'हिंदू आतंकवाद' का प्रोपेगेंडा फेल, NIA कोर्ट के फैसले ने कांग्रेस के झूठे नैरेटिव की खोली पोल

NIA कोर्ट के फैसले ने कांग्रेस के 'हिंदू आतंकवाद' वाले प्रोपेगेंडा की पोल खोल दी है। सालों पुरानी साजिश और राजनीतिक एजेंडा अब पूरी तरह बेनकाब हो गया है।

Shivam Shrivastava
Published on: 31 July 2025 7:09 PM IST (Updated on: 31 July 2025 7:49 PM IST)
हिंदू आतंकवाद का प्रोपेगेंडा फेल, NIA कोर्ट के फैसले ने कांग्रेस के झूठे नैरेटिव की खोली पोल
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NIA कोर्ट के ताजा फैसले ने एक बार फिर उस कथित ‘हिंदू आतंकवाद’ के नैरेटिव को झूठला दिया है जिसे कांग्रेस शासन के दौरान गढ़ा और फैलाया गया था। यह कोई अकेली घटना नहीं है बल्कि वर्षों तक चली एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा रही है। जिसमें विशेष रूप से हिंदू संगठनों और व्यक्तियों को बदनाम किया गया।

कैसे रची गई 'हिंदू आतंकवाद' की कहानी?

यह कोई सामान्य राजनीतिक विमर्श नहीं था बल्कि एक सुनियोजित साजिश थी। जिसमें भारत के बहुसंख्यक समुदाय को आतंकी रूप में पेश करने की कोशिश की गई।

2006 | मालेगांव विस्फोट

• शुरुआती जांच में आरोप SIMI पर लगे थे।

• बाद में ATS ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित को गिरफ्तार किया।

• ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द पहली बार जोर-शोर से प्रचारित हुआ।

• फैसला: दोनों को कोर्ट ने बरी कर दिया।

2007 | समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट

• शुरुआती सुराग लश्कर-ए-तैयबा और ISI की ओर इशारा कर रहे थे।

• बाद में कुछ हिंदू नामों को जोड़कर 'भगवा आतंक' की थ्योरी गढ़ी गई।

• फैसला: सभी आरोपी बरी, पाकिस्तानी लिंक की पुष्टि हुई।

2007 | अजमेर दरगाह विस्फोट

• पहले शक इस्लामिक समूहों पर गया था।

• बाद में RSS से जुड़े नामों को गिरफ्तार किया गया।

• फैसला: कोई पुख्ता लिंक साबित नहीं हुआ।

2008 | मक्का मस्जिद विस्फोट

• प्रारंभिक जांच में जिहादी संगठनों पर शक था।

• बाद में जांच का रुख मोड़कर हिंदू समूहों की ओर कर दिया गया।

• फैसला: सभी आरोपी बरी कर दिए गए।

2008 | 26/11 मुंबई हमले

• पाकिस्तान के आतंकियों की संलिप्तता स्पष्ट थी।

• फिर भी कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने RSS साजिश की थ्योरी को बढ़ावा दिया और एक किताब का समर्थन किया जिसमें यही दावा किया गया था।

कांग्रेस की तरफ से खड़ा किया ‘हिंदू आतंकवाद’ का नैरिटेव

2010 में विकीलीक्स द्वारा जारी अमेरिकी केबल्स में यह खुलासा हुआ कि राहुल गांधी ने अमेरिकी राजदूत से कहा था कि हिंदू संगठन इस्लामी आतंकवाद से भी बड़ा खतरा हैं। इस बयान ने कांग्रेस के सोच और रणनीति को पूरी तरह उजागर कर दिया।

2011 में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने आधिकारिक तौर पर ‘सैफ्रन टेरर’ शब्द का उपयोग किया जिससे इस झूठे नैरेटिव को सरकारी समर्थन भी मिला। यह महज एक शब्द नहीं था, बल्कि एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने और देश के बहुसंख्यक वर्ग को आतंक से जोड़ने का प्रयास था।

इन मामलों में कोर्ट के फैसलों ने यह साबित कर दिया कि इन आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं थे। सभी आरोपित केस दर केस बरी होते गए और अदालतों ने स्पष्ट रूप से कहा कि इन पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके।

अब यह सवाल उठता है कि क्या इन झूठे केसों में फंसाए गए लोगों को कभी इंसाफ मिलेगा? क्या इस साजिश को गढ़ने वालों से कभी जवाबदेही ली जाएगी? और क्या देश में एक बार फिर राजनीतिक लाभ के लिए धर्म के आधार पर नफरत फैलाने की कोशिशें होंगी?

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Shivam Shrivastava

Former Content Writer Mail ID - shivam09231@gmail.comshivam09231@gmail.com

शिवम उत्तर प्रदेश के एक युवा और उभरते पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 4 वर्षों का अनुभव प्राप्त है। वे राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और हाइपरलोकल खबरों की गहरी समझ रखते हैं और समसामयिक मुद्दों पर सटीक व प्रभावशाली रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं। उनकी विशेष रुचि डाटा-ड्रिवन पत्रकारिता और विश्लेषणात्मक रिपोर्टिंग में है, जिससे उनकी खबरें अधिक तथ्यात्मक और विश्वसनीय बनती हैं। वे जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग के साथ-साथ डिजिटल मीडिया के बदलते स्वरूप को भी समझते हैं। लेखन और रिसर्च में उनकी मजबूत पकड़ उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।

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