी।

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Shivam Shrivastava
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Shivam Shrivastava

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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