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बिहार में मायावती ने भरी हुंकार, गठबंधन को लेकर दिया बड़ा अपडेट, कांग्रेस-BJP पर जमकर बरसी
Mayawati Bihar election: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच मायावती ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया। भभुआ रैली में उन्होंने कहा कि बसपा गरीबों के हक के लिए अकेले चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस और बीजेपी पर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला।
Mayawati Bihar election speech: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को गठबंधन और भावी राजनीति को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। भभुआ में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने स्पष्ट किया कि बसपा गरीबों के हक के लिए चुनाव लड़कर सत्ता में आना चाहती है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि यदि चुनाव में उनके विधायकों की संख्या अच्छी रही, तो पार्टी शर्तों के आधार पर सत्ता में शामिल होकर अपने लोगों का विकास करेगी। यह बयान तब आया है जब मायावती की बसपा बिहार चुनाव में अकेले मैदान में उतरी है और विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।
कांग्रेस-भाजपा पर हमला: 'दोनों ही आरक्षण विरोधी'
भभुआ के हवाई अड्डा मैदान में जनसभा को संबोधित करते हुए मायावती हमलावर मूड में दिखीं और उन्होंने कांग्रेस व भाजपा दोनों को 'दलित विरोधी' बताया। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी भले ही संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, लेकिन उनकी पार्टी की सरकार बाबा साहब अंबेडकर को भारत रत्न का सम्मान नहीं दे सकी। उन्होंने 2024 में राहुल गांधी द्वारा विदेश में आरक्षण खत्म करने के ऐलान का भी आरोप लगाया। मायावती ने भाजपा को भी आरक्षण विरोधी बताते हुए कहा कि उनकी सरकार में संसद में आरक्षण देने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन इस पर काम नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवादी सरकारें आरक्षण को हटाने का काम कर रही हैं और क्रीमिलेयर को आरक्षण नहीं दे रही हैं। बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में गरीबों को आरक्षण का संवैधानिक अधिकार मिला है और इसे लागू कराने के लिए बसपा गरीबों के पक्ष में खड़ी रहेगी।
बिहारी पलायन और शोषण: सरकारों पर निशाना
मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों पर मेहनतकश लोगों का विकास न करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिहारी पलायन कर रहे हैं और जहाँ वे काम करते हैं, वहाँ भी उनका शोषण होता है। गरीब, दलित एवं आदिवासियों को बाबा साहब के संविधान में दिए गए आरक्षण का केंद्र सरकार द्वारा लाभ नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद केंद्र में रही कांग्रेस, भाजपा व अन्य दलों की सरकारें पूंजीवादी सोच के कारण पिछड़े लोगों का सामाजिक व आर्थिक विकास नहीं कर सकीं। मायावती ने कहा कि इन दलित विरोधी पार्टियों को सत्ता में आने से रोकना है और इसलिए इस बार के चुनाव में वोट को बिखरने नहीं देना है।
एकजुटता की अपील: 'अकेले लड़ने का मतलब'
मायावती ने यह स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी बिहार में अकेले चुनाव लड़ रही है क्योंकि दलित व शोषित वर्ग का ज्यादा वोट दूसरी पार्टी को मिल जा रहा है, जिससे बसपा के उम्मीदवार हार जा रहे हैं। उन्होंने भभुआ, चैनपुर, मोहनियां, रामगढ़ और चेनारी विधानसभा क्षेत्रों के बसपा प्रत्याशियों को जिताने की आमजनों से अपील की ताकि वोटों को एकजुट रखा जा सके। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने यूपी में चार बार सरकार बनाकर विरोधियों के षडयंत्र को पूरा नहीं होने दिया और यूपी में फिर बसपा की सरकार बनने पर आरक्षण लागू किया जाएगा।
2020 का अनुभव: एक सीट पर सिमटी थी बसपा
मायावती का यह बयान 2020 के बिहार चुनाव के अनुभव के बाद आया है, जहाँ बसपा ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा समेत छोटे दलों के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। बसपा ने 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन उसे केवल कैमूर जिले की चैनपुर सीट पर जीत मिली थी। चैनपुर से बसपा के विधायक बने जमा खान बाद में जेडीयू में शामिल हो गए थे और उन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंत्री बनाया था। अब मायावती की शर्त-आधारित गठबंधन की घोषणा, बिहार की राजनीति में बसपा की मोलभाव की क्षमता को बढ़ाने का प्रयास मानी जा रही है।


