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Mizoram- Full Literacy Rate: भारत का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बना मिज़ोरम, बना शिक्षा का चैंपियन - जानिए कैसे?
Mizoram- Full Literacy Rate: पूर्वोत्तर के घने जंगलों और सुनसान पहाड़ियों के बीच बसा हुआ एक राज्य 'मिज़ोरम' आज देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है जिसे ‘पूर्ण साक्षर’ (Fully literate) कहा गया है। लेकिन एक छोटा सा राज्य, सीमित संसाधनों के साथ किस प्रकार इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल कर पाया जबकि भारत में कई बड़े और विकसित राज्य हैं लेकिन वो आज भी इस लक्ष्य से बेहद दूर हैं।
Mizoram- Full Literacy Rate (photo credit: AI)
Mizoram- Full Literacy Rate: क्या कभी आपने इस बात पर विचार किया है कि अगर पूरे भारत में एक ऐसा राज्य हो जहाँ हर व्यक्ति, हर उम्र, हर वर्ग, हर कोना पढ़ना-लिखना जानता हो? भारत में ऐसा राज्य अब मात्र एक कल्पना नहीं रहा। जी हां, पूर्वोत्तर के घने जंगलों और सुनसान पहाड़ियों के बीच बसा हुआ एक राज्य 'मिज़ोरम' आज देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है जिसे ‘पूर्ण साक्षर’ (Fully literate) कहा गया है।
लेकिन एक छोटा सा राज्य, सीमित संसाधनों के साथ किस प्रकार इस राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल कर पाया जबकि भारत में कई बड़े और विकसित राज्य हैं लेकिन वो आज भी इस लक्ष्य से बेहद दूर हैं। आज इस लेख में हम आपको इसी से रूबरू कराने जा रहे हैं। एक रोचक और प्रेरणादायक कहानी से जो की संघर्ष, समुदाय की एकजुटता और शिक्षा को लेकर पूर्ण रूप से समर्पित हैं। यहां जानें मिज़ोरम के इस ऐतिहासिक सफर को जो अब भारतवासियों के लिए एक मिसाल बन चुका है।
मिज़ोरम की साक्षरता यात्रा
साल 2025 मई में मिज़ोरम ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब इसे भारत का पहला पूर्ण साक्षर (fully literate) राज्य घोषित किया गया। राज्य ने लगभग 98.2% साक्षरता दर प्राप्त की, जो कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा निर्धारित 95% के मानक से भी कहीं ज्यादा है। ये ऐतिहासिक ऐलान मुख्यमंत्री लालदुहोमा और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने आइज़ोल के मिज़ोरम विश्वविद्यालय में की।
साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, मिज़ोरम की साक्षरता दर लगभग 91.33% थी, जो देश में केरल और त्रिपुरा के बाद तीसरे स्थान पर थी। इसके बाद राज्य ने 'नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' (New India Literacy Programme - NILP) को ज़मीनी स्तर से जोड़ते हुए बचे निरक्षरों की शिक्षा पर जोर दिया।
इस पहल के तहत तकरीबन 3,026 निरक्षर लोगों की पहचान की गई, जिनमें से लगभग 1,692 ने स्वेच्छा (willingly) से शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा जाहिर की। इन शिक्षार्थियों को 292 स्वयंसेवक शिक्षकों के माध्यम से शिक्षा प्रदान की गयी जिनमें छात्र, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
मिज़ो समाज की असामान्य सांस्कृतिक भावना 'त्लावमगाइहना'
(Tlawmngaihna) ने इस आंदोलन को और अधिक मजबूत बनाया। मिज़ो समाज की यह भावना परोपकार, सामूहिकता और व्यक्तिगत कर्तव्य को प्राथमिकता देती है। इसी कारण आम लोगों ने खुद ही आगे आकर बड़ा निर्णय लिया और निरक्षरों को शिक्षित किया।
भारत के अन्य राज्यों की साक्षरता दर
साल 2017-18 में National Statistical Office के मुताबिक, भारत में साक्षरता दर (literacy rate) राज्यों के आधार पर बहुत अलग-अलग है। राष्ट्रीय औसत साक्षरता दर लगभग 77.7% है, जिसमें पुरुषों की दर 84.7% और महिलाओं की करीब 70.3% है।
भारत में उच्च साक्षरता दर वाले राज्य:
केरल – 96.2%
दिल्ली – 88.7%
त्रिपुरा – 87.75%
उत्तराखंड – 87.6%
गोवा – 87.4%
हिमाचल प्रदेश – 86.6%
असम – 85.9%
महाराष्ट्र – 84.8%
भारत में कम साक्षरता दर वाले राज्य:
बिहार – 61.8%
अरुणाचल प्रदेश – 65.38%
राजस्थान – 66.11%
आंध्र प्रदेश – 67.02%
उत्तर प्रदेश – 67.68%
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि शिक्षा का प्रसार भारत के अलग-अलग हिस्सों में असमान रूप से हुआ है। मिज़ोरम जैसे छोटे राज्य की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कई संसाधन संपन्न राज्य अब भी इस लक्ष्य से दूर हैं।
मिज़ोरम की सफलता का क्या का क्या कारण है ?
1. सामुदायिक भागीदारी (community involvement): गांवों से लेकर शहरों तक लोगों ने स्वयंसेवकों के रूप में भाग लिया। मिज़ोरम राज्य का हर घर, हर मुहल्ले के सभी लोग इस अभियान में शामिल हुए।
2. सरकारी नीतियाँ (government policies): शिक्षा विभाग ने हर जिले में सही निगरानी और समन्वय के लिए कई टीमें गठित की। NILP और ULLAS जैसे कार्यक्रमों को ज़मीनी स्तर से जोड़ा।
3. संस्कृति और सामाजिक सहयोग (Culture and Social Cooperation): मिज़ो समाज की सामूहिक मानसिकता और त्लावमगाइहना ने इसे एक आंदोलन का रूप में बदल दिया। पढ़ाना केवल शिक्षक का नहीं बल्कि वहां के हर नागरिक की प्राथमिकता बन गयी।
अब आगे की योजना क्या है?
मिज़ोरम की सरकार अपनी ये सफलता अब सिर्फ साक्षरता (literacy) तक सीमित नहीं रखना चाहती। मिज़ोरम अब डिजिटल की दुनिया में, वित्तीय और उद्यमिता साक्षरता पर काम करने की तैयारी में जुट गया है। इसके लिए डिजिटल संसाधनों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की जाएगी, ताकि हर व्यक्ति शिक्षित होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी माहिर बन सके।
एक प्रेरणादायक मिसाल
मिज़ोरम की यह ऐतिहासिक सफलता भारतवासियों के लिए एक बड़ा सबक है कि दृढ़ संकल्प, सरकार की नीति, सामुदायिक सहयोग और सांस्कृतिक मूल्यों का सही मिलान किसी भी लक्ष्य को पूर्ण रूप से संभव बना सकता है। जब एक छोटा सा राज्य अपने सीमित संसाधनों के बाद भी देश का पहला पूर्ण साक्षर राज्य बन सकता है तो भारत के बाकी राज्य क्यों नहीं?
शिक्षा मात्र व्यक्तिगत तरक्की नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता, आर्थिक विकास और लोकतंत्र के सशक्त होने का आधार भी है। मिज़ोरम राज्य के लोगों ने यह साबित कर दिया है। अब इस दिशा में आगे की ओर कदम बढ़ाने की बारी है भारत के अन्य राज्यों की।


