कोविड की हो रही वापसी? फिर से बढ़ने लगे केसेस, जानें अब तक कौन-कौन से वैरिएंट्स ने दी दस्तक और सबसे ज्यादा खतरनाक कौन

Coronavirus New Verient Cases: कोविड-19 की शुरुआत 2019 के अंत में चीन के वुहान शहर से हुई। उस समय यह सिर्फ एक रहस्यमय निमोनिया जैसा संक्रमण था।

Harsh Srivastava
Published on: 29 May 2025 1:41 PM IST
Coronavirus New Verient Cases in India
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Coronavirus New Verient Cases in India

Coronavirus New Verient Cases: दुनिया जब-जब चैन की नींद सोने लगती है, कोई पुराना डर दस्तक देता है। कुछ ऐसा ही फिर से हो रहा है। कोविड-19, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था, अब एक बार फिर अपने पांव पसार रहा है। मास्क जो अलमारी में बंद हो गए थे, अब फिर से जेबों में लौटने लगे हैं। सैनिटाइज़र की खुशबू जो भूल चुके थे, वो फिर से हवा में घुलने लगी है। सोशल मीडिया पर कोविड की खबरें ट्रेंड करने लगी हैं, अस्पतालों में चहल-पहल बढ़ने लगी है और एक बार फिर आम आदमी की धड़कनें तेज़ हो रही हैं। इस बार डर पुराना है, पर हालात थोड़े नए। अब हमारे पास टीके हैं, अनुभव है, पर कोरोना भी हर बार नया चेहरा लेकर सामने आया है। हर वेरिएंट ने एक नई चुनौती दी, एक नया संकट खड़ा किया। तो अब सवाल ये है कि अब तक कौन-कौन से वेरिएंट्स ने दस्तक दी, किसने कितना कहर बरपाया और सबसे खतरनाक कौन रहा? और जब हम यह सब समझ ही चुके थे, तो अचानक फिर क्यों बढ़ रहे हैं कोविड के मामले?आइए इस वायरस की कहानी को फिर से पलटते हैं, उन वेरिएंट्स की परतें खोलते हैं जिनकी वजह से पूरी दुनिया थम गई थी।

वुहान से शुरू होकर पूरी दुनिया में फैल गया मौत का साया

कोविड-19 की शुरुआत 2019 के अंत में चीन के वुहान शहर से हुई। उस समय यह सिर्फ एक रहस्यमय निमोनिया जैसा संक्रमण था। फिर धीरे-धीरे यह वायरस इंसान से इंसान में फैलता गया और मार्च 2020 में WHO ने इसे एक वैश्विक महामारी घोषित कर दिया। लेकिन असली चुनौती तब शुरू हुई जब इस वायरस ने अपने रूप बदलने शुरू किए। वैज्ञानिकों ने इन्हें ‘वेरिएंट्स’यकहा हर बार एक नया रूप, नई रफ्तार, और नया खतरा।

अल्फा: ब्रिटेन से निकला पहला बड़ा वेरिएंट

2020 के आखिरी महीनों में अल्फा वेरिएंट (B.1.1.7) सामने आया। यह वेरिएंट ब्रिटेन में तेजी से फैल रहा था और बहुत संक्रामक था। यह पहले के वायरस की तुलना में लगभग 50% ज्यादा तेजी से फैलता था। इसकी वजह से कई देशों ने दोबारा लॉकडाउन का सहारा लिया। भारत में भी इसके मामले सामने आए और हेल्थ सिस्टम पर दबाव बढ़ने लगा।

डेल्टा: भारत में तबाही का दूसरा नाम

फिर आया डेल्टा वेरिएंट (B.1.617.2), जिसे आज भी सबसे घातक और जानलेवा वेरिएंट माना जाता है। 2021 की दूसरी लहर में भारत ने जो तबाही देखी, उसका कारण यही डेल्टा था। ऑक्सीजन की किल्लत, अस्पतालों में बेड्स की कमी, श्मशानों में लगी कतारें यह सब इस वेरिएंट की मार थी। डेल्टा 2 गुना तेजी से फैलता था और कई बार RT-PCR टेस्ट में भी पकड़ में नहीं आता था। इसने न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका, यूके और कई यूरोपीय देशों को भी झकझोर दिया।

