सोने की कीमतें आसमान छूने के बावजूद क्यों बढ़ी डिमांड? BBC रिपोर्ट में पता चला कब होगा सस्ता?

Gold Rates: सोने के बढ़ते दामों के बीच जानिए कब तक सस्ता हो सकता है...

Snigdha Singh
Published on: 14 Oct 2025 2:21 PM IST
सोने की कीमतें आसमान छूने के बावजूद क्यों बढ़ी डिमांड? BBC रिपोर्ट में पता चला कब होगा सस्ता?
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Gold Rates: सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं, फिर भी बाजार में इसकी मांग थमने का नाम नहीं ले रही। सोना खरीदने की होड़ सिर्फ भारत में नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर देखी जा रही है। सवाल ये है कि जब कीमतें इतनी ज्यादा हैं, तो लोग इसमें निवेश क्यों कर रहे हैं? क्या वाकई फिजिकल गोल्ड की डिमांड बढ़ी है या डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इसकी चमक को और बढ़ाया है?

बीबीसी की एक ताजा रिपोर्ट और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के आंकड़ों के आधार पर हम इस विस्तृत रिपोर्ट में सोने की मौजूदा स्थिति, कारण, जोखिम और भविष्य की संभावनाओं को तथ्यों के साथ समझते हैं।

कीमतें रिकॉर्ड पर, डिमांड भी रिकॉर्ड पर

2025 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में रिकॉर्ड 26 अरब डॉलर का वैश्विक निवेश हुआ। यानी कीमतों के बढ़ने के बावजूद निवेशकों का भरोसा डगमगाया नहीं बल्कि और मजबूत हुआ। भारत में अकेले 902 मिलियन डॉलर (लगभग 8000 करोड़) का निवेश हुआ। अमेरिका में16 बिलियन और यूरोप में करीब 8 बिलियन का निवेश गोल्ड ईटीएफ में दर्ज हुआ। एशिया में चीन और जापान टॉप निवेशकों में शामिल रहे।

गोल्ड ETF क्या है और क्यों हो रहा है इसमें निवेश?

गोल्ड ईटीएफ (Gold Exchange Traded Fund) एक डिजिटल फॉर्म में सोना होता है, जो स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होता है। यह 99.5 प्रतिशत शुद्ध सोने की कीमत को ट्रैक करता है। हर यूनिट लगभग 1 ग्राम सोने के बराबर होती है। निवेश के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है। इसे कभी भी बेचा और खरीदा जा सकता है। फायदा यह है कि जिन्हें फिजिकल गोल्ड की सिक्योरिटी, पॉलिशिंग, मेकिंग चार्ज जैसी झंझटें नहीं चाहिए वे ईटीएफ को तरजीह दे रहे हैं।

सिर्फ आम निवेशक नहीं, सेंट्रल बैंक भी खरीद रहे हैं सोना

WGC के मुताबिक अगस्त 2025 में दुनियाभर के सेंट्रल बैंकों ने 15 टन सोना खरीदा। कज़ाख़स्तान, बुल्गारिया, अल सल्वाडोर जैसे देश टॉप बायर्स में शामिल। भारत, चीन, क़तर जैसे बड़े देश भी लगातार रिज़र्व बढ़ा रहे हैं।

दिसंबर 2024 तक गोल्ड रिज़र्व (टॉप 5):

देश

गोल्ड रिज़र्व (टन)

अमेरिका

8133

जर्मनी

3351

इटली

2451

फ्रांस

2436

चीन

2280

भारत

876 (7वें स्थान पर)

क्यों खरीद रहे हैं सेंट्रल बैंक?

डॉलर की कमजोरी

वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता

ब्याज दरों में संभावित कटौती

मुद्रा संकट से बचाव के लिए गोल्ड ‘बैकअप एसेट’

राजनीतिक और आर्थिक तनाव ने बढ़ाया भरोसा

गोल्ड के इस उछाल के पीछे आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता की बड़ी भूमिका है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब भी जारी है। इसके अलावा मध्य-पूर्व में तनाव, अमेरिका में शटडाउन और डॉलर में गिरावट, फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती और शेयर बाजारों में अस्थिरता बढ़ते दामों का कारण है। नतीजन निवेशकों को सुरक्षित विकल्प चाहिए और सोना उन्हें सबसे भरोसेमंद लग रहा है।

क्या गोल्ड ने कभी धोखा दिया है?

गोल्ड को लेकर दीवानगी है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि इसने कभी नुकसान नहीं दिया। पिछले 20 सालों में सिर्फ़ 4 साल ऐसे रहे जब कीमतें गिरीं हैं। 2013 में 4.5 प्रतिशत, 2014 में 7.9 फीसदी, 2015 में 6.65 फीसदी और 2021 में 4.21 प्रतिशत गिरावट रही। लेकिन नुकसान सीमित रहा है और लॉन्ग टर्म में सोने ने अब तक निवेशकों को धोखा नहीं दिया।

आगे क्या होगा? कीमतें और बढ़ेंगी या गिरेंगी?

गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के मध्य तक कीमतों में 6 फीसदी और इजाफा हो सकता है। हालाँकि यह अनुमान है लेकिन जो ट्रेंड है, वह बताता है कि दुनियाभर में डिमांड बनी रहेगी और ग्लोबल अनिश्चितता बनी रहेगी। निवेशक सोने को ‘इंश्योरेंस’ की तरह देख रहे हैं।

गोल्ड का क्रेज़ क्यों बरकरार है?

डॉलर की कमजोरी और वैश्विक तनाव

गोल्ड को सुरक्षित निवेश विकल्प मानना

गोल्ड ईटीएफ जैसे आसान डिजिटल विकल्प

सेंट्रल बैंकों का लगातार सोना खरीदना

शेयर बाजार में अस्थिरता से बचने का उपाय

इसका मतलब ये नहीं कि हर समय सोने में निवेश फायदेमंद ही हो, लेकिन मौजूदा हालात में यह ‘कम रिस्क’ वाले विकल्पों में सबसे ऊपर बना हुआ है।

आपके लिए क्या मतलब है?

अगर आप निवेश की सोच रहे हैं तो सोना एक डायवर्सिफिकेशन टूल के रूप में आज भी अच्छा विकल्प है, लेकिन लॉन्ग टर्म के नजरिए से सोचें और डिजिटल विकल्पों (जैसे ETF या गोल्ड म्यूचुअल फंड) पर विचार करें। पूरे पोर्टफोलियो में 10-15 फीसदी से अधिक गोल्ड में निवेश न करें।

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Hi! I am Snigdha Singh, Leadership role in Newstrack. Leading the editorial desk team with ideation and news selection and also contributes with special articles and features as well. I started my journey in journalism in 2017 and has worked with leading publications such as Jagran, Hindustan and Rajasthan Patrika and served in Kanpur, Lucknow, Noida and Delhi during my journalistic pursuits.

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