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PM Modi High Level Meeting: संसद भवन में अचानक मोदी की हाईलेवल मीटिंग! अमित शाह, जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज नेता मौजूद
PM Modi high level meeting: संसद सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलाई हाईलेवल मीटिंग, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का किया जिक्र, विपक्ष की चुप्पी ने बढ़ाई हलचल, क्या ये 2026 चुनावी रणनीति की शुरुआत है?
PM Modi High Level Meeting: नई दिल्ली की संसद आज केवल मानसून सत्र के लिए नहीं, बल्कि एक ‘राष्ट्रीय विजय यात्रा’ के साक्षी बनने के लिए सजाई गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र की शुरुआत एक अलग ही अंदाज़ में की शब्दों में जोश, चेहरों पर आत्मविश्वास और पीछे खड़ा था देश का सैन्य पराक्रम। संसद परिसर में जैसे ही पीएम मोदी ने भाषण देना शुरू किया, विपक्षी गलियारों में अचानक एक सन्नाटा फैल गया। वजह? ऑपरेशन सिंदूर की वो गर्जना, जिसने न सिर्फ आतंक के अड्डों को 22 मिनट में राख कर दिया, बल्कि पाकिस्तान की नापाक साजिशों को भी पूरी दुनिया के सामने नंगा कर दिया।
पीएम मोदी का शक्ति-संदेश, बम नहीं, संविधान की जीत
अपने उद्घाटन भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस अंदाज़ में देश के सैन्य सामर्थ्य को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया, वो संसद के इतिहास में कम ही देखने को मिला है। उन्होंने कहा , "आज बम और बंदूक नहीं, संविधान की विजय हो रही है। नक्सलवाद धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, रेड जोन अब ग्रीन ज़ोन में बदल रहा है।" उनकी आंखों में आत्मविश्वास था, लहजे में गर्व और हर शब्द जैसे विपक्ष पर एक वार की तरह गिर रहा था।
22 मिनट में आतंक का अंत, ऑपरेशन सिंदूर की सनसनी
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने केवल 22 मिनट में आतंक के अड्डों को जमींदोज कर दिया। ये वो जवाब था, जिसकी उम्मीद पाकिस्तान को नहीं थी और जिसकी कल्पना भी दुनिया ने नहीं की थी। संसद में मौजूद हर चेहरा इस उपलब्धि पर गर्व से चमक रहा था। कुछ सांसदों ने तालियां भी बजाईं, जबकि विपक्ष के कई चेहरे झुके हुए थे , जैसे उन्हें शब्द नहीं मिल रहे हों।
देशहित में दलगत राजनीति नहीं चलेगी
पीएम मोदी ने सिर्फ सैनिक शक्ति का ज़िक्र नहीं किया, उन्होंने राजनीतिक एकता की अपील भी की। उन्होंने कहा , "हर पार्टी का एजेंडा अलग हो सकता है, लेकिन देशहित में मन मिलना ज़रूरी है।" उन्होंने बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल की सराहना की, जिन्होंने विदेशों में जाकर पाकिस्तान को बेनकाब किया। ये वो वक्त था जब संसद एकजुट दिखी , कम से कम दिखावे के लिए ही सही, लेकिन एक झंडे के नीचे खड़ी हुई।
मोदी ऑफिस में हाई लेवल मीटिंग, क्या नया तूफान आने वाला है?
सत्र शुरू होने से पहले ही मोदी कार्यालय में जो हाई लेवल मीटिंग हुई, उसने अटकलों को और हवा दे दी है। इस मीटिंग में अमित शाह, जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, शिवराज सिंह चौहान, रिजिजू जैसे दिग्गज मौजूद थे। चर्चा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद अगला कदम पाकिस्तान को कूटनीतिक स्तर पर घेरने का है , एक ऐसा दांव जो उसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरी तरह अलग-थलग कर देगा।
‘विजयोत्सव’ या चुनावी बिगुल?
सवाल ये भी उठता है क्या संसद में हो रही ये राष्ट्रवादी गर्जना सिर्फ सैन्य सफलता का जश्न है या 2026 की चुनावी बिसात पर रखा गया पहला मोहरा? प्रधानमंत्री का बार-बार ‘विजयोत्सव’ कहना, विपक्ष को एकता के नाम पर ललकारना और मेड इन इंडिया रक्षा क्षमता का उल्लेख करना , इन सबका मेल किसी रणनीतिक स्क्रिप्ट का हिस्सा लग रहा है। और अगर ऐसा है, तो ये स्क्रिप्ट अभी शुरू ही हुई है।
विपक्ष की चुप्पी, क्या सचमुच डर गया है कोई?
सबसे रोचक बात रही विपक्ष की खामोशी। जहां आमतौर पर पीएम के हर बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं आती थीं, इस बार संसद में वो ऊर्जा नज़र नहीं आई। राहुल गांधी से लेकर अखिलेश यादव तक , सभी या तो चुप थे या असहज। ये खामोशी संकेत है कि ऑपरेशन सिंदूर का असर सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा , राजनीतिक गलियारों में भी इसकी धमक सुनाई दे रही है।
संसद में गरज रहा है भारत
इस मानसून सत्र की शुरुआत एक नई परंपरा की तरह हुई है , जहां बहस से पहले विजय का उत्सव है, राजनीति से पहले राष्ट्र है और सवालों से पहले सेना की शौर्यगाथा। ऑपरेशन सिंदूर ने जिस तरीके से पूरे देश को गर्व से भर दिया है, उससे साफ है कि यह सत्र सिर्फ क़ानून नहीं बनाएगा, बल्कि भारत की एक नई छवि , शक्तिशाली, संगठित और निर्णायक , भी दुनिया के सामने पेश करेगा।


