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छोटे से देश क्रोएशिया ने जीता दिल, फुटबॉल संग अन्‍य खेलों में शानदार रहा है प्रदर्शन 

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sudhanshuBy sudhanshu

Published on 17 July 2018 1:18 PM GMT

छोटे से देश क्रोएशिया ने जीता दिल, फुटबॉल संग अन्‍य खेलों में शानदार रहा है प्रदर्शन 
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अंशुमान तिवारी

लखनऊ: इस बार के फीफा वर्ल्‍ड कप में क्रोएशिया सबसे ज्यादा चर्चाओं में रहा। इस टूर्नामेंट में बड़ी-बड़ी दिग्गज टीमों की जल्द ही विदाई हो गयी मगर यूरोप के इस छोटे से देश ने पहले सेमीफाइनल और फिर फाइनल में पहुंचकर सबको चौंका दिया। क्रोएशिया ने सेमीफाइनल मैच में इंग्लैंड को 2-1 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई। फाइनल मुकाबले में भले ही क्रोएशिया फ्रांस से हार गया,लेकिन इस देश के जोरदार खेल की पूरी दुनिया में चर्चा है। फाइनल मुकाबला हार जाने के बावजूद मीडिया व सोशल मीडिया दोनों में फ्रांस से ज्यादा चर्चा क्रोएशिया की है। कहा जा रहा है कि फ्रांस ने भले कप जीत लिया हो मगर पहली बार फाइनल में पहुंचने वाले क्रोएशिया ने सबका दिल जीत लिया। वैसे खेल की दुनिया में क्रोएशिया ने फुटबॉल ही नहीं बल्कि अन्य खेलों में भी शानदार प्रदर्शन किया है।

महज 27 साल पहले मिली आजादी

इंटरनेट पर इन दिनों क्रोएशिया की ही धूम है। अभी तक लोगों को इस देश की कम जानकारी रही है और यही कारण है कि लोग इस देश के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल करने की कोशिश में लगे हैं। लोग यह जानकार हैरान हैं कि एक छोटा सा देश जिसने महज 27 साल पहले ही आजादी हासिल की है वह फुटबॉल की इतनी बड़ी ताकत बनकर उभरा है। उसने फुटबॉल की कई दिग्गज टीमों को हराकर फाइनल का सफर तय किया। यही कारण है कि हर कोई इंटरनेट पर इस देश के बारे में जानकारी हासिल करने में जुटा है। असल में लोगों को क्रोएशिया के इतिहास व संघर्षों के बारे में काफी कम जानकारी है और इसी कारण हर कोई इस बाबत जानना चाहता है।

25 साल पहले मिली फीफा से मान्यता

युगोस्लाविया से अलग होकर क्रोएशिया 1991 में अलग देश बना है। देश की फुटबॉल टीम इसकी आजादी से एक साल पहले ही बनी थी। 1993 में इस देश को फीफा व यूईएफए से मान्यता मिली। इस तरह इस देश को फीफा की मान्यता मिले अभी पच्चीस साल ही हुए हैं और पच्चीस साल में ही इस देश ने फीफा विश्वकप में कमाल कर दिखाया। यह कितना छोटा देश है इसे इसकी जनसंख्या से समझा जा सकता है। इस देश की आबादी महज 42 लाख है। इससे ज्यादा आबादी तो भारत के कई शहरों में रहती है मगर इतनी कम आबादी वाले देश फीफा कप में बड़ा धमाका कर दिया। इसके पड़ोसी देशों में हंगरी, सर्बिया, बोस्निया और हर्जेगोविना आदि हैं।

महज 42 लाख की है आबादी

इस देश की जनसंख्या इतनी कम है कि जनसंख्या के लिहाज से इसे दुनिया में 125वां स्थान हासिल है। साल 2016 में देश की जनसंख्या के आंकड़े जारी किए गए थे और उस हिसाब से देश की जनसंख्या 42 लाख बताई गई थी। देश की जनसंख्या के आंकड़ों के हिसाब से सबसे ज्यादा 90.4 फीसदी लोग क्रोएट, 4.4 फीसदी सर्ब और उसके बाद 5.9 फीसदी बोस्नियाक्स, हंगेरियाई, इटैलियन, जर्मन, चेक, रोमन आदि मूल के लोग हैं।

