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क्या टूट रहा बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन? महाराष्ट्र में बड़ी हलचल, कैबिनेट से गायब रहे शिंदे के मंत्री
Maharashtra Politics: सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट बहिष्कार के पीछे मुख्य कारण स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर चल रही खींचतान है। शिवसेना के मंत्रियों का गुस्सा बीजेपी द्वारा अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल करने को लेकर है।
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सत्ताधारी महायुति (बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) में सब कुछ ठीक नहीं है। अंदरूनी कलह और वर्चस्व की लड़ाई खुले मंच पर आ गई है। सोमवार को कैबिनेट बैठक में शिवसेना (शिंदे गुट) के अधिकांश मंत्रियों की गैरहाजिरी ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यह अनुपस्थिति मात्र संयोग नहीं, बल्कि बीजेपी के खिलाफ बढ़ी हुई नाराजगी का संकेत है।
बीजेपी में प्रवेश की राजनीति
सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट बहिष्कार के पीछे मुख्य कारण स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर चल रही खींचतान है। शिवसेना के मंत्रियों का गुस्सा बीजेपी द्वारा अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को बीजेपी में शामिल करने को लेकर है। उनके आरोप अनुसार बीजेपी, गठबंधन धर्म को ताक पर रखकर, उनके वर्चस्व को चुनौती दे रही है। यह सीधा टकराव आगामी चुनावों में सीट बंटवारे पर वर्चस्व बनाए रखने की शिंदे गुट की कोशिशों से जुड़ा है।
देवेंद्र फडणवीस का पलटवार
कैबिनेट बैठक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मंत्री संजय शिरसाठ ही शामिल हुए, जबकि बाकी मंत्री मंत्रालय पहुंचने के बावजूद कैबिनेट हॉल से दूर रहे। नाराज मंत्रियों ने कैबिनेट खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और अपनी नाराजगी व्यक्त की है। फडणवीस का रुख सख्त और दो-टूक था। उन्होंने शिवसेना के आरोपों पर पलटवार करते हुए उल्हासनगर की घटना का जिक्र किया है।
महायुति के भविष्य पर बड़ा सवाल
आप करेंगे तो ठीक और बीजेपी करेगी तो गलत ऐसा नहीं चलेगा। उल्हासनगर में शुरुआत आप लोगों ने ही की थी। अब से दोनों पार्टियां एक-दूसरे के कार्यकर्ताओं को प्रवेश न दें। इस नियम का पालन दोनों पक्षों को करना होगा। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि गठबंधन धर्म की जिम्मेदारी दोनों पार्टियों की है, एकतरफा दबाव की राजनीति नहीं चलेगी। इस घटना के बाद गठबंधन के भीतर की दरारें सतह पर आ गई हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति पर निगाहें
स्थानीय निकाय चुनाव जैसे महत्वपूर्ण पड़ाव से पहले मनमुटाव महायुति के लिए भारी मुश्किलें पैदा कर सकता है। बीजेपी अपने सहयोगी को मना पाएगी, या यह खाई इतनी गहरी हो जाएगी कि गठबंधन में अलगाव हो जाए? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार शिंदे गुट दबाव तंत्र का इस्तेमाल कर रहा है। अभ देखना होगा कि यह 'दबाव की राजनीति' गठबंधन की एकजुटता को कितनी देर तक बनाए रखती है।