ओमिक्रॉन: तेजी से फैलने वाला, पर थोड़ा कम घातक

2021 के अंत में ओमिक्रॉन (B.1.1.529) सामने आया इसका मुख्य स्वरूप दक्षिण अफ्रीका से मिला। यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला वेरिएंट साबित हुआ। इसका एक राहत देने वाला पक्ष यह था कि यह तुलनात्मक रूप से कम गंभीर लक्षण पैदा करता था। हालांकि, इसकी सब-वेरिएंट्स की संख्या बढ़ती गई BA.1, BA.2, BA.5, XBB.1.5 और अब JN.1 और इन सभी ने दुनिया भर में केसों की संख्या बढ़ाई, हालांकि अस्पतालों में भर्ती और मौतें सीमित रहीं।

सबसे खतरनाक कौन? डेल्टा का आतंक आज भी जेहन में

अगर बात सबसे जानलेवा वेरिएंट की करें तो डेल्टा को अब भी सबसे खतरनाक माना जाता है। इसकी वजह से भारत में लाखों लोगों ने जान गंवाईं और यह वेरिएंट दुनिया भर में एक रेड अलर्ट की तरह फैल गया था। दूसरी ओर, ओमिक्रॉन की संक्रमण दर तो ज्यादा थी, पर यह कम गंभीर था। इसके बावजूद इसने इतनी तेजी से फैलाव किया कि पूरी दुनिया में टीकाकरण अभियान को तेज करना पड़ा।

अचानक क्यों बढ़ रहे हैं फिर से कोविड केस

पिछले कुछ हफ्तों से दुनिया के कई हिस्सों जैसे अमेरिका, यूरोप और अब भारत में कोविड के मामलों में फिर से तेजी देखी जा रही है। इसके पीछे ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट्स, जैसे कि JN.1 और KP.2, माने जा रहे हैं। ये वेरिएंट्स वायरस को फिर से छलांग लगाने का मौका दे रहे हैं। इन सब-वेरिएंट्स की खास बात यह है कि ये टीकों से बनी प्रतिरक्षा को आंशिक रूप से चकमा दे सकते हैं और पहले संक्रमण से बनी इम्युनिटी को भी बायपास कर सकते हैं। हालांकि, फिलहाल अस्पताल में भर्ती होने और मौतों की संख्या सीमित है, लेकिन रिस्क बना हुआ है, खासकर बुज़ुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए।

क्या हमें फिर से डरना चाहिए या सिर्फ सतर्क रहना होगा

यह सवाल अब हर किसी के मन में है। क्या फिर से लॉकडाउन की नौबत आएगी? क्या स्कूल-कॉलेज फिर से ऑनलाइन होंगे? क्या मास्क फिर से अनिवार्य होगा? फिलहाल हालात उतने गंभीर नहीं हैं, पर सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हम टेस्टिंग, ट्रैकिंग, मास्किंग और टीकाकरण को जारी रखें, तो हम इस बार बड़ी लहर से बच सकते हैं।

वैक्सीन और बूस्टर की भूमिका

अब तक दुनिया की बड़ी आबादी को वैक्सीन की दो डोज़ मिल चुकी हैं और कई लोगों ने बूस्टर डोज भी लगवाए हैं। लेकिन वायरस बदल रहा है, और इसलिए वैक्सीन को भी अपडेट किया जा रहा है। नई वैक्सीन, खासकर जो ओमिक्रॉन-स्ट्रेन के लिए डिजाइन की गई हैं, अब कई देशों में उपलब्ध हैं। भारत में भी नए बूस्टर डोज़ की तैयारी चल रही है। जो लोग हाई रिस्क कैटेगरी में आते हैं, उन्हें सलाह दी जा रही है कि वे बूस्टर जरूर लगवाएं।

कोरोना गया नहीं, बस छिप गया था

कोविड-19 एक ऐसी कहानी बन गया है जो बार-बार लौटती है, हर बार एक नए अध्याय के साथ। हमें इसे अब ‘नया सामान्य’ मान लेना चाहिए जैसे फ्लू साल में आता है, वैसे ही कोविड भी वक़्त-बेवक़्त लौट सकता है। इसलिए घबराने की ज़रूरत नहीं। लेकिन लापरवाही की कोई जगह नहीं। मास्क, हाथ धोना, भीड़ से बचना और वैक्सीन लेना ये आज भी हमारी सुरक्षा की पहली पंक्ति हैं। कोरोना भले ही पुराना हो गया हो, पर उसका रंग-रूप अब भी बदलता रहता है। और जब तक यह पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक हमें हर नए वेरिएंट से चौकन्ना रहना होगा।

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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