इतिहास रचा AIIMS ने! 900 ग्राम की नवजात शिशु की हृदय सर्जरी, पढ़ें पूरी खबर

Nagpur AIIMS Creates Medical History: इस छोटे और संवेदनशील शिशु पर सर्जरी करना बहुत जोखिमपूर्ण है। उसकी त्वचा, अंगों और शरीर की पूरी संरचना इतनी नरम है कि एक छोटी सी गड़बड़ी भी जानलेवा हो सकती थी।

Newstrack Network
Published on: 24 May 2025 8:45 PM IST

Nagpur AIIMS Creates Medical History: भारत में फिर से चिकित्सा क्षेत्र ने मानवता की मिसाल कायम की है।AIIMS, नागपुर में, एक 900 ग्राम वजन वाले नवजात शिशु को बचाया गया। यह बच्ची बहुत पहले पैदा हुई थी और एक जटिल हृदय रोग, "पेटेंटडक्टस आर्टेरियोसस" (PDA) से पीड़ित थी।AIIMS नागपुर की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो चिकित्सा क्षेत्र में एक मिसाल बन चुका है।

समय से पहले जन्म और संकट की शुरुआत

यह बच्ची महज 26 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद पैदा हुई। आम गर्भावस्था की अवधि से लगभग 40 सप्ताह की होती है । जन्म के समय उसका वजन बहुत कम था, सिर्फ 900 ग्राम, और वह एक्स्ट्रीम प्रीमैच्योर है। ऐसे बच्चों को अक्सर कई शारीरिक समस्याएं होती हैं और इस बच्ची के साथ भी यही हुआ। 
डॉक्टरों ने पाया कि उसे जन्म के बाद भी हृदय और फेफड़ों के बीच एक रक्त वाहिका खुली रहती है, जिसे PDA कहा जाता है। यह रक्त संचार को बाधित करता है और नवजात शिशु को सांस लेना मुश्किल बनाता है। दवा से कोई सुधार नहीं हुआ तो डॉक्टरों ने सर्जरी करने का निर्णय लिया।

एक कठिन फैसला: सर्जरी

इस छोटे और संवेदनशील शिशु पर सर्जरी करना बहुत जोखिमपूर्ण है। उसकी त्वचा, अंगों और शरीर की पूरी संरचना इतनी नरम है कि एक छोटी सी गड़बड़ी भी जानलेवा हो सकती थी। डॉक्टरों की टीम ने इसके बावजूद साहसिक निर्णय लिया और एक कठिन और जटिल प्रक्रिया—PDA Ligation Surgery—की योजना बनाई।

सफलता की कहानी

यह सर्जरी AIIMS नागपुर के नवजात देखभाल विशेषज्ञों और बाल हृदय सर्जनों ने मिलकर की। ऑपरेशन के दो दिन बाद, बच्ची ने खुद से सांस लेना शुरू कर दिया, धीरे-धीरे वजन बढ़ा और स्तनपान करने लगी।यह सब बताता था कि सर्जरी सफल रही और बच्ची का स्वास्थ्य अच्छा हो रहा है।उसे अस्पताल से कुछ ही हफ्तों में छुट्टी मिल गई और अब अपने भाई या बहन के साथ घर पर है।यह उसके माता-पिता और परिवार के लिए एक बड़ा चमत्कार था।

स्थानीय हीरो: डॉक्टरों की टीम

अब इस सर्जरी को सफल बनाने में योगदान देने वाले डॉक्टरों की टीम को स्थानीय हीरो कहा जा रहा है। उनकी क्षमता, धैर्य ने जीवन को नए अवसर दिए। यह सर्जरी नागपुर क्षेत्र में इस तरह की पहली है।

क्यों है यह उपलब्धि इतनी खास?

1. अत्यंत कम वजन पर सर्जरी:

900 ग्राम के एक बच्चे का हृदय सर्जरी करना बहुत मुश्किल और दुर्लभ है।

2. स्वदेशी स्वास्थ्य प्रणाली की क्षमता:

इस सफलता से पता चलता है कि भारत के सरकारी निकाय भी विश्व स्तरीय चिकित्सा प्रदान करने में सक्षम हैं।

3. प्रेरणास्पद उदाहरण:

यह घटना हजारों डॉक्टरों और नर्सों को प्रेरित करती है कि ज्ञान और समर्पण से कुछ भी असंभव नहीं है।

