भगवा आतंक की झूठी कहानी! मोहन भागवत को जेल भेजने की थी तैयारी – कांग्रेस की साजिश पर NIA अफसर का सनसनीखेज दावा

Malegaon Blast 2008: मालेगांव ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा! पूर्व ATS अधिकारी ने बताया कि मोहन भागवत को फंसाने के लिए बनाया गया था 'भगवा आतंक' का झूठा नैरेटिव।

Harsh Sharma
Published on: 1 Aug 2025 10:13 AM IST
Malegaon Blast 2008
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Malegaon Blast 2008

Malegaon Blast 2008: महाराष्ट्र के मालेगांव में साल 2008 में हुए बम धमाके के मामले में गुरुवार को NIA की स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया है। करीब 17 साल चले इस केस पर अब हर तरफ चर्चा हो रही है। इस बीच एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। मालेगांव ब्लास्ट की जांच कर चुके महाराष्ट्र ATS के एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा है कि जांच के दौरान उन पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करने का दबाव डाला गया था। पूर्व अधिकारी ने कहा , "हम पर राजनीतिक दबाव था कि हम आरएसएस चीफ को भी इस केस में घसीटें। लेकिन हमारे पास ऐसा कोई सबूत नहीं था, इसलिए हमने मना कर दिया। यह खुलासा ऐसे समय पर आया है जब कोर्ट का फैसला सामने आ चुका है और सभी आरोपी बरी हो चुके हैं। अब इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है।

मालेगांव केस पर पूर्व इंस्पेक्टर का सनसनीखेज दावा

मालेगांव ब्लास्ट केस में कोर्ट के 17 साल बाद दिए फैसले ने सबको चौंका दिया है। सभी 7 आरोपी, जिनमें साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित शामिल थे, बाइज्ज़त बरी कर दिए गए हैं। लेकिन असली बवाल तब शुरू हुआ, जब जांच टीम का हिस्सा रहे एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने बड़ा खुलासा कर दिया।

कौन हैं ये अफसर और क्या बोले?

इनका नाम है महबूब मुजावर। कभी महाराष्ट्र ATS में इंस्पेक्टर थे और मालेगांव ब्लास्ट की शुरुआती जांच में शामिल थे। सोलापुर में पत्रकारों से बात करते हुए मुजावर ने कहा, "मुझे कहा गया था कि मैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को गिरफ्तार करूं।" उन्होंने साफ शब्दों में आरोप लगाया कि उन्हें ऐसा इसलिए कहा गया था ताकि भगवा आतंकवाद की एक कहानी गढ़ी जा सके।

फर्जी जांच, फर्जी अधिकारी – कोर्ट ने खोल दी पोल

मुजावर का दावा है कि कोर्ट के फैसले ने उस झूठी कहानी की सच्चाई सामने ला दी, जो उस वक्त की गई जांच में रची गई थी। उन्होंने कहा, “इस फैसले ने उस फर्जी जांच की पोल खोल दी है, जिसे एक नकली अधिकारी ने अपनी सोच से चलाया था। शुरुआत में ATS ने केस को संभाला था, लेकिन बाद में इसे NIA ने ले लिया।”

मुजावर को क्या-क्या आदेश दिए गए थे?

मुजावर बताते हैं कि 2008 के धमाके में जब वह ATS टीम का हिस्सा थे, तब उन्हें कई चौंकाने वाले नामों पर ‘कार्रवाई’ करने के लिए कहा गया। इनमें राम कलसांगरा, संदीप डांगे, दिलीप पाटीदार और मोहन भागवत जैसे नाम शामिल थे। “मुझे इन लोगों पर गोपनीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए, लेकिन ये सब ऐसे आदेश थे जिन्हें निभाना मुमकिन नहीं था। और सच्चाई भी नहीं थी,” उन्होंने कहा।

मैंने भागवत को नहीं पकड़ा, तो मुझे फंसाया गया

महबूब मुजावर ने आगे बताया कि उन्होंने आदेश मानने से इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें सच्चाई का अहसास हो चुका था। “मैं जानता था कि ये सब फर्जी है। भागवत जैसे बड़े नेता को पकड़ना न तो जायज था और न ही मेरे अधिकार क्षेत्र में था। मैंने इनकार किया तो मेरे खिलाफ झूठा केस बना दिया गया और मेरा पूरा करियर तबाह कर दिया गया।” उन्होंने साफ कहा, ना कोई भगवा आतंकवाद था, ना सबूत। सब कुछ एक मनगढ़ंत कहानी थी।

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Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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