कम्युनिस्टों के पतन से बदली स्थितियां

पहले विश्वयुद्ध के दौरान क्रोएशिया में जनधन की बड़े पैमाने पर हानि हुई। क्रोएशिया को इस मोर्चे पर काफी नुकसान उठाना पड़ा। यहां शासन कर रहे हब्सबर्ग साम्राज्य का अंत होने पर क्रोएशिया यूगोस्लाविया का हिस्सा बन गया। 1980 में युगोस्लाविया में स्थितियां बदलने लगीं। देश के शासक टीटो की मौत के बाद देश में आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक नजरिये से बड़ी परेशानियों का दौर शुरू हो गया। इस दौरान सोवियत संघ और पूरे पूर्वी यूरोप की स्थितियों में बदलाव हो रहा था। कम्युनिस्टों के पतन का असर युगोस्लाविया में दिखा और यहां की स्थितियों में बदलाव दिखने लगा।

पहले चुनाव में कम्युनिस्ट किनारे

१९९० में युगोस्लाविया की स्थितियों में काफी बदलाव आया। 23 जनवरी 1990 को कम्युनिस्ट लीग ने अपनी 14वीं कांग्रेस में क्रोएशिया पर से राजनीतिक आधिपत्य खत्म करना का ऐतिहासिक फैसला लिया। इसके बाद क्रोएशिया में चुनाव कराने का फैसला किया गया। 22 अप्रैल और 7 मई 1990 को क्रोएशिया में पहली बार बहुदलीय चुनाव हुए जिसमें क्रोएशियन डेमोक्रेटिक यूनियन पार्टी ने 42 फीसदी मतों के साथ जीत हासिल की। कम्युनिस्ट पार्टी को इस चुनाव में महज 26 फीसदी वोट हासिल हुए। क्रोएशिया में हुए पिछले चुनाव में कोलिंदा ग्रैबर कितारोविक की पहली महिला राष्टï्रपति चुनी गयीं। कोलिंदा खुद भी फुटबॉल की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं और रूस में फीफा कप में क्रोएशिया के मैचों के दौरान कोलिंदा ने जबर्दस्त उत्साह दिखाया। क्रोएशिया की टीम की जीत के बाद वे ड्रेसिंग रूम में जाकर खिलाडिय़ों से व्यक्तिगत रूप से मिलती भी थीं।

क्रोएशिया की संसद ने 2 मई 1991 को आजादी को लेकर जनमत संग्रह कराया था। इसमें क्रोएशिया के 93.24 फीसदी लोगों ने देश में आजादी का समर्थन किया। लोगों की रायशुमारी का सम्मान करते हुए क्रोएशिया की संसद ने 25 जून,1991 को देश की आजादी का ऐलान किया था। वैसे इस ऐलान के बावजूद देश की समस्याओं का अंत हुआ। 1995 तक देश में विभिन्न नस्लों के बीच सशस्त्र संघर्ष चलता रहा।

फुटबॉल में किया कमाल

आधुनिक क्रोएशिया की टीम 1990 में बनीं। छह साल के बाद टीम ने पहले मेजर टूर्नामेंट-यूरो 1996 में हिस्सा लिया। इसमें क्वार्टरफाइनल में क्रोएशिया को जर्मनी के हाथों शिकस्त झेलनी पड़ी। यूरो 1996 की सफलता उस युग की शुरुआत थी, जिसे स्वर्णिम पीढ़ी के नाम से जाना गया। फ्रांस में हुए 1998 विश्व कप में क्रोएशिया तीसरे स्थान पर रहा। यह पुर्तगाल द्वारा 1966 में तीसरे स्थान पर रहने के बाद किसी भी देश द्वारा सर्वश्रेष्ठ विश्व कप डेब्यू रहा। क्रोएशिया के लिए एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि उसके स्टार डेवोर सुकेर को टूर्नामेंट में 6 गोल करने के लिए गोल्डन बूट का खिताब मिला। इसके बाद क्रोएशिया ने 2002, 2006 और 2014 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने में कामयाब हुई मगर टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी। क्रोएशिया यूरोपियन चैंपियनशिप्स में 2008 में क्वार्टरफाइनल जबकि 2016 में राउंड ऑफ 16 तक ही पहुंच सका। मौजूदा विश्व कप में क्रोएशिया की एक और स्वर्णिम पीढ़ी का उदय हुआ, जिसमें लुका मोड्रिक, इवान राकिटिच और मारियो मैंडजुकिच जैसे स्टार खिलाड़ी शामिल रहे। इन खिलाडिय़ों ने अपने जोरदार प्रदर्शन से छोटे से देश को बड़ी खुशी मनाने का मौका दे दिया।