4. माता-पिता की भावनाएं

बच्ची के माता-पिता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने उम्मीद खो दी थी।” इतने छोटे बच्चे की सर्जरी की कल्पना से मुझे डर लग गया। लेकिन AIIMS की टीम ने हमें जिस तरह साहस से बताया और फिर चमत्कार कर दिखाया, उसके लिए हम जीवन भर आभारी रहेंगे।”

समाज में संदेश

यह घटना सिर्फ एक चिकित्सा सफलता नहीं है; यह एक सामाजिक संदेश भी है कि हर जीवन महत्वपूर्ण है, चाहे वह कमजोर या असहाय क्यों न हो। किसी भी कठिन परिस्थिति को बदलने के लिए समय पर मेडिकल सुविधाओं तक पहुंच और विशेषज्ञों की टीम का सहयोग आवश्यक है।

सरकार और संस्थानों के लिए सबक

इस सफलता के बाद, सरकार और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को हर क्षेत्र में ऐसी सुविधाएं देने के लिए प्रेरित करना चाहिए। अब बच्चों की हृदय संबंधी बीमारियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों और उपकरणों की जरूरत है।

AIIMS की शुरुआत कैसे हुई?

1956 में नई दिल्ली में AIIMS की स्थापना हुई थी।स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे संसद के एक अधिनियम से बनाया था।इसका लक्ष्य था भारत में विश्वस्तरीय चिकित्सकों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य सेवाओं को बनाना।

भारत में कितने AIIMS हैं?

भारत में 2025 तक 26 AIIMS संस्थान हैं।इनमें से अधिकांश काम कर रहे हैं, और कुछ अभी बनाया जा रहा है।

प्रमुख AIIMS संस्थान

1. AIIMS दिल्ली: यह सबसे पुराना और सम्मानित संगठन है। हर साल यहाँ से हजारों चिकित्सक, विशेषज्ञ और वैज्ञानिक निकलतेहैं।

2. AIIMS भोपाल, पटना, भुवनेश्वर, जोधपुर, रायपुर औरऋषिकेश – ये सभी 2012 में शुरू हुए और अब पूरी तरह से कामकर रहे हैं।

3. AIIMS नागपुर, मंगलगिरी (आंध्र प्रदेश), गोरखपुर, कल्याणी(पश्चिम बंगाल), और बठिंडा (पंजाब)नए संस्थान भी अपनी पूरी क्षमता से सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

4. AIIMS दरभंगा, मडुरै, राजकोट, बेंगलुरु, और गुवाहाटी ऐसेसंस्थान जो हाल ही में शुरू हुए हैं या बन रहे हैं।

AIIMS में क्या खास है?

मुफ्त या बहुत कम दर पर इलाज: आम जनता को जटिल बीमारियों का इलाज बेहद कम खर्च में उपलब्ध होताहै।

उच्च गुणवत्ता वाली मेडिकल शिक्षा: MBBS से लेकरसुपर-स्पेशलाइजेशन तक की पढ़ाई।

विश्वस्तरीय रिसर्च: कैंसर, कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, महामारीविज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर अग्रणी शोध।

मेडिकल नवाचार: नई तकनीकों और सर्जिकल प्रक्रियाओं काविकास।

AIIMS में दाखिला कैसे मिलता है?

MBBS कोर्स के लिए, राष्ट्रीय स्तर की NEET-UG परीक्षाअनिवार्य है।

MD, MS, DM, M.Ch और अन्य पीजी कोर्स के लिए INI-CET परीक्षा के माध्यम से चयन होता है।

सभी सीटें मेरिट और आरक्षण नीति के आधार पर दी जाती हैं।

AIIMS की खासियतें

अत्याधुनिक लैब और ऑपरेशन थियेटर।

अनुभवी फैकल्टी और चिकित्सक।

भारत भर से आने वाले मरीजों का मुफ्त इलाज।

इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर की सुविधाएं।

नर्सिंग और पैरामेडिकल ट्रेनिंग।

क्यों ज़रूरी हैं इतने AIIMS?

AIIMS भारत जैसे विशाल और विविध देश में हर राज्य में होने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

आम लोगों को अपने राज्य में ही उच्च गुणवत्ता का इलाज मिलता है।

मेडिकल शिक्षा का विस्तार होता है।

ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचती हैं।

शोध और विकास को बढ़ावा मिलता है।

सरकार की योजना

भारत सरकार चाहती है कि हर राज्य में कम से कम एक AIIMS हो, ताकि सभी को समान चिकित्सा मिल सके। 26 AIIMS अभी कार्यरत हैं या बन रहे हैं, और भविष्य में और भी हो सकते हैं।

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