संकट नहीं, अवसर, ट्रंप टैरिफ भारत के लिए गेम चेंज, विशेषज्ञ बोले- सुधारों की बड़ी छलांग लगाने का मिला मौका

ट्रंप के टैरिफ फैसले को विशेषज्ञ संकट नहीं, बल्कि भारत के लिए बड़ा अवसर मान रहे हैं। यह कदम आर्थिक सुधारों की नई छलांग का रास्ता खोल सकता है। भारत के लिए ये गेम चेंजर साबित हो सकता है।

Shivam
Published on: 7 Aug 2025 4:47 PM IST (Updated on: 8 Aug 2025 4:38 PM IST)
संकट नहीं, अवसर, ट्रंप टैरिफ भारत के लिए गेम चेंज, विशेषज्ञ बोले- सुधारों की बड़ी छलांग लगाने का मिला मौका
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राष्ट्रपति डॉन्लड ट्रंप ने भारत से होने वाले उत्पादों पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया है। फैसला के ऐलान होने के 21 दिन बाद से यह टैरिफ लागू हो जायेगा। इसे लेकर भारत में काफी तनाव की स्थिति हो गई थी। कई लोगों को मानना है कि इन टैरिफ से भारत की इकॉनमी को गहरा धक्का लग सकता है क्योंकि अमेरिका भारत के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर में से एक है।

हालांकि कई विशेषज्ञ और बड़े उद्योगपति इसे एक सुनहरे मौके के रूप में देख रहे हैं। नीति आयोग के पूर्व सीइओ अमिताभ कांत ने अमेरिकी टैरिफ को लेकर कहा है दोनों के बीच बने व्यापारिक तनाव ने भारत के जीवन में मिलने वाले एक सुनहरे अवसर के रूप में बताया है।

अमिताब कांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ट्रम्प ने हमें सुधारों की दिशा में अगली बड़ी छलांग लगाने का एक अनोखा अवसर प्रदान किया है। संकट का पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने आगे ये भी बताया अमेरिकी दबाव के बावजूद भारतीय रूपया तेजी से मजबूत हो रहा है। जो इस बात का सबूत है कि भारत की अर्थव्यवस्था बेहद स्थिर है। यह स्थिति भारत के लिये एक अवसर के रूप में काम कर सकती है।

बिजनेस टाइकून आनंद महिंद्रा ने भी ट्रंप टैरिफ पर दी प्रतिक्रिया

बिजनेस मैन आनंद महिंद्रा ने अमेरिकी टैरिफ पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि अमेरिका द्वारा छेड़े गए मौजूदा टैरिफ युद्ध में 'अनपेक्षित परिणामों का नियम' चुपके से काम करता दिख रहा है। उन्होंने कनाडा का उदाहरण पेश करते हुये उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने बताया कि कनाडा के राज्य आपस में ही ट्रेड को बाधित करने के लिये बदनाम हैं। लेकिन अब इसे दूर करने के लिये बेहद सार्थक कदम उठाये जा रहे हैं जिससे साझा बाजार के करीब आ रहा है और आर्थिक लचीलापन बढ़ा है। ये दोनों 'अनपेक्षित परिणाम' वैश्विक विकास के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक परिणाम बन सकते हैं।

उन्होंने दूसरा उदाहरण यूरोपियन यूनियन का दिया और बताया कि यूरोपीय संघ ने विकसित हो रही वैश्विक टैरिफ व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है और अपनी रणनीतिक समायोजन प्रक्रिया के साथ प्रतिक्रिया दे रहा है। फिर भी, इस टकराव ने यूरोप को अपनी सुरक्षा निर्भरता पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है, जिसके परिणामस्वरूप फ्रांस और जर्मनी में रक्षा खर्च में वृद्धि हुई है। इस प्रक्रिया में, जर्मनी ने अपनी राजकोषीय रूढ़िवादिता में नरमी बरती है, जो यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में पुनरुत्थान को उत्प्रेरित कर सकती है। दुनिया को विकास का एक नया इंजन मिल सकता है।

ये दोनों 'अनपेक्षित परिणाम' वैश्विक विकास के लिए दीर्घकालिक सकारात्मक परिणाम बन सकते हैं। क्या भारत को भी इस अवसर का लाभ उठाकर अपने लिए एक सकारात्मक परिणाम तैयार नहीं करना चाहिए? जिस तरह 1991 के विदेशी मुद्रा भंडार संकट ने उदारीकरण को गति दी, क्या आज टैरिफ पर चल रहा वैश्विक 'मंथन' हमारे लिए कुछ 'अमृत' ला सकता है?

आनंद महिंद्रा ने दिए दो ठोस सुझाव

आनंद महिंद्रा ने दो ठोस सुझाव देते हुये बताया कि पहला हम व्यापार करने की सुगमता में आमूल-चूल सुधार लाकर भारत को क्रमिक सुधारों से आगे बढ़कर सभी निवेश प्रस्तावों के लिए एक वास्तविक रूप से प्रभावी एकल-खिड़की स्वीकृति प्रणाली बनानी होगी। चूंकि कई निवेश नियमों पर राज्यों का नियंत्रण होता है, हम इच्छुक राज्यों के एक गठबंधन से शुरुआत कर सकते हैं जो एक राष्ट्रीय एकल-खिड़की प्लेटफ़ॉर्म के साथ जुड़ सके। और अगर गति, सरलता और पूर्वानुमानशीलता का प्रदर्शन करते हैं, तो हम विश्वसनीय साझेदारों की तलाश कर रही दुनिया में भारत को वैश्विक पूंजी के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना सकते हैं।

और दूसरा विदेशी मुद्रा इंजन के रूप में पर्यटन की शक्ति का उपयोग करें। पर्यटन विदेशी मुद्रा और रोज़गार के सबसे कम उपयोग किए जाने वाले स्रोतों में से एक है। हमें वीज़ा प्रक्रिया में नाटकीय रूप से तेज़ी लानी होगी, पर्यटकों की सुविधा में सुधार करना होगा, और मौजूदा आकर्षण केंद्रों के आसपास समर्पित पर्यटन गलियारे बनाने होंगे, जो सुनिश्चित सुरक्षा, स्वच्छता और स्वास्थ्य प्रदान करें। ये गलियारे उत्कृष्टता के आदर्श के रूप में कार्य कर सकते हैं, अन्य क्षेत्रों को राष्ट्रीय मानकों का अनुकरण करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।

एमएसएमई के लिए तरलता और समर्थन; बुनियादी ढाँचे में निवेश में तेजी; पीएलआई योजनाओं के दायरे में वृद्धि और विस्तार के माध्यम से विनिर्माण को बढ़ावा; आयात शुल्क को युक्तिसंगत बनाना ताकि विनिर्माण इनपुट पर शुल्क कम हो और हमारी प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो। इससे जो अनपेक्षित परिणाम उत्पन्न करते हैं, वे सबसे अधिक जानबूझकर और परिवर्तनकारी हों।

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Shivam is a multimedia journalist.

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