टेनिस के खेल में भी आगे क्रोएशिया

क्रोएशिया की टीम फुटबॉल में ही मजबूत नहीं बल्कि इस देश की टीम ने कई अन्य खेलों में भी जोरदार प्रदर्शन किया है। सच्चाई तो यह है कि क्रोएशिया ने फुटबॉल से ज्यादा बेहतर प्रदर्शन टेनिस में किया है। 2005 में क्रोएशिया ने डेविस कप खिताब जीता, जिसमें 160 देशों ने हिस्सा लिया था और इसे टेनिस का विश्व कप की तरह माना जा रहा था। फिर 2016 में वह रनर्स-अप रहा। गोरान इवानिसेविच क्रोएशिया के पहले दिग्गज टेनिस स्टार हैं, जिन्होंने 2001 में विंबलडन का खिताब जीता। पुरुष सिंगल्स के लिए गोरान को वाइल्ड कार्ड एंट्री मिली थी। इवा मजोली क्रोएशिया के लिए पहली ग्रैंडस्लैम सफलता लेकर आईं। उन्होंने 1997 फ्रेंच ओपन के महिला सिंगल्स के फाइनल में स्विट्जरलैंड की मार्टिना हिंगिस को मात देकर खिताब जीता। मौजूदा समय में मरीन सिलिच क्रोएशिया के टेनिस स्टार बने हुए हैं। उन्होंने 2014 में यूएस ओपन पुरुष सिंगल्स का खिताब जीता। वहीं डबल्स में मेट पेविच सबसे चर्चित टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने पुरुष डबल्स के तीन खिताब जीते हैं। वह क्रोएशिया के पहले टेनिस खिलाड़ी हैं जो एटीपी रैंकिंग में नंबर-1 बने।

ओलंपिक में भी कामयाबी

युगोस्लाविया से 1991 में आजाद होने के बाद क्रोएशिया ने सात ओलंपिक खेलों में 11 गोल्ड, 10 सिल्वर और 12 ब्रोंज मेडल जीते हैं। टेनिस, हैंडबॉल और वाटर पोलो के अलावा क्रोएशिया के खिलाडिय़ों ने भारत्तोलन, एथलेटिक्स, निशानेबाजी और रोइंग में भी बढिय़ा प्रदर्शन किया।

वाटर पोलो में बादशाहत

वाटर पोलो एक ऐसा खेल है जिस पर क्रोएशिया की जबर्दस्त पकड़ है। क्रोएशिया की टीम ने 2012 लंदन ओलंपिक में इस खेल में गोल्ड मेडल जीता जबकि 1996 एटलांटा और 2016 रियो ओलंपिक में टीम सिल्वर मेडल जीतने में कामयाब रही। क्रोएशिया ने 2002 और 2017 वल्र्ड चैंपियनशिप्स जीती और यूरोपियन चैंपियनशिप्स, वल्र्ड कप व वल्र्ड लीग में कई मेडल जीते।

हैंडबॉल में भी क्रोएशिया लाजवाब

क्रोएशिया में हैंडबॉल भी काफी लोकप्रिय खेल है। क्रोएशिया की पुरुष टीम ने शानदार शुरुआत करते 1996 के एटलांटा ओलंपिक में इस खेल का गोल्ड मेडल जीता। स्वतंत्र देश के रूप में क्रोएशिया की टीम दूसरी बार ओलंपिक में शामिल हुई थी। उस समय टीम में गुटबाजी के कारण खराब तैयारी होने के बावजूद क्रोएशिया गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहा। युगोस्लाविया से हैंडबॉल की परंपरा लेने वाले क्रोएशिया ने 2003 में वल्र्ड चैंपियनशिप्स जीतने के बाद 2004 ओलंपिक्स में फिर गोल्ड जीता। इसके अलावा अंतर्राष्‍ट्रीय स्तर पर क्रोएशिया की टीम कई मेडल जीतने में कामयाब रही।

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